अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी और वैश्विक प्रतिक्रियाएं

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में हाल ही में घटित घटनाओं ने संपूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। अमेरिकी सशस्त्र बलों द्वारा संचालित एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया गया। यह ऐतिहासिक घटना 2 जनवरी की मध्यरात्रि को घटित हुई, जब अमेरिकी विशेष बलों ने राजधानी काराकस में एक सुनियोजित सैन्य हमला किया। इस असाधारण कार्रवाई के परिणामस्वरूप वैश्विक राजनीति में तीव्र उथल-पुथल मची है और विभिन्न देशों ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।

Venezuelan President Maduro arrest in US military

सैन्य अभियान का विस्तृत विवरण

अमेरिकी सेना द्वारा संचालित यह जटिल सैन्य कार्रवाई लगभग ढाई घंटे की अवधि तक जारी रही। इस विशाल अभियान में वायुसेना, जलसेना और विशेष कमांडो बलों ने अत्यंत समन्वित तरीके से भागीदारी की। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस व्यापक ऑपरेशन में 150 से अधिक युद्धक विमानों और हजारों सैनिकों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अमेरिकी सैन्य रणनीति का मूल उद्देश्य यह था कि वेनेजुएला के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर एक साथ समन्वित हमला किया जाए ताकि लक्ष्य व्यक्ति को पलायन का कोई अवसर न मिल सके।

इस अत्यंत गोपनीय अभियान की तैयारी कई महीनों से चल रही थी। अमेरिकी सैन्य खुफिया विभागों और गुप्तचर एजेंसियों ने दीर्घकाल तक राष्ट्रपति मादुरो की दैनिक गतिविधियों, उनके विभिन्न निवास स्थानों, उनकी दिनचर्या और सुरक्षा व्यवस्था पर सूक्ष्म निगरानी रखी थी। अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ्स के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने स्पष्ट रूप से बताया कि एकत्रित की गई इसी विस्तृत खुफिया सूचना के आधार पर संपूर्ण सैन्य योजना तैयार की गई थी।

 

अभियान के दौरान काराकास शहर की संपूर्ण बिजली आपूर्ति को बाधित कर दिया गया, जिससे अंधकार में अमेरिकी विशेष बलों को रणनीतिक और सामरिक लाभ प्राप्त हो सके। स्थानीय निवासियों ने कम से कम सात शक्तिशाली विस्फोटों की गड़गड़ाहट सुनी। आश्चर्यजनक रूप से, पूरा अभियान मात्र तीस मिनट से भी कम अवधि में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया, जो अमेरिकी सैन्य दक्षता का प्रमाण है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बताया कि मादुरो उस समय एक अत्यंत सुरक्षित राष्ट्रपति भवन में थे, जो किसी किले की भांति संरक्षित था। वहां एक विशेष सुरक्षा कक्ष था जिसकी दीवारें संपूर्ण रूप से इस्पात की बनी थीं। मादुरो उस कमरे में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे, परंतु अमेरिकी कमांडो इतनी तीव्र गति से पहुंचे कि वे सुरक्षा द्वार बंद करने में असफल रहे। अमेरिकी विशेष बलों ने मादुरो और उनकी पत्नी को शयनकक्ष से बाहर निकाला और अपनी हिरासत में ले लिया।

 

गिरफ्तारी के पश्चात की परिस्थिति

राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार करने के उपरांत अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें न्यूयॉर्क स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित किया है। यह हिरासत केंद्र अपनी अत्यंत कठोर और विवादास्पद परिस्थितियों के लिए कुख्यात है। इस जेल की स्थिति इतनी निम्न मानी जाती रही है कि अतीत में कुछ अमेरिकी न्यायाधीशों ने यहां कैदियों को भेजने से इनकार तक कर दिया था। 1990 के दशक की प्रारंभ में निर्मित इस हिरासत केंद्र में वर्तमान में लगभग 1,300 बंदी रखे गए हैं।

 

इस कारावास में पहले भी अनेक उच्च प्रोफाइल और प्रसिद्ध कैदियों को रखा जा चुका है। होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को भी इसी जेल में रखा गया था, जिन पर अमेरिका में कोकीन की तस्करी का आरोप था। मेक्सिको के कुख्यात सिनालोआ ड्रग कार्टेल के सह-संस्थापक ‘इस्माइल एल मायो जाम्बाडा’ भी वर्तमान में यहीं बंद हैं।

 

