तीसरी तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ: 2022-23 बना नया बेस ईयर, क्या बदलेगा पूरा आर्थिक गणित?

वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 27 फरवरी को जारी आंकड़ों में बताया कि इस तिमाही में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर दबाव बना हुआ है।


सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस बार जीडीपी की गणना 2011-12 के बजाय 2022-23 को आधार वर्ष मानकर की गई है। यानी अब देश की आर्थिक वृद्धि को एक नए पैमाने से मापा जा रहा है।


तिमाही में कितना रहा उत्पादन?

नई सीरीज के अनुसार तीसरी तिमाही में रियल जीडीपी 84.54 लाख करोड़ रुपये रही। पिछले साल इसी अवधि में यह 78.41 लाख करोड़ रुपये थी। इसका मतलब है कि उत्पादन और सेवाओं की कुल वैल्यू में साफ बढ़त दर्ज की गई है।


सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.6% कर दिया है। इससे पहले यह 7.1% थी। वहीं नॉमिनल जीडीपी में 8.6% की वृद्धि का अनुमान है।


इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.2% और 2024-25 में 7.1% रही थी। यानी मौजूदा साल का अनुमान पिछले दो सालों से बेहतर है।

GDP base year 2022-23

वैश्विक दबाव के बीच राहत
ये आंकड़े इसलिए भी अहम हैं क्योंकि यह वह पहली पूरी तिमाही है जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के बाद आई है। अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता और व्यापार दबाव के बावजूद 7.8% की वृद्धि दर यह संकेत देती है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी स्थिरता है।सरकार का मानना है कि निवेश और खपत में सुधार से यह रफ्तार बनी रह सकती है।


बदला बेस ईयर, क्या है मतलब?
अब जीडीपी की गणना 2022-23 को आधार वर्ष मानकर की जा रही है। इससे पहले 2011-12 आधार वर्ष था, जो अब करीब 14 साल पुराना हो चुका था। इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं।


यूपीआई पेमेंट, ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ओटीटी प्लेटफॉर्म, गिग इकोनॉमी और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हुआ है। इसलिए नया आधार वर्ष जरूरी माना गया।


आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुना जाता है जब अर्थव्यवस्था सामान्य स्थिति में हो। 2022-23 ऐसा साल था जब कोरोना का असर खत्म हो चुका था और आर्थिक गतिविधियां स्थिर हो गई थीं।


नई सीरीज में क्या-क्या जोड़ा गया?
नई जीडीपी सीरीज में कई नए डेटा स्रोत शामिल किए गए हैं। इनमें जीएसटी नेटवर्क, पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम और ई-वाहन रजिस्ट्रेशन डेटा शामिल हैं।


साथ ही अब घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू सहायकों की सेवाओं से जुड़े आंकड़े भी बेहतर तरीके से शामिल किए गए हैं।


अनुमान की पद्धति में भी बदलाव किया गया है। मैन्युफैक्चरिंग और कृषि सेक्टर के लिए डबल डिफ्लेशन तरीका अपनाया गया है, जबकि बाकी अधिकतर सेक्टर में सिंगल एक्सट्रापोलेशन का उपयोग किया गया है। पहले अधिकतर जगह सिंगल डिफ्लेशन पद्धति अपनाई जाती थी।


इसके अलावा अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर और घरेलू कामकाज को समझने के लिए वार्षिक सर्वे और पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़ों पर ज्यादा भरोसा किया गया है। सप्लाई यूज टेबल फ्रेमवर्क को भी नेशनल अकाउंट्स के साथ जोड़ा गया है, जिससे उत्पादन और खर्च के आंकड़ों में अंतर कम हो सके।


पुराने आंकड़ों में भी बदलाव
नई सीरीज लागू होने के बाद पिछले वर्षों के आंकड़ों को भी नए आधार वर्ष के हिसाब से दोबारा तैयार किया गया है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.2% और वित्त वर्ष 2025 में 7.1% रही।


वित्त वर्ष 2025 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 9.7% दर्ज की गई थी। सेक्टर के हिसाब से देखें तो उस साल प्राथमिक क्षेत्र 4.9%, द्वितीयक क्षेत्र 8.0% और सेवा क्षेत्र 7.9% की दर से बढ़ा था।


सरकार दिसंबर 2026 तक 1950-51 से जुड़ी बैक-सीरीज के आंकड़े भी नए आधार वर्ष के अनुसार जारी करने की तैयारी में है।


आम लोगों पर क्या असर?
बेस ईयर बदलने से आम नागरिक की जेब पर सीधा असर नहीं पड़ता। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए किया जाता है। सही डेटा से सरकार बेहतर नीतियां बना सकती है। निवेश की दिशा तय करने में भी मदद मिलती है।


विदेशी निवेशकों के लिए भी भरोसेमंद और अपडेटेड आंकड़े अहम होते हैं। इससे देश में निवेश बढ़ सकता है, जिसका फायदा धीरे-धीरे रोजगार और आय के रूप में लोगों तक पहुंचता है।


जीडीपी क्या बताती है?
जीडीपी यानी देश में एक तय समय में तैयार हुए सामान और दी गई सेवाओं की कुल वैल्यू। इसे अर्थव्यवस्था की सेहत का रिपोर्ट कार्ड कहा जा सकता है।


जीडीपी दो तरह की होती है-रियल और नॉमिनल। रियल जीडीपी में कीमतें आधार वर्ष की मानी जाती हैं, जिससे असली उत्पादन का पता चलता है। नॉमिनल जीडीपी मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है, जिसमें महंगाई भी शामिल रहती है।


जीडीपी की गणना एक फार्मूले से की जाती है:
GDP = C + G + I + NX
यहां C का मतलब लोगों का खर्च, G सरकार का खर्च, I निवेश और NX निर्यात से आयात घटाने के बाद बची रकम है।


कितने साल में बदलना चाहिए आधार वर्ष?
अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 साल में आधार वर्ष बदला जाना चाहिए। भारत में आमतौर पर 5 साल का अंतर रखा जाता है। हालांकि नोटबंदी, जीएसटी और फिर कोविड महामारी के कारण यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। अब जाकर नया आधार वर्ष लागू किया गया है।


अगले चरण में वित्त वर्ष 2025-26 के अस्थायी आंकड़े और चौथी तिमाही के डेटा 29 मई 2026 को जारी किए जाएंगे।