होर्मुज स्ट्रेट से भारत को राहत: ईरान ने दो भारतीय गैस टैंकरों को दी सुरक्षित राह, क्या अब कम होगा गैस संकट?

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और समुद्री तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। खबरों के मुताबिक ईरान ने दो भारतीय गैस टैंकरों को रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है।

 

सूत्रों के अनुसार ये दोनों टैंकर अब भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। इससे भारत में घरेलू एलपीजी सप्लाई पर पड़ रहे दबाव को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में सैन्य तनाव के कारण कई जहाज इस रास्ते में फंसे हुए थे।

 

भारत की ओर आ रहे हैं दो बड़े गैस टैंकर

जानकारी के मुताबिक भारत के झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर- शिवालिक और नंदा देवी– आज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

 

ये दोनों जहाज शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। बताया गया है कि इनमें बड़ी मात्रा में गैस भरी हुई है। इनमें से एक टैंकर शिवालिक लगभग 40 हजार मीट्रिक टन गैस लेकर चल रहा है, जबकि नंदा देवी में भी बड़ी मात्रा में गैस लदी हुई है।

 

सूत्रों का कहना है कि इन जहाजों का सुरक्षित पार होना एक बेहद सावधानी से किया गया ऑपरेशन था, जिसमें ईरान सहित क्षेत्र के अन्य देशों का भी सहयोग मिला।

Strait of Hormuz provides relief to India

कई जहाज रास्ते में फंसे थे
पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कई क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई की है।


इस संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है।


बताया जाता है कि इस इलाके में सैकड़ों जहाज फंस गए थे, जिनमें करीब 28 भारतीय झंडे वाले जहाज भी शामिल थे। अब धीरे-धीरे कुछ जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलना शुरू हुआ है।


एक और तेल टैंकर भी पार कर चुका है रास्ता
रिपोर्ट के अनुसार एक अन्य भारतीय टैंकर भी हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है। यह जहाज सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर आ रहा है और शनिवार तक देश पहुंच सकता है।
इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिलने की संभावना है।


भारत और ईरान के बीच लगातार बातचीत
इस पूरे मामले में भारत ने कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से कई बार फोन पर बातचीत की है।


बताया गया है कि 28 फरवरी, 5 मार्च, 10 मार्च और 12 मार्च को दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था।


इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई।


भारत की प्राथमिकता: नागरिकों और व्यापार की सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया कि भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाध आवाजाही है।


भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को प्रभावित कर सकती है।


होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है, जिसके जरिए दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

यदि इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट आती है तो उसका असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।


जहाजों पर हमले से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं। उदाहरण के तौर पर एक थाईलैंड के झंडे वाला मालवाहक जहाज, जो गुजरात के कांडला बंदरगाह की ओर जा रहा था, संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाह से निकलने के कुछ समय बाद ही हमले का शिकार हो गया।
इस तरह की घटनाओं ने समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।


भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या इस क्षेत्र में
खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। अनुमान है कि करीब 23 हजार भारतीय नाविक इस इलाके में विभिन्न व्यापारी जहाजों और समुद्री परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं।
ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव उनके लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।


ईरान ने भारत को दिया भरोसा
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने हाल ही में कहा कि ईरान भारत के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता देगा।
उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास भी मजबूत है।
राजदूत ने यह भी कहा कि दोनों देशों के साझा हित हैं और भविष्य में भी सहयोग जारी रहेगा।


युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर सिर्फ समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है।


तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है और कई देशों को अपनी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता होने लगी है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।


ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर बड़ा दावा
इसी बीच ईरान की राजनीति को लेकर भी कुछ बड़ी खबरें सामने आई हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं।


रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को हुए अमेरिका और इजरायल के हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया।


बताया गया है कि हमले में लगी चोट इतनी गंभीर थी कि उनका एक पैर काटना पड़ा और उनके लिवर को भी काफी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के जिस हिस्से में उन्हें रखा गया है वहां कड़ी सुरक्षा तैनात की गई है।


हाल ही में बने थे नए सुप्रीम लीडर
मुजतबा खामेनेई को 9 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था। इससे पहले उनके पिता और देश के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का 28 फरवरी को निधन हो गया था।
हालांकि इन रिपोर्ट्स की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।


क्षेत्रीय संकट के असर बढ़ते जा रहे
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब कई देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है। जहाजों पर हमले, समुद्री रास्तों पर खतरा और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा जैसे मुद्दे पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी अहम है क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है।


निष्कर्ष:
ईरान द्वारा भारतीय गैस टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देना भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। इससे देश में गैस सप्लाई पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।


हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और समुद्री व्यापार पर इसका असर बना हुआ है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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