दशकों से वैश्विक सुरक्षा को संभाले रखने वाली अमेरिका और रूस के बीच आखिरी बची परमाणु हथियार नियंत्रण संधि अब औपचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है। गुरुवार को न्यू स्टार्ट (New START) संधि के खत्म होने के साथ ही पहली बार ऐसा हुआ है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां बिना किसी कानूनी सीमा के अपने परमाणु हथियार भंडार को बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हो गई हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नई परमाणु हथियार दौड़ और अनियंत्रित टकराव की आशंका को जन्म दे दिया है।
पूर्व अमेरिकी अधिकारी और हथियार नियंत्रण मामलों के विशेषज्ञ थॉमस कंट्रीमैन ने इसे सबसे खतरनाक परिदृश्य बताते हुए कहा कि यदि हालात बिगड़े तो कोई अप्रत्याशित या अपेक्षित घटना ऐसा संघर्ष भड़का सकती है, जो बहुत तेजी से परमाणु युद्ध में बदल सकता है।
ट्रम्प का साफ संकेत: न्यू स्टार्ट की सीमाएं अब नहीं मानेंगे
न्यू स्टार्ट संधि के औपचारिक रूप से समाप्त होने के दिन ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दे दिया कि अमेरिका अब इस संधि की सीमाओं का पालन जारी नहीं रखेगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि न्यू स्टार्ट एक “खराब तरीके से की गई संधि” थी, जिसे अमेरिका के खिलाफ बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया।
ट्रम्प ने लिखा कि इस संधि को आगे बढ़ाने के बजाय अमेरिका को अपने परमाणु विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक नई, बेहतर और आधुनिक संधि पर काम करना चाहिए, जो आने वाले कई दशकों तक टिक सके। उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि मौजूदा परमाणु नियंत्रण ढांचे को बनाए रखने में ट्रम्प प्रशासन की दिलचस्पी कम है।
क्या थी न्यू स्टार्ट संधि?
न्यू स्टार्ट संधि फरवरी 2011 में लागू हुई थी और इसे शीत युद्ध के बाद हथियार नियंत्रण की दिशा में सबसे अहम समझौतों में गिना जाता है। इस संधि के तहत अमेरिका और रूस दोनों पर कई सख्त सीमाएं तय की गई थीं।
इसके अनुसार, दोनों देशों को 1,550 से ज्यादा तैनात परमाणु वारहेड रखने की अनुमति नहीं थी। इसके अलावा, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलों (SLBM) और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम भारी बमवर्षकों की संख्या 700 तक सीमित थी। कुल मिलाकर, तैनात और गैर-तैनात लॉन्चरों की अधिकतम सीमा 800 रखी गई थी।
यह संधि खासतौर पर उन रूसी अंतरमहाद्वीपीय हथियारों पर रोक लगाती थी, जो सीधे अमेरिका तक पहुंच सकते थे। इससे दोनों देशों के बीच पारदर्शिता और भरोसे का एक ढांचा बना हुआ था।
चीन बना बड़ी बहस का केंद्र
न्यू स्टार्ट के आलोचकों का सबसे बड़ा तर्क यह रहा है कि यह संधि चीन को कवर नहीं करती। ट्रम्प और उनके समर्थकों का कहना है कि जब चीन तेजी से अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है, तब केवल अमेरिका और रूस पर सीमाएं लगाना व्यावहारिक नहीं है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर चीन मौजूदा रफ्तार से अपने परमाणु हथियार भंडार का विस्तार करता रहा, तो 2035 तक उसके पास करीब 1,500 परमाणु वारहेड हो सकते हैं। यही संख्या न्यू स्टार्ट के तहत अमेरिका और रूस के लिए तय की गई अधिकतम सीमा के बराबर है।
इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन बार-बार त्रिपक्षीय संधि की बात करता रहा है, जिसमें अमेरिका, रूस और चीन तीनों शामिल हों।
संधि का विस्तार और फिर अंत
न्यू स्टार्ट संधि मूल रूप से 10 वर्षों के लिए लागू की गई थी। 2021 में अमेरिका और रूस ने आपसी सहमति से इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया था, जिससे इसकी अवधि 4 फरवरी 2026 तक हो गई।
हालांकि, इस संधि को दोबारा बढ़ाने का प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद दोनों देश चाहें तो आपसी सहमति से इसके तहत तय सीमाओं का पालन जारी रख सकते थे। पिछले साल सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन सीमाओं को एक और साल तक बनाए रखने का प्रस्ताव रखा था। उस समय ट्रम्प ने इस विचार को “अच्छा” बताया था।
लेकिन हाल के हफ्तों में ट्रम्प ने इस मुद्दे पर ज्यादा चिंता जताने से इनकार कर दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा था, “अगर यह खत्म होती है, तो होने दें। हम इससे बेहतर समझौता करेंगे।”
रूस की नाराजगी और खुली चेतावनी
रूस ने अमेरिका के रुख पर नाराजगी जताई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि ट्रम्प प्रशासन से उन्हें किसी प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं मिला है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी सरकार के सार्वजनिक बयान यह संकेत देते हैं कि रूस के सुझावों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