कैदियों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने लंबे समय से यहां हिंसा, दुर्व्यवहार और अव्यवस्था की गंभीर शिकायतें की हैं। 2024 में दो कैदियों की हत्या अन्य कैदियों द्वारा कर दी गई थी। कुछ जेलकर्मियों पर रिश्वत लेने और जेल के भीतर गैरकानूनी सामग्री पहुंचाने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। 2019 की शीतकाल में यहां विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी, जिससे संपूर्ण जेल एक सप्ताह तक अंधकार और शीत में डूबी रही थी।

 

मादुरो पर हथियारों की अवैध तस्करी और नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से संबंधित अत्यंत गंभीर आरोप लगाए जाने की प्रबल संभावना है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि उन पर न्यूयॉर्क की संघीय न्यायालयों में विधिक मुकदमा संचालित किया जाएगा।

 

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और राजनयिक स्थिति

चीन की तीव्र आलोचना और मांग

चीनी विदेश मंत्रालय ने इस असाधारण घटना पर अत्यंत तीव्र और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई की दृढ़ मांग की है। चीन का स्पष्ट मानना है कि किसी संप्रभु राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष को इस प्रकार बलपूर्वक पकड़कर ले जाना अंतरराष्ट्रीय नियमों, संधियों और मानदंडों का घोर उल्लंघन है। चीनी अधिकारियों ने जोरदार शब्दों में कहा कि इस गंभीर मुद्दे का समाधान वार्ता, बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए, न कि सैन्य बल के प्रदर्शन से।

चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में अमेरिका की इस कार्रवाई को “बल का उच्छृंखल उपयोग” बताया और कहा कि यह लैटिन अमेरिका की शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है।

 

रूस का दृढ़ समर्थन और विरोध

रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने इस सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के सर्वथा विरुद्ध बताया। उनका स्पष्ट कहना है कि राष्ट्रपति ट्रम्प और उनकी प्रशासनिक टीम अमेरिकी राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अत्यंत कठोर और विवादास्पद निर्णय लेने से नहीं हिचकती, चाहे अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे कितना ही अनुचित क्यों न माने।

 

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सशस्त्र आक्रमण के सामने वेनेजुएला की जनता के साथ रूस की दृढ़ एकजुटता व्यक्त की है। मेदवेदेव ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ने सदैव से लैटिन अमेरिका को अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखा है और वेनेजुएला के मामले में भी अमेरिका का वास्तविक उद्देश्य वहां के विशाल तेल भंडारों पर नियंत्रण स्थापित करना है।

 

रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, मेदवेदेव का दृढ़ विश्वास है कि ट्रम्प की यह कार्रवाई कोई आकस्मिक या अचानक घटना नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की दीर्घकालीन विस्तारवादी नीति का ही एक अभिन्न अंग और निरंतरता है।

 

उत्तर कोरिया की कठोर प्रतिक्रिया

उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने अत्यंत कठोर शब्दों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अराजकता, गुंडागर्दी और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का घोर उल्लंघन बताया है। उनका स्पष्ट मत है कि यह किसी भी संप्रभु राष्ट्र की स्वतंत्रता, स्वायत्तता और संप्रभुता पर किया गया सबसे गंभीर और खतरनाक हमला है, जो भविष्य में अन्य छोटे राष्ट्रों के लिए भी खतरा उत्पन्न कर सकता है।

 

यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया

स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने इस सैन्य अभियान की अत्यंत कड़ी निंदा की है। उन्होंने अपनी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्यों को संबोधित एक विस्तृत पत्र में लिखा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय विधि और कानून का स्पष्ट एवं निर्विवाद उल्लंघन है। उनके दृढ़ मत के अनुसार, किसी अन्य संप्रभु राष्ट्र की सीमाओं में अनधिकृत घुसपैठ करके वहां के निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष को बंदी बनाना किसी भी परिस्थिति में उचित या न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।

 

लैटिन अमेरिकी देशों की गहरी चिंता

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने इस सैन्य हमले को “अस्वीकार्य सीमा को पार करना” और राष्ट्रीय संप्रभुता पर “अत्यंत गंभीर अपमान” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि वेनेजुएला की भूमि पर बमबारी और उसके राष्ट्रपति को बलपूर्वक पकड़ना संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक अत्यंत खतरनाक और चिंताजनक मिसाल स्थापित करता है।

 

