एयर इंडिया के बाद इंडिगो ने भी बढ़ाया किराया, लगाया नया सरचार्ज, जानिए कैसे तय होती है टिकट की कीमत ?

देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक और झटका सामने आया है। एयर इंडिया के बाद अब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भी अपनी फ्लाइट टिकटों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है। कंपनी ने शुक्रवार को घोषणा की कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।


इंडिगो के मुताबिक यह नया सरचार्ज 14 मार्च की रात 12 बजे से लागू हो जाएगा। इसके बाद यात्रियों को टिकट बुक करते समय पहले की तुलना में ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।

Indigo imposed new surcharge

घरेलू और विदेशी उड़ानों पर अलग-अलग शुल्क
एयरलाइन ने बताया कि अलग-अलग दूरी की उड़ानों के हिसाब से यह अतिरिक्त शुल्क तय किया गया है। घरेलू उड़ानों और भारतीय उपमहाद्वीप के रूट्स पर यात्रियों को लगभग 425 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

वहीं मध्य पूर्व की उड़ानों के लिए यह सरचार्ज करीब 900 रुपये तक होगा। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, अफ्रीका और पश्चिम एशिया जाने वाली फ्लाइट्स पर लगभग 1800 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।


सबसे ज्यादा असर यूरोप जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों पर पड़ेगा, जहां यात्रियों को करीब 2300 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा।


जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल
इंडिगो ने साफ किया है कि टिकटों पर यह अतिरिक्त शुल्क जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों की वजह से लगाया गया है। हाल के दिनों में जेट फ्यूल यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के दाम तेजी से बढ़े हैं।


एयरलाइन इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार एशिया में जेट फ्यूल की कीमतें पिछले महीने की तुलना में लगभग 84.8 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं पिछले साल के औसत के मुकाबले इसमें करीब 89.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इतनी तेज बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत को अचानक काफी बढ़ा दिया है।


तेल संकट के पीछे पश्चिम एशिया का तनाव
तेल की कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से आया है। फरवरी के अंत में शुरू हुए ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई।


इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई तेल मार्ग प्रभावित हुए, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा। इसका असर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया।
फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। हाल ही में यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच गई थी।


जेट फ्यूल लगभग दोगुना महंगा
संघर्ष शुरू होने से पहले जेट फ्यूल की कीमतें करीब 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच थीं। लेकिन हाल के घटनाक्रम के बाद कई देशों में इसकी कीमत 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
यानी बहुत कम समय में इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है। इसका सीधा असर एयरलाइंस के खर्च पर पड़ रहा है।


एयरलाइंस के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा
एविएशन इंडस्ट्री में जेट फ्यूल सबसे महंगा खर्च माना जाता है। आम तौर पर किसी एयरलाइन के कुल संचालन खर्च का करीब 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है।
ऐसे में जब फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो कंपनियों के पास टिकट की कीमत बढ़ाने के अलावा बहुत कम विकल्प बचते हैं।
इंडिगो ने भी कहा है कि फ्यूल की बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह किराए में शामिल करना संभव नहीं था, इसलिए फिलहाल सीमित सरचार्ज लगाया गया है।


एयर इंडिया ने भी बढ़ाया किराया
इंडिगो से पहले एयर इंडिया भी टिकट की कीमतें बढ़ाने का फैसला कर चुकी है। कंपनी ने 12 मार्च से घरेलू उड़ानों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लागू किया है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में लगभग 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। एयर इंडिया ने इसे तीन चरणों में लागू करने की योजना बनाई है।


पहले चरण में घरेलू और सार्क देशों के टिकटों पर 399 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। वहीं पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका जैसे रूट्स पर 10 डॉलर से लेकर 90 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया है।
दूसरे चरण में 18 मार्च से यूरोप, उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के रूट्स पर सरचार्ज को 200 डॉलर तक बढ़ाया जा सकता है।


दुनियाभर की एयरलाइंस पर असर
तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ भारतीय एयरलाइंस पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि दुनिया भर की कई कंपनियां भी इससे प्रभावित हुई हैं।


न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय एयरलाइन एयर न्यूजीलैंड ने घरेलू उड़ानों के किराए में लगभग 10 न्यूजीलैंड डॉलर की बढ़ोतरी की है। वहीं छोटी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 20 डॉलर और लंबी दूरी की उड़ानों पर करीब 90 डॉलर तक का इजाफा किया गया है।


ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख एयरलाइन क्वांटास ने भी अपने कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर किराया बढ़ाया है।
इसके अलावा हांगकांग एयरलाइंस ने भी फ्यूल सरचार्ज में लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की घोषणा की है।


कई उड़ानें रद्द भी हुईं
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर उड़ानों के संचालन पर भी पड़ा है। अब तक दुनिया भर में 40 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द होने की खबरें सामने आ चुकी हैं।
कई एयरलाइंस अपने कुछ विमानों को अस्थायी रूप से ग्राउंड करने पर भी विचार कर रही हैं ताकि बढ़ती लागत को नियंत्रित किया जा सके।


टिकट की कीमत कैसे तय होती है
किसी भी हवाई टिकट की कीमत कई हिस्सों से मिलकर बनती है। इसमें सबसे पहला हिस्सा बेस फेयर होता है, जो एयरलाइन की मुख्य सेवा फीस होती है।
इसके बाद फ्यूल सरचार्ज जोड़ा जाता है, जो तेल की कीमतों के आधार पर बढ़ या घट सकता है।
इसके अलावा एयरपोर्ट टैक्स भी टिकट में शामिल होता है, जो रनवे और टर्मिनल के उपयोग के लिए लिया जाता है।
एक और शुल्क यूजर डेवलपमेंट फीस के रूप में लिया जाता है, जो एयरपोर्ट के विकास और रखरखाव के लिए होता है।


आगे और महंगी हो सकती हैं उड़ानें
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहती हैं, तो आने वाले महीनों में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है।


एयरलाइंस फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर किराए में फिर बदलाव कर सकती हैं।
यात्रियों के लिए यह समय थोड़ी चुनौती भरा हो सकता है, क्योंकि बढ़ती लागत का असर सीधे टिकट की कीमतों पर पड़ रहा है।