अमेरिका ने भारत के साथ की 92.8 मिलियन डॉलर की डील: जेवलिन मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल को मिली मंजूरी, जानिए पूरी खबर..

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) ने गुरुवार (20 नवंबर, 2025) को यह जानकारी दी की अमेरिका द्वारा भारत को 92.8 मिलियन डॉलर मूल्य के जेवलिन मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल की संभावित बिक्री को मंजूरी दी गई है। इस कदम से दोनों देशों के बीच न सिर्फ व्यापार तनाव कम होगा, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। इस निर्णय को भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है।

us signed a $92.8 million deal with india

इस प्रस्तावित बिक्री की मुख्य बातें:

अमेरिकी विदेश विभाग ने कुल 92.8 मिलियन डॉलर की संभावित हथियार बिक्री को मंजूरी दी है, जिसमें जेवलिन मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल शामिल हैं।

  • जेवलिन मिसाइल सिस्टम: इस सिस्टम की अनुमानित कीमत 7 मिलियन डॉलर है, और भारत ने इसके तहत कई महत्वपूर्ण उपकरणों की मांग की है। इसमें 100 FGM-148 जैवलिन राउंड, परीक्षण और प्रदर्शन के लिए 1 FGM-148 मिसाइल, 25 कमांड लॉन्च यूनिट, प्रशिक्षण और सिमुलेशन के लिए आवश्यक उपकरण, साथ ही स्पेयर पार्ट्स और पूरे सिस्टम के लाइफसाइकल सपोर्ट जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। यह पूरा पैकेज भारतीय सेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने में मदद करेगा।
  • एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल: इसकी कीमत लगभग 1 मिलियन डॉलर है, और इस पैकेज में भारत को उन्नत सटीकता वाले 216 M982A1 एक्सकैलिबर सामरिक प्रोजेक्टाइल मिलेंगे। इसके साथ ही आवश्यक सहायक उपकरण, फायर कंट्रोल सिस्टम और अमेरिकी विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सहायता सहित अन्य सपोर्ट सेवाएँ भी शामिल होंगी। यह पूरा सेट भारत की तोपखाना क्षमता को और आधुनिक, सटीक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 

FGM-148 जेवलिन और M982 एक्सकैलिबर की विशेषताएँ:

  • FGM-148 जेवलिन एक अमेरिकी पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल है, जो 1996 से उपयोग में है और लगातार अपग्रेड होती रहती है। इसका फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम सैनिक को मिसाइल छोड़ते ही तुरंत कवर लेने की सुविधा देता है, क्योंकि इसकी इन्फ्रारेड गाइडेंस खुद लक्ष्य का पीछा करती है। इसमें लगा HEAT वारहेड आधुनिक टैंकों को ऊपर से मारकर आसानी से भेद सकता है।
  • M982 एक्सकैलिबर एक 155 मिमी का अत्यंत सटीक GPS-निर्देशित तोपखाना गोला है, जिसे अमेरिकी सेना ने रेथियॉन और BAE सिस्टम्स जैसी कंपनियों के साथ मिलकर बनाया है। इसकी खासियत यह है कि इसे बहुत नज़दीक मौजूद अपने सैनिकों (75–150 मीटर) के आसपास भी सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है और यह भीड़भाड़ या नागरिक इलाकों में सटीक प्रहार कर सकता है।

 

सौदे के मुख्य ठेकेदार:

रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे को पूरा करने की जिम्मेदारी आरटीएक्स कॉर्पोरेशन और लॉकहीड मार्टिन की संयुक्त जेवलिन जॉइंट वेंचर (JJV) टीम संभालेगी, जिनके कार्यालय ऑरलैंडो (फ्लोरिडा) और टक्सन (एरिज़ोना) में हैं। फिलहाल अमेरिकी सरकार को इस डील से जुड़े किसी भी “ऑफसेट समझौते” की जानकारी नहीं है। यदि कोई ऑफसेट होगा, तो भारत और ठेकेदार कंपनियाँ मिलकर आगे की बातचीत में तय करेंगी।

रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि इस सौदे को लागू करने के लिए भारत में किसी अतिरिक्त अमेरिकी सरकारी अधिकारी या ठेकेदार को तैनात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही, यह बिक्री अमेरिकी सैन्य तैयारी या रक्षा क्षमता पर किसी भी तरह का नकारात्मक असर नहीं डालेगी।

 

इस प्रस्तावित बिक्री के मायने:

यह संभावित बिक्री अमेरिका और भारत के रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने वाला कदम है। DSCA ने कहा कि यह सौदा अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को भी समर्थन देता है, क्योंकि भारत-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में भारत एक स्थिरता, शांति और आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण शक्ति है। एजेंसी ने बताया कि कांग्रेस को इसकी औपचारिक जानकारी दे दी गई है और सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

 

भारत को कितना फायदा?

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस बिक्री से क्षेत्र में सैन्य संतुलन नहीं बदलेगा, बल्कि भारत की सेना को अधिक सटीक और प्रभावी क्षमता मिलेगी, जिससे उसकी ब्रिगेड पहले हमले में ही अधिक सटीक प्रहार कर सकेंगी। इस समझौते से भारत की वर्तमान और भविष्य के खतरों का सामना करने की क्षमता बढ़ेगी, उसकी रक्षा तैयारी मजबूत होगी और वह क्षेत्रीय खतरों को बेहतर तरीके से रोक सकेगा।

 

भारतीय सेना अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध:

साल की शुरुआत में, भारतीय सेना ने अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए ब्रिटेन की कंपनी थेल्स से लाइट वेट मॉड्यूलर मिसाइल (LMM) प्रणाली खरीदने का समझौता किया था।

LMM एक हल्की और आसानी से ले जाने योग्य मिसाइल है, जिसे ऊँचाई वाले इलाकों सहित अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह लेज़र बीम-राइडिंग तकनीक से सटीक निशाना साधती है और आसपास के नुकसान (collateral damage) को बहुत कम रखती है। इसमें तीन तरह का प्रभाव देने वाला वारहेड और प्रॉक्सिमिटी फ़्यूज़ लगा होता है, जिससे यह 6 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर सभी मौसमों में विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन (UAV/UCAV) और कम इन्फ्रारेड सिग्नल वाले लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक भेद सकती है।

 

आइए जानते है भारतीय रक्षा उद्योग के बारे में:

भारत का रक्षा उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने रिकॉर्ड ₹1.54 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन किया है। सरकार का लक्ष्य है कि यह आंकड़ा इसी वित्त वर्ष में ₹1.75 लाख करोड़ तक पहुँचे और वर्ष 2029 तक इसे बढ़ाकर ₹3 लाख करोड़ किया जाए। यह बढ़ोतरी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की वजह से संभव हुई है, जिसमें घरेलू उत्पादन, नई तकनीक और निर्यात पर ज़ोर दिया जा रहा है।

 

रक्षा उत्पादन बढ़ने के लिए सरकारी पहलें:

  • रक्षा खरीद नीति 2016: तेज़ हथियार खरीद और भारतीय तकनीक को प्राथमिकता।
  • iDEX: स्टार्टअप और MSME को नई रक्षा तकनीक बनाने के लिए फंड व समर्थन।
  • स्प्रिंट पहल: नौसेना में 75 स्वदेशी तकनीकें जोड़ने का लक्ष्य।
  • निर्माण सुधार: लाइसेंस आसान, FDI बढ़ी, घरेलू खरीद 68% तक पहुँची।
  • रक्षा गलियारे: यूपी और तमिलनाडु में दो उद्योग गलियारे।
  • स्वदेशीकरण सूची: कई रक्षा आयातों पर रोक, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।
  • ई-बिज़ पोर्टल: लाइसेंस प्रक्रिया डिजिटल।

 

निष्कर्ष:

अमेरिका द्वारा भारत को 92.8 मिलियन डॉलर मूल्य के जेवलिन मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल की संभावित बिक्री को मंजूरी मिलना दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है। यह कदम व्यापारिक तनाव कम करने के साथ-साथ भारत की सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा को भी सशक्त बनाएगा। इसे भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।

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