दुनिया में लगातार बदल रहे भू-राजनीतिक हालात और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने की योजना बनाई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में घोषणा की कि सरकार ₹1 लाख करोड़ का इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड (Economic Stabilisation Fund) बनाने का प्रस्ताव लेकर आई है। इस फंड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा वैश्विक संकट, युद्ध, आपूर्ति संकट या आर्थिक झटका सामने आता है तो सरकार के पास उससे निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश मौजूद हो।
लोकसभा में अनुदानों की दूसरी अनुपूरक मांगों (Supplementary Demands for Grants) पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह फंड सरकार को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगा। उनका कहना था कि दुनिया में कई ऐसी परिस्थितियां अचानक पैदा हो जाती हैं जिनका पहले से अनुमान लगाना मुश्किल होता है। ऐसे समय में सरकार के पास तुरंत कदम उठाने के लिए संसाधन होना जरूरी है।
क्यों जरूरी है इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड
वित्त मंत्री ने बताया कि यह फंड भविष्य में आने वाले आर्थिक झटकों को संभालने के लिए एक तरह का सुरक्षा तंत्र होगा। उदाहरण के तौर पर उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का जिक्र किया, जिसने ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर असर डाला है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के संकट अचानक पैदा होते हैं और इनके कारण आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो सकती हैं। कई बार किसी विशेष उद्योग या क्षेत्र को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में अगर सरकार के पास अलग से तैयार फंड होगा तो वह तेजी से कदम उठा सकेगी और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि यह फंड केवल मौजूदा संकट के लिए नहीं बल्कि भविष्य में आने वाले किसी भी अप्रत्याशित आर्थिक झटके से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।

अनुपूरक अनुदानों के जरिए अतिरिक्त खर्च का प्रस्ताव
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए दूसरी बार अनुपूरक अनुदान की मांग पेश की है। इसके तहत लोकसभा से ₹2.81 लाख करोड़ के अतिरिक्त सकल खर्च की मंजूरी मांगी गई है।
हालांकि सरकार को इस दौरान लगभग ₹80,000 करोड़ की अतिरिक्त आय मिलने का अनुमान है। इसलिए कुल मिलाकर सरकार का अतिरिक्त नकद खर्च करीब ₹2.01 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
इन अनुपूरक मांगों में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है, जिसमें रक्षा, उर्वरक सब्सिडी और खाद्य सुरक्षा योजनाएं शामिल हैं।
वित्तीय घाटे पर नहीं पड़ेगा असर
विपक्ष की ओर से लगातार खर्च बढ़ने को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन अतिरिक्त खर्चों से वित्तीय घाटे के लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 4.4 प्रतिशत तक रखने का लक्ष्य तय किया है। संशोधित अनुमान में भी यही लक्ष्य बरकरार रखा गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार अपने बजट में किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाएगा।
बजट खर्च और सरकारी आंकड़े
सरकार ने संशोधित अनुमानों में कुल खर्च को थोड़ा कम किया है। पहले बजट अनुमान में यह खर्च ₹50.65 लाख करोड़ रखा गया था, जिसे घटाकर अब ₹49.65 लाख करोड़ कर दिया गया है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अंतर्गत आने वाले कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) के आंकड़ों के अनुसार जनवरी तक केंद्र सरकार ₹36.90 लाख करोड़ खर्च कर चुकी थी।
सरकार का कहना है कि खर्च में यह बदलाव वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए किया गया है।
किन क्षेत्रों को मिलेगी अतिरिक्त राशि
अनुपूरक अनुदान में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड के लिए रखा गया है।
इसके अलावा रक्षा मंत्रालय के लिए ₹41,822 करोड़ अतिरिक्त देने का प्रस्ताव है। उर्वरक सब्सिडी के लिए ₹19,230 करोड़ और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत खाद्य सब्सिडी के लिए ₹23,641 करोड़ की अतिरिक्त राशि मांगी गई है।
सरकार का कहना है कि इन खर्चों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना, किसानों को राहत देना और गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
किसानों के लिए उर्वरक की कमी नहीं होगी
वित्त मंत्री ने संसद में यह भी भरोसा दिलाया कि किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उर्वरक सब्सिडी में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि की गई है ताकि किसानों को उचित कीमत पर खाद उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त बजट प्रावधान कर रही है और देश में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
नई ग्रामीण योजना के लिए भी बड़ा बजट
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक नई योजना VB-G RAM G के तहत भी बड़ा बजट देने की घोषणा की है। इस योजना के लिए अप्रैल 2026 से ₹95,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
विपक्ष ने मनरेगा के लिए कम बजट का आरोप लगाया था, लेकिन वित्त मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
अनुपूरक अनुदान क्या होता है
वित्त मंत्री ने यह भी समझाया कि अनुपूरक अनुदान का उद्देश्य सरकार को अतिरिक्त लचीलापन देना होता है। कई बार साल के बीच में ऐसी जरूरतें सामने आती हैं जिन्हें बजट बनाते समय पूरी तरह अनुमानित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बताया कि नियम के अनुसार एक वर्ष में तीन बार अनुपूरक अनुदान लाया जा सकता है, लेकिन सरकार ने खुद को दो बार तक ही सीमित रखने का निर्णय लिया है। यह वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम है।
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए है ताकि जरूरी विभागों और राज्यों को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन मिल सकें।
वैश्विक संकट का भारत पर असर
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि दुनिया में तेजी से बदलते हालात भारत की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जैसे कारक कई बार अचानक आर्थिक दबाव पैदा कर देते हैं।
उदाहरण के तौर पर हाल ही में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं। इससे उर्वरक और ऊर्जा जैसी चीजों की कीमतों पर दबाव पड़ा है।
सरकार का मानना है कि अगर भविष्य में ऐसे हालात और गंभीर हो जाते हैं तो इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड सरकार को तुरंत कदम उठाने में मदद करेगा।
निष्कर्ष:
भारत सरकार का ₹1 लाख करोड़ का इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड बनाने का प्रस्ताव मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फंड सरकार को भविष्य के संकटों के दौरान आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त ताकत देगा।
साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त खर्च के बावजूद वित्तीय घाटे के लक्ष्य को नहीं बदला जाएगा और वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाएगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह फंड किस तरह काम करेगा और भविष्य में आने वाले आर्थिक झटकों के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती दे पाएगा।

