शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे कई यूजर्स को WhatsApp Web इस्तेमाल करने में दिक्कत आई। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट Downdetector पर सुबह 8:54 बजे के आसपास भारत में 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। लोगों ने बताया कि वे ब्राउज़र पर WhatsApp Web लॉगिन नहीं कर पा रहे थे या लिंक्ड डिवाइस कनेक्ट नहीं हो रहे थे।
करीब आधे घंटे बाद भी शिकायतें पूरी तरह बंद नहीं हुईं। Downdetector के आंकड़ों के अनुसार शुरुआती स्पाइक के बाद भी दर्जनों यूजर्स ने समस्या की सूचना दी। इससे साफ है कि दिक्कत कुछ समय तक बनी रही।

सोशल मीडिया पर यूजर्स की नाराजगी
कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी परेशानी साझा की। एक यूजर ने लिखा कि वह एक घंटे से iPhone और लिंक्ड डिवाइस पर लॉगिन करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही।

दूसरे यूजर ने बताया कि उसने अलग-अलग नंबर, ऐप और अलग-अलग ब्राउज़र-जैसे Microsoft Edge और Google Chrome-सब कुछ आजमा लिया, लेकिन लॉगिन एरर लगातार आ रहा है।
हालांकि इस तकनीकी गड़बड़ी पर न तो WhatsApp की ओर से और न ही उसकी पैरेंट कंपनी Meta Platforms की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया था।
WhatsApp Web पर कॉलिंग फीचर की एंट्री
इसी बीच WhatsApp Web से जुड़ा एक अहम अपडेट भी सामने आया है। अब यूजर्स ब्राउज़र के जरिए ही वॉयस और वीडियो कॉल कर सकते हैं। पहले इसके लिए डेस्कटॉप ऐप डाउनलोड करना जरूरी था।
यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं और मोबाइल बार-बार हाथ में नहीं लेना चाहते।
हालांकि यह सुविधा दुनिया के कई देशों में उपलब्ध है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में काम नहीं करती। वहां इंटरनेट कॉलिंग को लेकर सख्त नियम हैं। सिर्फ लाइसेंस प्राप्त ऐप्स को ही वॉयस और वीडियो कॉल की अनुमति है। चूंकि WhatsApp की कॉलिंग सेवा वहां मंजूर नहीं है, इसलिए मोबाइल, डेस्कटॉप या वेब-किसी भी माध्यम से कॉलिंग फीचर ब्लॉक रहता है। मैसेजिंग, फोटो और डॉक्यूमेंट भेजने की सुविधा हालांकि जारी रहती है।
1 मार्च से बदल जाएंगे WhatsApp चलाने के नियम
WhatsApp से जुड़ा एक और बड़ा बदलाव 1 मार्च 2026 से लागू होने वाला है। केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ नियमों की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि तय तारीख से नए नियम लागू होंगे।
क्या है सिम बाइंडिंग?
सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा व्यवस्था है। इसके तहत आपका मैसेजिंग ऐप आपके मोबाइल में मौजूद फिजिकल सिम कार्ड से जुड़ा रहेगा। आसान शब्दों में कहें तो जिस नंबर से आपका WhatsApp बना है, वही सिम उसी फोन में लगा और एक्टिव होना जरूरी होगा।
अगर सिम कार्ड फोन से निकाल दिया गया, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है।
अभी और 1 मार्च के बाद क्या फर्क होगा?
सिम की जरूरत: अभी तक सिम निकाल देने पर भी कई बार ऐप चलता रहता है।
1 मार्च 2026 से फोन में वही रजिस्टर्ड सिम एक्टिव होना जरूरी होगा।
WhatsApp Web (PC): अभी एक बार लॉगिन करने के बाद हफ्तों तक अकाउंट एक्टिव रह सकता है। नए नियमों के तहत सुरक्षा कारणों से हर 6 घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएगा।
सिक्योरिटी सिस्टम: अभी OTP के जरिए कहीं भी लॉगिन संभव है।
नए सिस्टम में सिम बाइंडिंग के बिना ऐप काम नहीं करेगा।
नियमों का पालन: पहले इस तरह की सख्त रिपोर्टिंग व्यवस्था नहीं थी।
अब कंपनियों को 120 दिन के भीतर अनुपालन की रिपोर्ट देनी होगी।
सरकार ने डेडलाइन क्यों नहीं बढ़ाई?
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ कहा है कि समय-सीमा आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उनके मुताबिक ये नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी हैं।
सरकार का मानना है कि सिम बाइंडिंग से हैकिंग और फर्जी अकाउंट के जरिए होने वाली धोखाधड़ी कम होगी। अगर किसी ठग के पास सिर्फ OTP हो लेकिन असली सिम उसके पास न हो, तो वह अकाउंट का दुरुपयोग नहीं कर पाएगा।
यूजर्स को क्या करना होगा?
1 मार्च 2026 के बाद यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका WhatsApp जिस नंबर पर रजिस्टर्ड है, वही सिम उनके फोन में लगा और चालू हो।
अगर सिम निकालकर दूसरा फोन इस्तेमाल किया गया या सिम निष्क्रिय हुआ, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है।
WhatsApp Web यूजर्स को भी ध्यान रखना होगा कि हर 6 घंटे में दोबारा लॉगिन करना पड़ सकता है।
इंडस्ट्री की चिंता
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने इस नियम को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट होने से पेशेवर लोगों को परेशानी हो सकती है।
कई संस्थानों में एक ही अकाउंट टीम के बीच साझा किया जाता है। ऐसे में बार-बार लॉगिन करना काम की गति को प्रभावित कर सकता है।
नियम न मानने पर क्या होगा?
सरकार के आदेश के मुताबिक टेक कंपनियों को 120 दिनों के भीतर नियमों के पालन की रिपोर्ट देनी होगी। अगर वे ऐसा नहीं करतीं, तो टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 और टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मंत्री सिंधिया ने और क्या कहा?
1. स्टारलिंक पर अपडेट
सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink को लेकर सिंधिया ने बताया कि कंपनी ने अभी तक सुरक्षा एजेंसियों के सामने जरूरी डेमो पूरे नहीं किए हैं। कंपनी को यह साबित करना होगा कि जरूरत पड़ने पर वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस रोक सकती है और नेटवर्क कंट्रोल दे सकती है।
2. BSNL अफसर का मामला
हाल ही में BSNL के डायरेक्टर विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे से जुड़ा एक आदेश वायरल हुआ था, जिसमें करीब 50 कर्मचारियों को सेवा के लिए तैनात करने की बात कही गई थी। सिंधिया ने बताया कि इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में इस तरह के आदेश स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL की आर्थिक स्थिति अब बेहतर है और कंपनी सकारात्मक नकदी प्रवाह बना रही है।
आगे क्या?
एक तरफ सुबह का WhatsApp Web आउटेज लोगों के लिए असुविधा का कारण बना, तो दूसरी ओर आने वाले सिम बाइंडिंग नियम डिजिटल दुनिया में बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। सरकार इसे सुरक्षा की दिशा में कदम बता रही है, जबकि इंडस्ट्री और यूजर्स को इससे कामकाज में नई चुनौतियां दिख रही हैं।

