14 प्वाइंट्स की डील में आखिर क्या-क्या तय हुआ? ट्रंप-पेजेश्कियान के समझौते में पाकिस्तान का नाम क्यों आया?

 

अमेरिका और ईरान के बीच हुए US Iran 14 Point Agreement ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस समझौते में युद्धविराम, होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने, परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और पुनर्निर्माण जैसे कई बड़े फैसले शामिल बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इस समझौते के मसौदे का नाम ‘Islamabad Memorandum of Understanding between the United States and the Islamic Republic of Iran’ क्यों रखा गया और इसमें पाकिस्तान की भूमिका क्या रही।

 

14 प्वाइंट्स वाली डील क्या है?

US Iran 14 Point Agreement एक प्रस्तावित 14 सूत्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना और स्थायी शांति की दिशा में बातचीत शुरू करना है। समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम वार्ता पूरी करने, समुद्री व्यापार बहाल करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया है।

 

US Iran 14 Point Agreement में क्या-क्या तय हुआ?

समझौते के अनुसार दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है।

  • सभी मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलकर व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना।
  • ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने की प्रक्रिया शुरू करना।
  • ईरानी तेल निर्यात पर लगी कई पाबंदियों में ढील देने का रोडमैप।
  • ईरान की जब्त संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की योजना।
  • लगभग 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास कार्यक्रम पर काम।
  • ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता।
  • IAEA की निगरानी में समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) के भविष्य पर चर्चा।
  • परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया।
  • लेबनान सहित क्षेत्रीय सैन्य अभियानों को समाप्त करने का प्रस्ताव।
  • समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना।
  • आर्थिक सहयोग और निवेश को बढ़ावा देना।
  • क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक वार्ता जारी रखना।
  • मध्यस्थ देशों की मदद से समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी।
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Image Source: abp live

 

पाकिस्तान का नाम क्यों आया?

इस समझौते की सबसे बड़ी चर्चा इसका नाम है। दस्तावेज़ का मसौदा ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ कहलाने के कारण पाकिस्तान सुर्खियों में आ गया। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि ओमान ने भी वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। इसी वजह से इस समझौते में पाकिस्तान का नाम प्रमुखता से सामने आया।

 

इस समझौते का दुनिया पर क्या असर हो सकता है?

अगर समझौते के सभी प्रावधान लागू होते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा मध्य पूर्व में सैन्य तनाव कम होने से वैश्विक व्यापार और निवेश को भी फायदा मिल सकता है।

 

निष्कर्ष

US Iran 14 Point Agreement को हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयासों में से एक माना जा रहा है। हालांकि इस समझौते के कई पहलुओं और आधिकारिक दस्तावेज़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी भी आवश्यक है। यदि यह पूरी तरह लागू होता है तो इससे मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

 

FAQs

Q- 14 प्वाइंट्स वाली डील क्या है?

यह अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित 14 सूत्रीय समझौता है, जिसमें युद्धविराम, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं।

 

Q- इस समझौते में क्या-क्या तय हुआ?

समझौते में होर्मुज स्ट्रेट खोलना, प्रतिबंधों में ढील, परमाणु हथियार न विकसित करने की प्रतिबद्धता, 60 दिनों की वार्ता और पुनर्निर्माण कार्यक्रम जैसे प्रमुख बिंदु शामिल हैं।

 

Q-पाकिस्तान की भूमिका क्या रही?

रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि वार्ता में ओमान ने भी सहयोग किया।

 

Q-इस समझौते से तेल बाजार पर क्या असर होगा?

यदि समझौता पूरी तरह लागू होता है तो होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

 

Q-यह समझौता क्यों चर्चा में है?

क्योंकि इसमें अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने, परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं।