पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान-अमेरिका टकराव शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर भारत आने वाला पहला तेल टैंकर सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच गया है।
लाइबेरिया के झंडे वाला यह तेल टैंकर “शेनलोंग” (Shenlong) सऊदी अरब के रास तनुरा टर्मिनल से कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हुआ था। जहाज 3 मार्च को सऊदी अरब से निकला और कई जोखिमों को पार करते हुए बुधवार को मुंबई पोर्ट पहुंच गया।
यह जहाज भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है।

1.35 लाख टन कच्चा तेल लेकर पहुँचा जहाज
शेनलोंग टैंकर अपने साथ 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है। जहाज को मुंबई के पास स्थित जवाहर द्वीप (बुचर आइलैंड) पर खड़ा किया गया, जहां से इस तेल को उतारा जाएगा।

यह कच्चा तेल मुंबई के पूर्वी हिस्से माहुल में स्थित रिफाइनरियों तक पहुंचाया जाएगा। जानकारी के अनुसार तेल उतारने की पूरी प्रक्रिया में लगभग 36 घंटे का समय लग सकता है।
खतरनाक सफर के बाद राहत की सांस
जहाज के चालक दल के सदस्यों ने बताया कि यह सफर आसान नहीं था। रास्ते में कई बार जहाज के GPS सिग्नल गायब हो गए, जिससे नेविगेशन बेहद मुश्किल हो गया।
दूसरे अधिकारी अभिजीत आलोक ने बताया कि आधुनिक तकनीक के बिना जहाज चलाना बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि कप्तान के अनुभव और टीम के सहयोग से ही यह यात्रा सुरक्षित पूरी हो पाई।
उनके अनुसार, जब GPS काम नहीं कर रहा था तब जहाज को पुराने तरीकों और वैकल्पिक नेविगेशन तकनीकों की मदद से आगे बढ़ाया गया।
कप्तान का अनुभव आया काम
इस जहाज के कप्तान सुक्शांत सिंह संधू, जो पंजाब के मोहाली के रहने वाले हैं, ने बताया कि यात्रा के दौरान कई बार GPS सिग्नल बंद हो गए थे।
हालांकि जहाज को किसी सीधे हमले का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन माहौल बेहद तनावपूर्ण था। उन्होंने कहा कि समुद्र में अनिश्चितता बनी हुई थी, इसलिए हर समय सतर्क रहना पड़ रहा था।
जहाज पर 29 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय क्रू
शेनलोंग टैंकर पर कुल 29 सदस्यीय चालक दल मौजूद है। इसमें भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के नाविक शामिल हैं।
तीसरे अधिकारी उस्मान अरशद, जो पाकिस्तान के कराची के रहने वाले हैं, ने बताया कि पूरे सफर के दौरान कप्तान और बाकी टीम ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि जहाज पर खाने-पीने की पूरी व्यवस्था थी और आपात स्थिति के लिए लगातार तैयारियां रखी गई थीं।
रास्ते में दिखे लड़ाकू विमान
चालक दल के अनुसार, सऊदी अरब के आसमान में कुछ लड़ाकू विमान उड़ते हुए दिखाई दिए थे। हालांकि उन्हें सीधे किसी सैन्य कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा।
इसके बावजूद पूरे रास्ते में तनाव बना रहा क्योंकि आसपास का इलाका युद्ध की स्थिति में है।
अगला पड़ाव होगा फुजैराह
मुंबई में तेल उतारने के बाद शेनलोंग टैंकर शुक्रवार रात संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह के लिए रवाना होगा।
फुजैराह बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, लेकिन वहां भी हाल के दिनों में संघर्ष का असर देखा गया है।
9 मार्च को वहां ड्रोन हमले को रोकने की कार्रवाई के दौरान गिरे मलबे से आग लगने की घटना सामने आई थी।
एक और तेल टैंकर भारत के करीब
इसी बीच एक और कच्चा तेल लेकर आ रहा जहाज “स्मिर्नी” (Smyrni) भी भारत की ओर बढ़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक यह टैंकर 14 मार्च को मुंबई पहुंच सकता है। इससे संकेत मिलता है कि कठिन हालात के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति की कोशिशें जारी हैं।
युद्ध ने क्यों बढ़ा दिया खतरा?
दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई। इसके जवाब में ईरान ने कई व्यापारी जहाजों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर दिया।
बताया जाता है कि चीन से जुड़े जहाजों को छोड़कर कई अन्य जहाजों को खतरे का सामना करना पड़ा है।
दुनिया के तेल व्यापार के लिए अहम रास्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।
हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यह दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है।
अगर इस रास्ते से आपूर्ति रुक जाती है तो इसका असर सीधे वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ईंधन की कीमतों पर पड़ता है।
ईरान की चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर अलीरेजा तांगसिरी ने हाल ही में कहा कि जो भी जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरना चाहते हैं उन्हें ईरान की अनुमति लेनी होगी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ने वाले दो जहाजों को निशाना बनाया गया।
ईरानी मीडिया के अनुसार, जो जहाज अमेरिका या इजरायल से जुड़े हितों के लिए काम नहीं करते, उन्हें सुरक्षित गुजरने दिया जा सकता है।
ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद हुआ
समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, शेनलोंग टैंकर ने जोखिम वाले हिस्से से गुजरते समय अपना Automatic Identification System (AIS) बंद कर दिया था।
AIS एक अनिवार्य रेडियो प्रणाली होती है, जो जहाज की पहचान, स्थान और गति की जानकारी दूसरे जहाजों और तटीय स्टेशनों को देती है।
इसका इस्तेमाल जहाजों की टक्कर रोकने और सुरक्षित नेविगेशन के लिए किया जाता है।
भारत के जहाजों की सुरक्षा पर नजर
भारत के शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज काम कर रहे हैं।
इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं और उन पर 677 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक तैनात हैं।
सरकार ने बनाया 24 घंटे का कंट्रोल रूम
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 28 फरवरी 2026 से 24 घंटे का कंट्रोल रूम शुरू किया है।
यह कंट्रोल रूम शिपिंग मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के साथ मिलकर काम कर रहा है।
भारतीय दूतावास, जहाज प्रबंधन कंपनियां और भर्ती एजेंसियां भी मिलकर नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगी हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है। इसलिए खाड़ी क्षेत्र में होने वाला कोई भी तनाव सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
ऐसे समय में शेनलोंग जैसे जहाज का सुरक्षित भारत पहुंचना एक राहत भरी खबर माना जा रहा है।

