टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) के बोर्ड ने मंगलवार को एक अहम फैसला टाल दिया। मामला था नटराजन चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्त करने का। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर बोर्ड के भीतर कुछ मतभेद सामने आए, जिसके बाद निर्णय को फिलहाल आगे के लिए टाल दिया गया।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म हो रहा है। बोर्ड उनकी अवधि बढ़ाने पर चर्चा कर रहा था। इसी दौरान टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोबारा नियुक्ति से पहले कुछ शर्तें रखीं। बताया जा रहा है कि इन्हीं शर्तों के कारण फैसला टालना पड़ा।
नोएल टाटा की शर्तें क्या थीं?
सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों में हो रहे घाटे को लेकर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने टाटा संस पर बढ़ रहे कर्ज (debt) को लेकर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि अगर कर्ज का स्तर बढ़ता है तो ऐसी स्थिति बन सकती है जिसमें टाटा संस को शेयर बाजार (stock exchange) में सूचीबद्ध (listing) होना पड़े।
बताया जा रहा है कि नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने इस बारे में लिखित आश्वासन (written commitment) की मांग की। हालांकि, चंद्रशेखरन ने कथित तौर पर कहा कि भविष्य में लिस्टिंग कभी नहीं होगी, इसका पक्का वादा करना आसान नहीं है क्योंकि नियामकीय नियम (regulations) अपनी प्रक्रिया से चलते हैं।

लंबी चली बैठक, पर नतीजा नहीं
यह बैठक मुंबई स्थित समूह मुख्यालय बॉम्बे हाउस (Bombay House) में हुई। सूत्रों का कहना है कि बैठक काफी लंबी चली और चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति पर विस्तार से चर्चा हुई। बोर्ड के अन्य चार निदेशकों—वेनु श्रीनिवासन, हरीश मनवानी, अनीता जॉर्ज और सौरभ अग्रवाल—को इस प्रस्ताव से कोई खास आपत्ति नहीं थी।
कुछ निदेशकों ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर मतदान (vote) कराया जाए। लेकिन बताया जा रहा है कि चंद्रशेखरन ने खुद ही कहा कि यदि किसी निदेशक की इच्छा है तो फैसले को फिलहाल टाल देना बेहतर होगा। बाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इतना ही कहा, “मैंने सुझाव दिया कि इसे टाल दिया जाए, क्योंकि एक निदेशक की यही इच्छा थी।” उन्होंने यह भी कहा कि “टाटा संस के लिए कुछ भी नहीं बदलता।”
RBI के नियम और लिस्टिंग का दबाव
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 15 संस्थाओं, जिनमें टाटा संस भी शामिल है, को 30 सितंबर 2025 तक सूचीबद्ध होने की समय सीमा दी है। इसके जवाब में टाटा समूह ने अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (Core Investment Company – CIC) का पंजीकरण (registration) वापस करने का आवेदन किया है, ताकि लिस्टिंग की अनिवार्यता से बचा जा सके।
हालांकि, RBI ने अभी इस आवेदन पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा था कि जब तक पंजीकरण रद्द नहीं होता, कोई भी इकाई अपना काम जारी रख सकती है।
चंद्रशेखरन का सफर
62 वर्षीय नटराजन चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा समूह से जुड़ाव शुरू किया था। वे आगे चलकर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services – TCS) के सीईओ बने। फरवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया।
उनके नेतृत्व में समूह ने बड़े स्तर पर पुनर्गठन (restructuring) और एकीकरण (consolidation) किया। कहा जाता है कि समूह की 15 प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों की आय और मुनाफा लगभग दोगुना हुआ। उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए गए—जैसे देश में पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट (semiconductor fabrication facility) की योजना, घाटे में चल रही एयर इंडिया (Air India) का अधिग्रहण, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI) के दौर में TCS को नई दिशा देना।
टाटा समूह का इतिहास और सत्ता संतुलन
1868 में जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने मुंबई में टाटा समूह की स्थापना की थी। करीब 156 साल के इतिहास में लंबे समय तक समूह का नेतृत्व टाटा परिवार के हाथ में रहा। 2012 में रतन टाटा ने चेयरमैन पद छोड़ा और साइरस मिस्त्री को जिम्मेदारी सौंपी।
2016 में बोर्डरूम विवाद के बाद साइरस मिस्त्री को पद से हटा दिया गया। 2022 में उनका निधन हो गया। शापूरजी पल्लोनजी समूह (Shapoorji Pallonji Group) के पास अब भी टाटा संस में लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह सबसे बड़ा अल्पसंख्यक शेयरधारक (minority shareholder) है। यह समूह लिस्टिंग की मांग भी करता रहा है।
2024 में रतन टाटा के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनाया गया। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में दो-तिहाई हिस्सेदारी है, जिससे उसे रणनीतिक और प्रशासनिक फैसलों में निर्णायक भूमिका मिलती है।
आगे क्या?
टाटा संस करीब 30 कंपनियों के पोर्टफोलियो की देखरेख करता है, जिनमें उपभोक्ता उत्पाद, ऑटोमोबाइल, आईटी और एविएशन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। जैगुआर लैंड रोवर (Jaguar Land Rover), टाटा मोटर्स (Tata Motors), TCS और एयर इंडिया जैसी कंपनियां इसी समूह का हिस्सा हैं।

