आज से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR 2.0 शुरू: इस लिस्ट से असम को रखा गया बाहर, जानिए मुख्य वजह..

चुनाव आयोग ने मंगलवार से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत लगभग 51 करोड़ मतदाताओं की सूचियों की जांच और अपडेट किया जाएगा। वहीं, असम के लिए आयोग ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है, जहां यह प्रक्रिया मतदाताओं की नागरिकता की पुष्टि किए बिना आगे बढ़ेगी। आज़ादी के बाद यह नौवीं बार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जा रहा है। पिछली बार यह प्रक्रिया 2002-04 में हुई थी, और वही अवधि राज्यों के लिए आधार वर्ष (cut-off) मानी जाएगी।

sir 2.0 begins today in 12 states and union territories

SIR 2.0 के अंतर्गत वह 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश है:

तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप शामिल हैं। इस दौरान करीब 51 करोड़ मतदाताओं की सूचियों की समीक्षा और अद्यतन किया जाएगा। इनमें से तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में वर्ष 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

 

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की पूरी तरह से जांच और अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसे तब किया जाता है जब लंबे समय से मतदाता सूची में ज्यादा बदलाव नहीं हुए हों या जब बड़े चुनाव आने वाले हों।

इस प्रक्रिया में बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की पुष्टि करते हैं। इसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, अपात्र या मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाते हैं और गलत नाम या पते जैसी गलतियों को सुधारा जाता है।

 

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य:

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक, अद्यतन और विश्वसनीय बनाना है। इसके तहत दोहराए गए नाम, मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, जबकि नए पात्र नागरिकों—जैसे पहली बार 18 वर्ष पूरे करने वाले, प्रवासी या पहले छूटे हुए लोगों को सूची में जोड़ा जाता है।

यह प्रक्रिया मतदाता सूची को वास्तविक जनसांख्यिकीय स्थिति के अनुरूप बनाती है और “एक व्यक्ति, एक वोट” के सिद्धांत को मजबूत करती है। साथ ही, चुनावों से पहले सूचियों की शुद्धता से मुकदमेबाजी और गड़बड़ियाँ कम होती हैं, जिससे मतदान प्रक्रिया सुचारू और पारदर्शी रूप से पूरी हो पाती है।

 

SIR का कानूनी और संवैधानिक आधार:

  • अनुच्छेद 324(1): चुनाव आयोग को संसद और विधानसभा चुनावों का संचालन व नियंत्रण करने की शक्ति देता है।
  • अनुच्छेद 326: सभी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को वयस्क मताधिकार की गारंटी देता है।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950: यह धारा 16 और 19 मतदाता की पात्रता तय करती हैं—जैसे नागरिकता, 18 वर्ष की आयु और सामान्य निवास। वहीं धारा 21(3) चुनाव आयोग को विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का आदेश देने का अधिकार देती है।
  • मतदाता पंजीकरण नियम, 1960: नाम जोड़ने, संशोधन और आपत्तियों की प्रक्रिया तय करता है। जानकारों के मुताबिक, “विशेष गहन संशोधन” शब्द नियमों में स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है, जिससे प्रक्रिया को लेकर कुछ अस्पष्टता बनी रहती है।

 

SIR के लिए मान्य दस्तावेज:

पेंशनर पहचान पत्र, किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम, परिवार रजिस्टर में नाम, जमीन या मकान आवंटन पत्र और आधार कार्ड

 

SIR 2.0 को लेकर चुनाव आयोग की तैयारियाँ:

SIR 2.0 के तहत गणना का चरण आज से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगा। आयोग 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी करेगा, जबकि अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। मतदाता 9 दिसंबर से 8 जनवरी के बीच अपने नाम जोड़ने, संशोधित करने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इन दावों और आपत्तियों की सुनवाई और सत्यापन 31 जनवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले, आयोग ने पूर्व-मानचित्रण का काम लगभग पूरा कर लिया है, जिसमें मौजूदा मतदाता सूचियों की तुलना 2002-2004 की सूचियों से की जा रही है।

 

असम में SIR के लिए अलग मॉडल:

असम में, जहाँ 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए अलग मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि राज्य में नागरिकता की जाँच से जुड़ी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि असम में नागरिकता अधिनियम, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और 1985 के असम समझौते से जुड़े विशेष कानूनी प्रावधानों के कारण यह राज्य अलग प्रक्रिया का पालन करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम में मतदाता सूची का सत्यापन तो किया जाएगा, लेकिन व्यक्तियों की नागरिकता की जाँच नहीं होगी; इसके बजाय, अधिकारी सामान्य निवासियों की पुष्टि, स्थानांतरित हुए और मृत मतदाताओं की पहचान पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

 

असम समझौता (1985) के बारे में:

धारा 6A को असम समझौते (1985) के तहत नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1985 में जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य बांग्लादेश से अवैध प्रवास को रोकना था। इस प्रावधान के अनुसार, 1 जनवरी 1966 से पहले आए लोगों को भारतीय नागरिक माना गया, 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 के बीच आए लोगों को 10 वर्ष बाद नागरिकता मिल सकती थी, और 25 मार्च 1971 के बाद आने वालों को विदेशी मानकर निर्वासित करने का प्रावधान था। यह कानून असम की ऐतिहासिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

 

असम में वोटर लिस्ट रिवीजन का काम बेहद कठिन:

असम में वोटर लिस्ट रिवीजन का काम बहुत मुश्किल है। छह साल पहले NRC के दौरान भी बड़ा विवाद हुआ था, जब 19 लाख से ज़्यादा लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया था। इसका मकसद अवैध प्रवासियों की पहचान करना था, जो लंबे समय से असम में रह रहे हैं। लोगों को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ी, लेकिन यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है क्योंकि केंद्र सरकार ने अब तक अंतिम सूची जारी नहीं की है।

 

SIR 2.0 के विरोध में सुप्रीम कोर्ट गई तमिलनाडु सरकार:

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SIR 2.0 योजना को चुनौती दी है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग इस योजना के जरिए अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश कर रहा है।

इससे पहले जून में बिहार में SIR लागू होने पर कई राजनीतिक दलों ने कहा था कि दस्तावेजों की कमी से करोड़ों पात्र नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं हटेगा।

 

सबसे पहले बिहार में हुआ था SIR:

बिहार में 2025 में शुरू हुई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया सफल रही। अंतिम मतदाता सूची में 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हुए, जिनमें 21.5 लाख नए नाम जोड़े गए और 3.6 लाख अयोग्य मतदाता हटाए गए। ECI ने घर-घर जाकर जांच की, जिससे कोई पात्र मतदाता न छूटे। इस प्रक्रिया में 8 करोड़ से अधिक मतदाताओं की गिनती की गई और 4 लाख से ज़्यादा स्वयंसेवक तैनात हुए। सुप्रीम कोर्ट ने हटाए गए नामों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया।

 

निष्कर्ष:

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का यह नौवां चरण चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 12 राज्यों में 51 करोड़ मतदाताओं की जांच से मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित होगी। असम के लिए अलग दृष्टिकोण आयोग की संवेदनशीलता दिखाता है। यह अभियान लोकतंत्र को मजबूत करने और नागरिकों के विश्वास को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।