विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में भारत में सामने आए निपाह वायरस के मामलों को लेकर बयान जारी किया है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयिसस ने स्पष्ट किया कि निपाह वायरस एक अत्यंत गंभीर संक्रमण है, लेकिन हालिया मामलों का दायरा केवल भारत तक सीमित है और किसी अन्य देश में इसके फैलने के संकेत नहीं मिले हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय महामारी के अनुभवों के बाद किसी भी नए संक्रमण को लेकर अधिक सतर्क हो गया है।
WHO प्रमुख ने पश्चिम बंगाल में सामने आए दो मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य में निपाह वायरस का तीसरा दर्ज मामला है। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में हालिया मामले और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
दिसंबर 2025 के अंत में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए। दोनों संक्रमित व्यक्ति नर्सिंग स्टाफ से जुड़े थे, जिससे यह आशंका बढ़ी कि संक्रमण स्वास्थ्य संस्थानों के भीतर फैल सकता है। हालांकि, समय पर पहचान और इलाज के कारण स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, दोनों मरीजों में सुधार हुआ है। एक पुरुष नर्स को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि महिला नर्स को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाकर निगरानी में रखा गया है। दोनों की रिपोर्ट बाद में निगेटिव आई, जो राहत की बात है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की। करीब 190 से अधिक लोगों की पहचान की गई जो संक्रमितों के संपर्क में आए थे। अब तक इनमें किसी में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। यह दर्शाता है कि संक्रमण का दायरा सीमित रहा।
वायरस के फैलाव को लेकर WHO का आकलन
WHO ने स्पष्ट रूप से कहा है कि फिलहाल निपाह वायरस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का जोखिम कम है। इसलिए यात्रा या व्यापार पर किसी तरह की पाबंदी लगाने की आवश्यकता नहीं है। संगठन ने यह भी दोहराया कि अभी तक मानव से मानव में संक्रमण के तेज़ी से फैलने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
हालांकि, WHO ने यह भी चेतावनी दी कि निपाह वायरस को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह एक ऐसा वायरस है जो अचानक गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए निगरानी, टेस्टिंग और जागरूकता बेहद जरूरी है।
निपाह वायरस: एक खतरनाक ज़ूनोटिक संक्रमण
निपाह वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक ज़ूनोटिक वायरसों में गिना जाता है। इसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों में पाया जाता है और उनसे दूषित फल, रस या करीबी संपर्क के माध्यम से इंसानों तक पहुंचता है।
इस वायरस की सबसे डरावनी बात इसकी मृत्यु दर है, जो 40% से 75% तक हो सकती है। यह न केवल श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है, बल्कि मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डालता है, जिससे एन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन) हो सकती है।
इम्यून सिस्टम पर निपाह वायरस का असर
निपाह वायरस अन्य सामान्य वायरसों से अलग व्यवहार करता है। आमतौर पर जब कोई वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो इम्यून सिस्टम उसे पहचान कर खत्म करने की कोशिश करता है। लेकिन निपाह वायरस इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को ही भ्रमित कर देता है।
यह वायरस इम्यून सिस्टम को गलत दिशा में सक्रिय कर देता है, जिससे शरीर का प्राकृतिक रक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है। यही कारण है कि इस संक्रमण में तेजी से हालत बिगड़ सकती है और इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
भारत में निपाह वायरस का इतिहास
भारत में निपाह वायरस के मामले नए नहीं हैं। केरल को इस वायरस का सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां 2018 से अब तक कई बार इसके प्रकोप देखे गए हैं। पश्चिम बंगाल में पहले भी 2001 और 2007 में निपाह वायरस के मामले सामने आ चुके हैं, खासतौर पर बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाकों में।
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि भारत के कुछ भौगोलिक क्षेत्र निपाह वायरस के लिए अधिक संवेदनशील हैं, खासकर जहां चमगादड़ों की आबादी अधिक है।
रोकथाम, जागरूकता और भविष्य की रणनीति
निपाह वायरस के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से सहायक चिकित्सा पर आधारित होता है। ऐसे में रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है।
सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को यह सलाह दे रही हैं कि वे बिना धोए फल न खाएं, संदिग्ध बीमारियों के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
यह घटना यह भी दिखाती है कि भारत की निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक सक्षम हुई है। समय पर पहचान और त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े प्रकोप को रोक दिया।
निष्कर्ष:
निपाह वायरस भले ही एक अत्यंत खतरनाक संक्रमण हो, लेकिन वर्तमान स्थिति में भारत में इसका फैलाव सीमित और नियंत्रित है। WHO का आकलन भी यही संकेत देता है कि घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह मामला हमें यह याद दिलाता है कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में स्थानीय निगरानी, पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण कितने महत्वपूर्ण हैं। भविष्य में उभरते संक्रमणों से निपटने के लिए यही सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है।
UPSC प्रीलिम्स प्रश्न
निपाह वायरस के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है।
- निपाह वायरस के लिए वर्तमान में प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है।
- WHO ने हालिया मामलों के बाद भारत से यात्रा और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
UPSC मेंस प्रश्न
निपाह वायरस को एक उभरता हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा माना जाता है। भारत में हालिया मामलों के संदर्भ में इसके प्रसार, जोखिम और रोकथाम की रणनीतियों पर चर्चा कीजिए।