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल आपातकालीन बैठक आयोजित करने की दृढ़ मांग की। उन्होंने अपनी सरकार की गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कोलंबिया-वेनेजुएला सीमा पर स्थिरता और शांति बनाए रखने तथा किसी भी संभावित मानवीय या प्रवासन संकट से निपटने के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।

 

इजराइल और क्रोएशिया का समर्थन

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का खुलकर और दृढ़ता से समर्थन किया। उन्होंने इसे तानाशाही और अवैध शासन के विरुद्ध उठाया गया साहसिक कदम बताया और कहा कि संपूर्ण इजराइली सरकार वेनेजुएला की स्वतंत्रता-प्रेमी जनता के साथ एकजुटता से खड़ी है।

 

क्रोएशिया ने भी एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए गिरफ्तारी का समर्थन किया। क्रोएशियाई विदेश मंत्रालय ने कहा कि मादुरो की सरकार के पास लोकतांत्रिक चुनावों से प्राप्त वैधता नहीं थी और देश में गहरा राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत संकट व्याप्त था।

 

भारत की संतुलित और सतर्क स्थिति

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस जटिल स्थिति पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए एक संतुलित रुख अपनाया है। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि वेनेजुएला में घटित हाल की घटनाएं अत्यंत गंभीर चिंता का विषय हैं और भारत विकसित हो रही परिस्थिति का बारीकी से और सतर्कतापूर्वक अवलोकन कर रहा है। भारत ने वेनेजुएला की जनता की समग्र भलाई और सुरक्षा के प्रति अपना दृढ़ समर्थन दोहराया है।

भारत ने सभी संबंधित पक्षों से विशेष रूप से आग्रह किया है कि वे वार्ता और शांतिपूर्ण कूटनीतिक माध्यमों से इस गंभीर स्थिति का समाधान निकालें और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता बनाए रखें। काराकास स्थित भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के सदस्यों के निरंतर संपर्क में है और सभी संभव सहायता प्रदान करने के लिए पूर्णतः तत्पर है।

 

भारत ने अपने नागरिकों को वेनेजुएला की किसी भी गैर-आवश्यक यात्रा से पूरी तरह बचने की कड़ी सलाह दी है। वहां निवास कर रहे भारतीय नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने, अपनी आवाजाही को अत्यंत सीमित रखने और दूतावास के निरंतर संपर्क में रहने का आग्रह किया गया है। दूतावास की वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में लगभग 50 अनिवासी भारतीय और करीब 30 भारतीय मूल के व्यक्ति वेनेजुएला में निवास कर रहे हैं।

 

वैश्विक विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलन

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में विश्व के विभिन्न महाद्वीपों और देशों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन आयोजित हुए। नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी साम्राज्यवाद और विस्तारवाद के विरुद्ध जोरदार नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर “अमेरिकी साम्राज्यवाद का अंत हो” लिखा था।

 

चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में अमेरिकी दूतावास के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध रैली निकाली और “वेनेजुएला से हाथ हटाओ” का सशक्त नारा दिया। पाकिस्तान के कराची और तुर्किये के इस्तांबुल में भी हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किए।

 

राष्ट्रपति ट्रम्प का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि वर्तमान परिस्थिति में वेनेजुएला की प्रशासनिक कमान प्रभावी रूप से अमेरिका के हाथ में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला की नवनिर्वाचित अंतरिम नेतृत्व से प्रत्यक्ष और नियमित संवाद स्थापित कर रहा है।

ट्रम्प ने वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक संपूर्ण और निर्बाध पहुंच की बात की है। उनका दावा है कि प्रमुख अमेरिकी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश के साथ वेनेजुएला के क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करेंगी और देश को आर्थिक रूप से फिर से समृद्ध बनाने में सहायता करेंगी।

 

ट्रम्प ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका को वेनेजुएला के तेल और देश के अन्य संसाधनों तक पूर्ण पहुंच की आवश्यकता है ताकि देश को पुनः स्थापित किया जा सके। उन्होंने वेनेजुएला को एक “मृत देश” बताते हुए कहा कि इसे पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है।

 

सैन्य अभियान के प्रमुख कारण

अमेरिकी प्रशासन ने इस विवादास्पद सैन्य कार्रवाई के तीन प्रमुख और महत्वपूर्ण कारण प्रस्तुत किए हैं:

 

सुरक्षा खतरा: अमेरिका का दृढ़ दावा है कि वेनेजुएला की मादुरो सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही थी और वहां से अमेरिका के विरुद्ध षड्यंत्र रचे जा रहे थे।

