प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून 2026 तक फ्रांस और स्लोवाकिया की छह दिवसीय यात्रा पर हैं। यह दौरा केवल एक नियमित विदेशी यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति, वैश्विक कूटनीति, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और आर्थिक हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मिशन माना जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, स्लोवाकिया के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और G7 समिट में हिस्सा लेंगे।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, वैश्विक ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन की चुनौतियां और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। ऐसे माहौल में भारत अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा क्यों महत्वपूर्ण है, भारत को इससे क्या लाभ मिल सकता है और G7 समिट में भारत की भूमिका कितनी अहम रहने वाली है।
PM Modi France and Slovakia Visit क्यों है खास?
प्रधानमंत्री मोदी की यह फ्रांस यात्रा उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद सातवीं फ्रांस यात्रा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत और फ्रांस के संबंध केवल औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं बल्कि गहरी रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं।

दूसरी ओर स्लोवाकिया की यात्रा अपने आप में ऐतिहासिक है। 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री वहां का दौरा कर रहा है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह यूरोप के मध्य और पूर्वी हिस्से के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करना चाहता है।
इस पूरे दौरे को तीन बड़े उद्देश्यों में समझा जा सकता है-
पहला, फ्रांस के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग को और गहरा करना।
दूसरा, स्लोवाकिया समेत यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी साझेदारी बढ़ाना।
तीसरा, G7 समिट में भारत के हितों और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को प्रमुखता से उठाना।
फ्रांस भारत का इतना करीबी साझेदार क्यों है?
भारत और फ्रांस के संबंध कई दशकों से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
जब 1998 में भारत ने पोखरण परमाणु परीक्षण किया था, तब अमेरिका, जापान और कई पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिए थे। उस समय फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल था जिसने भारत के साथ संबंध बनाए रखे और उसका समर्थन किया।
आज फ्रांस भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। भारत को फ्रांस से राफेल फाइटर जेट, मिराज-2000 लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियां मिल चुकी हैं। हाल ही में भारतीय नौसेना के लिए राफेल-एम लड़ाकू विमानों और अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद को भी मंजूरी मिली है।
फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर समर्थन करता है। इसके अलावा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की सदस्यता का भी पक्षधर रहा है।
यही वजह है कि फ्रांस को भारत का सबसे भरोसेमंद यूरोपीय रणनीतिक साझेदार माना जाता है।

‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम है। इस पहल की घोषणा फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स, IITs, IISc, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, कंपनियों और अनुसंधान संगठनों से जोड़ना है।
नीस में आयोजित इस कार्यक्रम में तकनीक, AI, डीप टेक, ग्रीन एनर्जी, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। सरकार चाहती है कि भारतीय नवाचारों को वैश्विक मंच मिले और विदेशी निवेशकों तक उनकी पहुंच बढ़े। माना जा रहा है कि ‘भारत इनोवेट्स’ इसी दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
स्लोवाकिया यात्रा क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया पहुंचेंगे। पहली नजर में यह एक छोटा यूरोपीय देश लग सकता है, लेकिन यूरोप की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
स्लोवाकिया को यूरोप का ऑटोमोबाइल हब भी कहा जाता है। यहां दुनिया की कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों की उत्पादन इकाइयां मौजूद हैं।
भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापार अभी सीमित स्तर पर है, लेकिन दोनों देश रक्षा उत्पादन, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, डिजिटल टेक्नोलॉजी और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत के लिए मध्य यूरोप में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर है। इसके साथ ही भारत यूरोपीय संघ के भीतर नए साझेदारों के साथ संबंध विकसित करने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।
G7 Summit 2026 क्या है और भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का सबसे चर्चित हिस्सा G7 समिट में उनकी भागीदारी है। G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं।
हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक प्रभाव है।
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत आज वैश्विक चर्चाओं का अहम हिस्सा बन चुका है। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI जैसे विषयों पर भारत का दृष्टिकोण दुनिया के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस बार G7 Summit के एजेंडे में क्या है?
फ्रांस के एवियां शहर में होने वाली G7 समिट में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
सबसे प्रमुख विषयों में यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल संघर्ष, गाजा संकट, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक आर्थिक सहयोग और सप्लाई चेन सुरक्षा शामिल हैं।
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा AI को लेकर भी दुनिया के देशों के बीच नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है। भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नियमों और सहयोग पर अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
भारत G7 का सदस्य क्यों नहीं है?
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि भारत इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद G7 का सदस्य क्यों नहीं है।
दरअसल G7 की स्थापना 1975 में विकसित देशों के समूह के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य उस समय वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करना था।
भारत उस समय विकासशील देशों की श्रेणी में आता था। हालांकि आज भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कई मामलों में G7 देशों के बराबर या उनसे आगे निकल रहा है।
इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में G7 मंच पर भारत की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में वैश्विक संस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया के दौरान भारत की भूमिका और बढ़ सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी की संभावित बैठकों पर क्यों है नजर?
G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी हो सकती हैं।
सबसे ज्यादा नजर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संभावित मुलाकात पर रहेगी। इसके अलावा जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और कनाडा के नेताओं के साथ भी बातचीत हो सकती है।
इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत को इस दौरे से क्या फायदा होगा?
इस यात्रा से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। फ्रांस के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग और मजबूत होगा। भारतीय स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को वैश्विक निवेशकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। स्लोवाकिया के साथ व्यापार और औद्योगिक साझेदारी बढ़ सकती है।
G7 मंच पर भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और AI से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा सकेगा। साथ ही भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर पाएगा।
G20 से कैसे अलग है G7?
G7 और G20 दोनों वैश्विक मंच हैं, लेकिन इनके उद्देश्य और सदस्यता में बड़ा अंतर है। G7 दुनिया की 7 विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ सुरक्षा, विदेश नीति और भू-राजनीतिक मामलों पर भी फोकस करता है, जबकि G20 में G7 देशों के अलावा भारत, चीन, ब्राजील, रूस, सऊदी अरब और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
G20 का मुख्य फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, वित्तीय स्थिरता और विकास से जुड़े मुद्दों पर रहता है। G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और उसके फैसले कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, वहीं G20 दुनिया की करीब 85% GDP और दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यही वजह है कि आज के समय में G20 को अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावशाली मंच माना जाता है, क्योंकि इसमें विकसित देशों के साथ-साथ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की भी भागीदारी है।
निष्कर्ष
PM Modi France and Slovakia Visit केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रतीक है। फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना, स्लोवाकिया के साथ नए अवसर तलाशना और G7 समिट में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करना इस दौरे के प्रमुख उद्देश्य हैं।
ऐसे समय में जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत को वैश्विक मंच पर और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
FAQs
Why is PM Modi visiting France and Slovakia?
प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने, भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में हिस्सा लेने और G7 समिट में भाग लेने के लिए इस दौरे पर हैं।
What are the key objectives of the visit?
दौरे का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी, निवेश, नवाचार और वैश्विक कूटनीति को मजबूत करना है।
Why is France important for India?
फ्रांस भारत का प्रमुख रणनीतिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा रक्षा उपकरण आपूर्तिकर्ता है। वह UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन करता है।
What is the significance of the G7 Summit for India?
G7 समिट भारत को वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी मुद्दों पर अपनी बात रखने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
When will PM Modi return to India?
प्रधानमंत्री मोदी 18 जून 2026 को अपनी फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा पूरी कर भारत लौटेंगे।