रूसी विदेश मंत्रालय ने इस रवैये को “गलत और अफसोसनाक” बताया और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में रूस यह मानने के लिए मजबूर है कि अब दोनों देश न्यू स्टार्ट संधि की किसी भी बाध्यता के तहत नहीं आते। इसके साथ ही रूस ने संकेत दिया कि वह आगे अपने कदम स्वतंत्र रूप से तय करेगा।
अमेरिका का आधिकारिक जवाब
रूसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रम्प प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प बार-बार दुनिया के सामने परमाणु हथियारों से पैदा होने वाले खतरे पर बात कर चुके हैं। अधिकारी ने कहा कि ट्रम्प चाहते हैं कि परमाणु हथियारों पर सीमाएं बनी रहें, लेकिन इसके लिए चीन को भी बातचीत में शामिल करना जरूरी है।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि परमाणु हथियार नियंत्रण को लेकर आगे की दिशा राष्ट्रपति खुद अपने समय पर तय करेंगे।
विशेषज्ञों की चेतावनी: हथियार दौड़ किसी के हित में नहीं
कई परमाणु विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों का मानना है कि न्यू स्टार्ट की सीमाओं को अचानक खत्म करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में नहीं है। उनका कहना है कि इस संधि ने दशकों तक पारदर्शिता, स्थिरता और पूर्वानुमान की व्यवस्था बनाए रखी।
न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव के उपाध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी अधिकारी पॉल डीन के मुताबिक, एक महंगी और अनियंत्रित हथियार दौड़ से किसी को फायदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर पारदर्शिता खत्म होती है, तो गलतफहमी और गलत आकलन का खतरा बढ़ जाता है, जो किसी बड़े संघर्ष को जन्म दे सकता है।
क्या अमेरिका अपने हथियार बढ़ाएगा?
यह अभी साफ नहीं है कि संधि खत्म होने के बाद अमेरिका तुरंत अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाएगा या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ऐसा कर सकता है और न्यू स्टार्ट के पालन के लिए जो बदलाव पहले किए गए थे, उन्हें वापस लिया जा सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा कदम अमेरिका के सहयोगी देशों को भरोसा दिलाने के लिए जरूरी हो सकता है। उनका तर्क है कि अगर अमेरिका ने परमाणु स्तर पर सख्ती नहीं दिखाई, तो उसके सहयोगी देश खुद अपने परमाणु कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर सकते हैं।
रूस की तेज तैयारी
न्यू स्टार्ट की मुख्य अमेरिकी वार्ताकार रह चुकीं रोज़ गॉटेमोलर ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका तैयारी में देर करता है, तो रूस तेजी से आगे निकल सकता है। उनके मुताबिक, रूस के पास सक्रिय वारहेड उत्पादन लाइनें और औद्योगिक क्षमता मौजूद है, जिससे वह बहुत जल्दी अपने मिसाइलों पर अतिरिक्त परमाणु हथियार तैनात कर सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को अभी अपने सिस्टम को दोबारा तैयार करने में समय लगेगा, जबकि रूस पहले से ही इस दिशा में बेहतर स्थिति में है।
चीन के बिना समाधान मुश्किल
ट्रम्प अपने पहले कार्यकाल में भी अमेरिका, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय परमाणु संधि की कोशिश कर चुके हैं। पिछले एक साल में अमेरिकी अधिकारियों ने चीन से कई स्तरों पर बातचीत की कोशिश की, लेकिन बीजिंग ने लगातार ऐसे किसी समझौते से दूरी बनाए रखी है।
हालांकि, अनौपचारिक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक स्थिरता को लेकर कुछ बातचीत हुई है। इन चर्चाओं से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, चीन अब व्यापक संवाद के लिए थोड़ा खुला दिख रहा है, लेकिन वह अपने हथियार भंडार पर किसी तरह की सीमा स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
तीन देशों की हथियार दौड़ का खतरा
आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डेरिल किम्बल ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो अमेरिका, रूस और चीन के बीच खतरनाक त्रिपक्षीय हथियार दौड़ शुरू हो सकती है। उनके मुताबिक, थोड़े से समझदारी भरे कूटनीतिक प्रयासों से इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
किम्बल का कहना है कि न्यू स्टार्ट का खत्म होना वैश्विक जोखिम घटाने के प्रयासों में पहला झटका नहीं है, लेकिन ट्रम्प प्रशासन के अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति कठोर रुख के बीच यह एक नए और अनियंत्रित परमाणु युग की शुरुआत भी बन सकता है।
आगे की राह
न्यू स्टार्ट संधि का अंत केवल एक समझौते का खत्म होना नहीं है, बल्कि यह उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है, जिसने दशकों तक परमाणु संतुलन बनाए रखा। अब दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पारदर्शिता और सीमाओं की जगह प्रतिस्पर्धा और शक्ति प्रदर्शन ले सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और रूस जल्द ही किसी अंतरिम व्यवस्था या नए ढांचे पर सहमत नहीं होते और चीन को बातचीत की मेज पर नहीं लाया गया, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा अस्थिर हो सकती है।