 

नशीले पदार्थों की तस्करी: ट्रम्प प्रशासन का गंभीर आरोप है कि वेनेजुएला कोकीन, फेंटेनाइल और अन्य अत्यंत खतरनाक नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का प्रमुख मार्ग और केंद्र बन चुका है।

 

प्रवासन संकट: अमेरिका का कहना है कि मादुरो की निरंकुश और असफल नीतियों के कारण लाखों वेनेजुएलाई नागरिकों को अपना देश छोड़कर अमेरिका की ओर पलायन करने के लिए विवश होना पड़ा।

 

रक्षा मंत्री का विवरण

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सैन्य अभियान को “अब तक का सर्वाधिक परिष्कृत, जटिल और सफलतम ऑपरेशन” बताया। उन्होंने इसकी तुलना 2003 के इराक युद्ध से करते हुए स्पष्ट किया कि यह उससे पूर्णतः भिन्न और श्रेष्ठ है। उनके अनुसार, इस अभियान की योजना इस प्रकार बनाई गई थी कि अमेरिकी सैनिकों की जीवन को खतरे में डालने की संभावना न्यूनतम रखी जाए।

 

हेगसेथ ने दावा किया कि इस निर्णायक कदम से अमेरिका को दीर्घकालीन आर्थिक लाभ होगा, जबकि इराक युद्ध में अमेरिका को भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने पारंपरिक युद्ध रणनीति को पूर्णत: परिवर्तित कर दिया है।

 

विदेश मंत्री का स्पष्टीकरण

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दृढ़ता से स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला के विरुद्ध कोई युद्ध नहीं लड़ रहा है। उनका स्पष्ट मत है कि अमेरिका की वास्तविक लड़ाई नशीले पदार्थों की तस्करी में संलग्न अपराधिक संगठनों के विरुद्ध है, न कि वेनेजुएला की जनता के विरुद्ध।

 

रूबियो ने कहा कि अमेरिका की ईमानदार इच्छा है कि वेनेजुएला की विशाल तेल संपदा का लाभ सीधे सामान्य जनता को मिले, न कि कुछ विशेष और भ्रष्ट व्यक्तियों को। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान परिस्थिति में वेनेजुएला में कोई भी सरकार अमेरिका की दृष्टि में पूर्णतः वैध नहीं है।

 

वेनेजुएला की आंतरिक राजनीतिक स्थिति

 

अंतरिम राष्ट्रपति की नियुक्ति और चुनौतियां

वेनेजुएला की सर्वोच्च न्यायालय ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त करने का औपचारिक आदेश जारी किया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति के समस्त संवैधानिक अधिकारों और उत्तरदायित्वों के साथ कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है।

डेल्सी रोड्रिग्ज ने दृढ़ता से राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषित किया कि निकोलस मादुरो वेनेजुएला के संवैधानिक रूप से वैध और एकमात्र राष्ट्रपति हैं और उन्हें बलपूर्वक पकड़ना संपूर्णतः अनुचित और अवैध है।

 

राष्ट्रपति ट्रम्प की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अत्यंत कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि डेल्सी वह नहीं करतीं जो अमेरिका वेनेजुएला के लिए उचित और आवश्यक मानता है, तो उनकी स्थिति मादुरो से भी अधिक विकट और कठिन हो सकती है।

 

ट्रम्प ने यह धमकीभरा बयान द अटलांटिक मैगजीन को दिए गए एक विस्तृत साक्षात्कार में दिया। पूर्व में ट्रम्प ने कहा था कि यदि रोड्रिग्ज अमेरिकी अपेक्षाओं के अनुरूप सहयोग करती हैं तो वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य बलों को स्थायी रूप से तैनात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

 

रक्षा मंत्री का महत्वपूर्ण बयान

वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को न केवल वेनेजुएला के लिए बल्कि संपूर्ण विश्व की राजनीतिक और सामरिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने एक प्रेस सम्मेलन में कहा कि यह वैश्विक व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती है और यदि आज यह वेनेजुएला के साथ हो सकता है तो कल किसी भी अन्य छोटे राष्ट्र के साथ ऐसा हो सकता है।

 

रक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कमांडो हमले में राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात अधिकांश सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या प्रकट नहीं की। उन्होंने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाए जाने के संवैधानिक निर्णय का भी समर्थन किया।

 

आर्थिक प्रभाव और व्यापारिक परिणाम

 

