चीन–पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता : DRDO ने की अग्नि-VI की तैयारी पूरी, बस मोदी सरकार की मंजूरी का इंतजार  

भारत की रक्षा क्षमताओं को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख समीर वी. कामत ने संकेत दिया है कि देश का अगला बड़ा मिसाइल प्रोजेक्ट ‘अग्नि-VI’ पूरी तरह तैयार है और जैसे ही सरकार से हरी झंडी मिलेगी, इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने यह बात ANI नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 के दौरान कही।

कामत के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी शुरुआती तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यानी तकनीकी स्तर पर एजेंसी पूरी तरह तैयार है, अब सिर्फ सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार है। अगर मंजूरी मिलती है, तो यह मिसाइल भारत की अग्नि सीरीज में अब तक की सबसे उन्नत और ताकतवर मिसाइल साबित हो सकती है।

 

अग्नि-VI: क्या खास होगा इस नई मिसाइल में?

अग्नि-VI को एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में विकसित करने की योजना है। इसकी मारक क्षमता लगभग 6,000 से 10,000 किलोमीटर तक बताई जा रही है। इसका मतलब यह है कि यह बहुत दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम होगी।

इस मिसाइल की एक और खासियत होगी इसका MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) तकनीक से लैस होना। इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर वार कर सकती है। इससे इसकी मारक क्षमता और प्रभाव काफी बढ़ जाता है।

इसके अलावा, अग्नि-VI में बेहतर सटीकता, ज्यादा सुरक्षा (survivability) और पेलोड में लचीलापन होने की उम्मीद है। यह सब मिलकर भारत की परमाणु सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाएंगे।

 

हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम में भी तेज प्रगति

समीर कामत ने सिर्फ अग्नि-VI ही नहीं, बल्कि भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है – हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल।

ग्लाइड मिसाइल के बारे में उन्होंने बताया कि यह पहले एक बूस्टर की मदद से तेज गति पकड़ती है और उसके बाद बिना इंजन के ही आगे बढ़ती है। वहीं क्रूज मिसाइल पूरे सफर के दौरान स्क्रैमजेट इंजन की मदद से चलती रहती है।

कामत के अनुसार, ग्लाइड मिसाइल इस समय क्रूज मिसाइल से आगे है और इसके शुरुआती परीक्षण जल्द हो सकते हैं। इसका मतलब यह है कि भारत बहुत जल्द हाइपरसोनिक तकनीक के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

DRDO completes Agni-VI preparations

नई मिसाइल फोर्स का ढांचा तैयार करने पर चर्चा
इस समिट में यह भी बताया गया कि भारत एक नई तरह की पारंपरिक (conventional) मिसाइल फोर्स तैयार करने की योजना बना रहा है। इसमें छोटी दूरी से लेकर लंबी दूरी तक की सभी तरह की मिसाइलें शामिल होंगी।
कामत ने कहा कि इस फोर्स में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलें भी शामिल की जाएंगी, ताकि जरूरत के हिसाब से अलग-अलग मिशन पूरे किए जा सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि छोटी दूरी की कुछ मिसाइलें लगभग तैयार हैं और जल्द ही सेना में शामिल की जा सकती हैं। ‘प्रलय’ मिसाइल अपने अंतिम परीक्षण चरण में है और इसे जल्द ही तैनात किया जा सकता है।


अग्नि मिसाइल सीरीज: भारत की ताकत की रीढ़
अग्नि मिसाइल श्रृंखला भारत की रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा है। यह मिसाइलें ठोस ईंधन (solid fuel) से चलती हैं और इन्हें सड़क और रेल दोनों से लॉन्च किया जा सकता है। इससे दुश्मन के हमले के समय इन्हें बचाना आसान हो जाता है।
इस सीरीज की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, जब भारत ने Integrated Guided Missile Development Program (IGMDP) शुरू किया था। इस प्रोग्राम का नेतृत्व देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था।
समय के साथ भारत ने अग्नि-I से लेकर अग्नि-V और अग्नि प्राइम जैसी कई मिसाइलें विकसित की हैं, जो अलग-अलग दूरी और जरूरतों के हिसाब से बनाई गई हैं।


बैलिस्टिक मिसाइल कैसे काम करती है?
बैलिस्टिक मिसाइल का काम करने का तरीका थोड़ा अलग होता है। शुरुआत में यह रॉकेट की मदद से ऊपर की ओर जाती है, लेकिन कुछ समय बाद इसका इंजन बंद हो जाता है और यह अपने रास्ते पर खुद आगे बढ़ती है।


इसकी उड़ान को तीन हिस्सों में बांटा जाता है –
1. बूस्ट फेज: इस चरण में मिसाइल अपने ईंधन का इस्तेमाल करके तेजी से ऊपर उठती है। यह चरण कुछ मिनटों का होता है।
2. मिडकोर्स फेज: इसमें मिसाइल बिना इंजन के अंतरिक्ष में आगे बढ़ती रहती है।
3. टर्मिनल फेज: इस चरण में मिसाइल का वारहेड वापस धरती के वातावरण में प्रवेश करता है और अपने लक्ष्य को निशाना बनाता है।


अग्नि मिसाइलों के अलग-अलग प्रकार
भारत के पास अग्नि सीरीज की कई मिसाइलें हैं, जो अलग-अलग दूरी और क्षमताओं के लिए बनाई गई हैं।
अग्नि-I: यह एक छोटी दूरी की मिसाइल है, जिसकी रेंज 700 से 1200 किलोमीटर तक है। इसे सड़क और रेल दोनों से लॉन्च किया जा सकता है।
अग्नि-II: यह मध्यम दूरी की मिसाइल है, जिसकी रेंज लगभग 2000 किलोमीटर है। इसमें दो चरण होते हैं और यह ठोस ईंधन से चलती है।
अग्नि-III: इसकी रेंज करीब 3500 किलोमीटर है और यह काफी सटीक मानी जाती है।
अग्नि-IV: यह 4000 किलोमीटर तक मार कर सकती है और इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं।
अग्नि-V: यह एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 5000 से 5500 किलोमीटर तक है। यह भारत की सबसे उन्नत मिसाइलों में से एक है।
अग्नि प्राइम: यह नई पीढ़ी की मिसाइल है, जिसकी रेंज 1000 से 2000 किलोमीटर तक है और इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है।


भारत की रक्षा रणनीति में अग्नि मिसाइलों का महत्व
अग्नि मिसाइलें भारत की परमाणु सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा हैं। ये देश की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति के तहत काम करती हैं, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर उस पर हमला होता है, तो वह जवाब देने में सक्षम है।
इन मिसाइलों की मदद से भारत ने अपनी सुरक्षा क्षमता को काफी मजबूत किया है। खासकर लंबी दूरी की मिसाइलें देश को रणनीतिक बढ़त देती हैं।
अग्नि-V के आने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।


आगे क्या?
इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि अग्नि-VI को कब मंजूरी मिलेगी। DRDO की तैयारी पूरी है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार को लेना है।
अगर यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है, तो भारत की मिसाइल ताकत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही हाइपरसोनिक तकनीक में हो रही प्रगति भी भारत को रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।

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