संसद में ईरान जंग को लेकर टकराव: विपक्ष चर्चा पर अड़ा, सरकार ने स्पीकर हटाने का प्रस्ताव याद दिलाया, जानिए क्या है मामला?

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत काफी हंगामेदार रही। सोमवार को लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। विपक्ष ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और उसके भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा की मांग की, जबकि सरकार का कहना था कि वह इस विषय पर जानकारी देने के लिए तैयार है।

 

हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर प्रभावित रही और आखिर में इसे मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, वहां फंसे भारतीय नागरिकों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं पर सरकार की तैयारी के बारे में जानकारी दी।

 

वेस्ट एशिया युद्ध पर चर्चा की मांग

विपक्ष का कहना था कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रहे हालात भारत के लिए भी चिंता का विषय हैं। खास तौर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, ऊर्जा आपूर्ति और वहां काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

 

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार सिर्फ बयान देकर मामले को खत्म करना चाहती है, जबकि इस पर पूरी बहस होनी चाहिए।

 

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक पार्टी का मामला नहीं है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को विपक्ष को भरोसे में लेना चाहिए।

Parliament clash Iran war debate

विदेश मंत्री का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले राज्यसभा और बाद में लोकसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान दिया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जा रही है।

 

उन्होंने कहा कि 28 फरवरी के बाद से पश्चिम एशिया के कई देशों में तनाव बढ़ गया है। इस कारण आम जीवन और व्यापार दोनों प्रभावित हुए हैं। भारत सरकार का मुख्य लक्ष्य वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

जयशंकर ने बताया कि 8 मार्च तक लगभग 67,000 भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं। उन्हें वापस लाने के लिए कई मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।

 

खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय

विदेश मंत्री ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय पढ़ाई या नौकरी के लिए मौजूद हैं।

 

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी इलाके से पूरी करता है। तेल और गैस की सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट भारत के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

 

जयशंकर ने कहा कि सप्लाई चेन में अस्थिरता और संघर्ष के कारण हालात जटिल हो गए हैं, इसलिए सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 

भारतीय नाविकों की मौत

विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि हाल के घटनाक्रम में दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नाविक अभी भी लापता है।

 

उन्होंने कहा कि मुंबई स्थित शिपिंग महानिदेशालय ने जनवरी में ही भारतीय नाविकों को सावधानी बरतने की सलाह दी थी। उन्हें दूतावास की एडवाइजरी का पालन करने और बिना जरूरत तट पर जाने से बचने को कहा गया था।

 

ईरान से संपर्क मुश्किल

जयशंकर ने कहा कि वर्तमान हालात में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना आसान नहीं है, क्योंकि वहां हाल के हमलों में कई वरिष्ठ नेता मारे गए हैं और देश का बुनियादी ढांचा भी काफी नुकसान झेल चुका है।

 

हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि भारत लगातार कूटनीतिक माध्यमों से संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और शांति तथा बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन करता है।

 

ईरानी जहाज को भारत ने दी अनुमति

विदेश मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का धन्यवाद किया है क्योंकि भारत ने ईरानी युद्धपोत “लावन” को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी।

 

भारत का कहना है कि वह क्षेत्र में स्थिरता और शांति चाहता है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील करता है।

 

संसद में हंगामा और वॉकआउट

जब जयशंकर राज्यसभा में अपना बयान दे रहे थे, तब विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया।

 

वहीं लोकसभा में उनके भाषण के दौरान विपक्षी सांसद “वी वांट डिस्कशन” के नारे लगाते रहे। चेयर की ओर से बार-बार शांत रहने की अपील की गई, लेकिन हंगामा जारी रहा।

 

स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर भी विवाद

संसद में हंगामे की एक बड़ी वजह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी रहा।

 

सरकार का कहना था कि विपक्ष ने पहले स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया और फिर उसी समय दूसरा प्रस्ताव पेश कर दिया, जो संसदीय प्रक्रिया के अनुसार सही नहीं है।

 

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को इस प्रस्ताव को लाने पर पछतावा होगा क्योंकि यह बिना किसी ठोस कारण के लाया गया है।

 

सरकार का आरोप-विपक्ष बहस से भाग रहा

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बहस से बच रहा है। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख पहले ही तय की जा चुकी थी, लेकिन विपक्ष ने उसी समय दूसरा प्रस्ताव लाकर बहस से बचने की कोशिश की।

 

गोयल ने कहा कि कांग्रेस को संसदीय प्रक्रिया की समझ नहीं है और वह बिना वजह संसद का समय बर्बाद कर रही है।

 

विपक्ष का जवाब

विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार गंभीर मुद्दों पर खुली चर्चा से बच रही है।

 

कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि संसद में सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा। अगर चर्चा होगी तो सांसद सरकार से सवाल पूछ सकेंगे और जवाब मांग सकेंगे।

 

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी कहा कि भारत की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

 

नेताओं के बीच बयानबाजी

संसद के भीतर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे बिहार के एक पुराने मंचीय कार्यक्रम “विशेषर का डांस” के एक किरदार जैसे हैं।

 

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि संसद को चलने नहीं देना जनता के अधिकारों का अपमान है।

 

वहीं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि जब भी देशहित का मुद्दा उठता है, विपक्ष सदन से बाहर चला जाता है।

 

स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया

लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) में दी गई है। इसके अनुसार स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना जरूरी होता है।

 

अगर सदन के कम से कम 50 सदस्य इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं तो इस पर चर्चा और मतदान होता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।

 

इस प्रक्रिया के दौरान स्पीकर खुद सदन की अध्यक्षता नहीं करते और उनकी जगह कोई अन्य सदस्य कार्यवाही चलाता है।

 

सरकार की अपील-संसद को चलने दें

सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से नहीं भाग रही है।

 

संसदीय कार्य मंत्री और अन्य नेताओं ने विपक्ष से अपील की कि वह हंगामा करने के बजाय सदन में चर्चा करे ताकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस बातचीत हो सके।

 

आगे क्या होगा

फिलहाल संसद का बजट सत्र जारी है और आने वाले दिनों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, ऊर्जा संकट और विदेश नीति जैसे विषय देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

 

ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या संसद में इन मुद्दों पर गंभीर और विस्तृत बहस हो पाएगी या राजनीतिक टकराव के कारण कार्यवाही इसी तरह प्रभावित होती रहेगी।