भारतीय निवेश और भविष्य की संभावनाएं

वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिति बदलने से भारत के दीर्घकाल से अटके हुए निवेश की वापसी की संभावना उत्पन्न हुई है। भारत की प्रतिष्ठित सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड का लगभग 9,000 करोड़ रुपए (1 अरब डॉलर) का विशाल निवेश लंबे समय से अवरुद्ध पड़ा हुआ है।

 

वर्तमान परिस्थिति में वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में अत्यंत सीमित मात्रा में (केवल 5,000 से 10,000 बैरल प्रतिदिन) तेल उत्पादन हो रहा है। अमेरिकी नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में संभावित ढील के परिणामस्वरूप वहां आधुनिक मशीनें और उन्नत ड्रिलिंग उपकरण स्थापित किए जा सकेंगे, जिससे तेल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।

 

वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे विशाल तेल भंडार है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिकी प्रशासन ने चीन को तेल की नियमित आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रखने का आश्वासन दिया है। चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल ग्राहक है और दोनों देशों के बीच दीर्घकालीन आर्थिक संबंध हैं।

 

अमेरिकी न्यायालयों के आदेश के अनुसार, वेनेजुएला से जाने या आने वाले प्रतिबंधित तेल टैंकरों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में ही अवरुद्ध और जब्त किया जाएगा।

 

विशेष बलों की भूमिका और तकनीकी विवरण

 

डेल्टा फोर्स की महत्वपूर्ण भूमिका

इस अत्यंत जटिल और संवेदनशील अभियान में अमेरिका की सर्वाधिक गुप्त और कुशल विशेष सैन्य इकाई डेल्टा फोर्स ने निर्णायक भूमिका निभाई। 1977 में कर्नल चार्ल्स बेकविथ द्वारा स्थापित यह विशिष्ट इकाई आतंकवाद-रोधी अभियानों, बंधक मुक्ति अभियानों और उच्च मूल्य के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

 

डेल्टा फोर्स के अत्यधिक प्रशिक्षित सैनिकों को शहरी युद्ध कौशल, हवाई और समुद्री अभियान संचालन, उन्नत स्नाइपर प्रशिक्षण, विभिन्न विदेशी भाषाओं का ज्ञान और भेष परिवर्तन करके गुप्त रूप से कार्य करने की विशेष और गहन ट्रेनिंग प्रदान की जाती है। इस अभिजात्य इकाई में चयन प्रक्रिया अत्यंत कठिन, दीर्घकालीन और चुनौतीपूर्ण है तथा केवल सर्वश्रेष्ठ और अनुभवी सैनिकों को ही इसमें सम्मिलित किया जाता है।

 

अभियान की विस्तृत तैयारी प्रक्रिया

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि इस महत्वपूर्ण अभियान की गहन और सूक्ष्म तैयारी कई महीनों तक निरंतर चलती रही। मादुरो के विभिन्न निवास स्थानों जैसा हूबहू नकली भवन निर्मित करके बार-बार अभ्यास और सिमुलेशन किए गए। खुफिया एजेंसियों को इतनी विस्तृत जानकारी थी कि उन्हें यह तक ज्ञात था कि मादुरो क्या खाना पसंद करते हैं, उनके पालतू जानवर कौन से हैं, वे किस प्रकार के कपड़े पहनते हैं और उनकी दैनिक दिनचर्या क्या है।

 

प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण अभियान को चार दिन तक स्थगित रखना पड़ा। जैसे ही मौसम अनुकूल हुआ और बादल छंटे, ऑपरेशन को तत्काल हरी झंडी प्रदान कर दी गई। हेलिकॉप्टर समुद्र की सतह के अत्यंत निकट उड़ते हुए वेनेजुएला की ओर बढ़े और ऊपर से आधुनिक लड़ाकू विमान निरंतर सुरक्षा प्रदान कर रहे थे।

 

वेनेजुएला : संक्षिप्त परिचय

 

वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित एक देश है। इसके पूर्व में गुयाना, दक्षिण में ब्राज़ील तथा पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में कोलंबिया स्थित हैं। इसकी उत्तर दिशा में कैरेबियन सागर और अटलांटिक महासागर से समुद्री सीमा लगती है। वेनेजुएला की राजधानी काराकास है।

 

भौगोलिक दृष्टि से देश का उत्तर-पश्चिमी भाग एंडीज पर्वतमाला और माराकाइबो निम्न मैदान से बना है, मध्य भाग में लानोस (घास के विस्तृत मैदान) पाए जाते हैं, जबकि दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में गुयाना उच्चभूमि स्थित है। यहाँ की प्रमुख नदियों में ओरिनोको नदी (कोलंबिया के साथ साझा) तथा रियो नीग्रो (कोलंबिया और ब्राज़ील के साथ साझा, अमेज़न तंत्र का भाग) शामिल हैं। प्रमुख झीलों में माराकाइबो झील, जो दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी झील है, तथा गुरी झील प्रमुख हैं। वेनेजुएला का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर पिको बोलिवर है।

 

यहीं पर विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात एंजेल फॉल्स (लगभग 979 मीटर) स्थित है, जो गुयाना उच्चभूमि में पाया जाता है (एंडीज में नहीं)। प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से वेनेजुएला अत्यंत समृद्ध है, यह विश्व के सबसे बड़े सिद्ध पेट्रोलियम भंडार वाला देश है तथा यहाँ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और सोना भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

तेल कंपनियों का विवाद

ट्रम्प का दावा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों के तेल अधिकार अवैध रूप से छीन लिए थे। वास्तव में, 1976 में वेनेजुएला की सरकार ने (राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज के कार्यकाल में) संपूर्ण तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था।

 

इसका अर्थ था कि विदेशी तेल कंपनियां (अधिकांशतः अमेरिकी, जैसे एक्सॉन, गल्फ ऑयल, मोबिल इत्यादि) जो दशकों से वहां तेल निष्कर्षण कर रही थीं, उनके समस्त संचालन और संपत्तियां वेनेजुएला की नवीन सरकारी कंपनी पेट्रोलियोस डे वेनेजुएला (PDVSA) के अधिकार में चली गईं।

 

यह राष्ट्रीयकरण कानूनी प्रक्रिया से संपन्न हुआ था और कंपनियों को मुआवजा भी प्रदान किया गया था, यद्यपि कुछ कंपनियां इससे असंतुष्ट थीं।

 

ट्रम्प की पूर्व चेतावनी

ट्रम्प ने दिसंबर में वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाते हुए प्रतिबंधित तेल टैंकरों के वेनेजुएला आने-जाने पर संपूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया था। ट्रम्प ने कहा था कि वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे विशाल नौसैनिक बेड़े से पूर्णतः घिरा हुआ है।

 

उन्होंने 22 दिसंबर को पत्रकारों से कहा था कि मादुरो के लिए सत्ता त्यागना विवेकपूर्ण होगा, परंतु वह जो करना चाहते हैं, वह पूर्णतः उन पर निर्भर है।

 

यह स्थिति लैटिन अमेरिका में एक नया संकट उत्पन्न कर सकती है और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में गंभीर तनाव ला सकती है।

 

समापन और भविष्य की संभावनाएं

वेनेजुएला में घटित यह असाधारण घटना निस्संदेह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। एक ओर जहां अमेरिकी प्रशासन इसे न्याय, लोकतंत्र की पुनर्स्थापना और मानवाधिकारों की रक्षा के रूप में प्रचारित और प्रस्तुत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अनेक प्रभावशाली देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन, राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा हमला और साम्राज्यवादी विस्तार की नीति मान रहे हैं।

 

यह विवादास्पद और चर्चित घटना अनेक गंभीर और जटिल प्रश्न उत्पन्न करती है – क्या कोई शक्तिशाली राष्ट्र किसी अन्य संप्रभु देश के निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष को इस प्रकार बलपूर्वक पकड़ सकता है? क्या यह अंतरराष्ट्रीय विधि, संधियों और मानदंडों के अनुरूप है? और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि वेनेजुएला और उसकी जनता का दीर्घकालीन भविष्य क्या होगा?

 

वेनेजुएला की सामान्य जनता के समक्ष राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अनिश्चितता का गहरा दौर उपस्थित है। देश के विशाल तेल संसाधनों के भविष्य, राजनीतिक स्थिरता की पुनर्स्थापना, अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पुनर्निर्माण और आर्थिक समृद्धि की दिशा अभी पूर्णतः अस्पष्ट और धुंधली है। आगामी सप्ताहों और महीनों में यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जटिल और संवेदनशील स्थिति को किस प्रकार संभालता है और वेनेजुएला की पीड़ित जनता के लिए क्या दीर्घकालीन परिणाम और समाधान उत्पन्न होते हैं।