चुनाव से ठीक पहले ED की बड़ी कार्रवाई: I-PAC डायरेक्टर की गिरफ्तारी से उठे सवाल, जानिए क्या है मामला?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। चुनाव से लगभग 10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है। जैसे ही यह खबर सामने आई, राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पर कड़ा विरोध जताया।


गिरफ्तारी का समय और राजनीतिक माहौल
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे संवेदनशील समय में केंद्रीय एजेंसी की इस कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
I-PAC, यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी, एक जानी-मानी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है, जो कई पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती रही है। पश्चिम बंगाल में यह कंपनी लंबे समय से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC के साथ काम कर रही है।
इसी वजह से विनेश चंदेल की गिरफ्तारी को सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।


TMC का आरोप: एजेंसियों का दुरुपयोग
TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई निष्पक्ष चुनाव की भावना को कमजोर करती है। उनका आरोप है कि ED, CBI और NIA जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल डर का माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी दबाव में आने वाली नहीं है और जनता के सामने पूरी ताकत से खड़ी रहेगी। TMC का साफ कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक फायदे के लिए की जा रही है।


ED का पक्ष: मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाला
वहीं, ED का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई है। एजेंसी के मुताबिक, यह मामला 2020 में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसमें पश्चिम बंगाल में कोयला चोरी और तस्करी का आरोप लगाया गया था।
यह FIR CBI ने दर्ज की थी, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। आरोप है कि इस घोटाले के जरिए हजारों करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ और इसमें हवाला के जरिए कुछ रकम I-PAC तक भी पहुंची।
बताया जा रहा है कि करीब 2,742 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए ट्रांसफर किए गए, जिनका लिंक I-PAC से जोड़ा जा रहा है।

Before elections I-PAC director arrest

पहले भी हो चुकी है छापेमारी
यह पहली बार नहीं है जब I-PAC जांच एजेंसियों के रडार पर आया है। इससे पहले जनवरी 2026 में ED ने कंपनी के एक अन्य डायरेक्टर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर और ऑफिस पर छापा मारा था।
इस छापेमारी के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं। उन्होंने एजेंसी पर आरोप लगाया था कि वह जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप कर रही है और राजनीतिक कारणों से कार्रवाई कर रही है।
उस दौरान यह भी आरोप लगे थे कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज मौके से हटाए गए, जिस पर ED ने आपत्ति जताई थी और इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई।


छापेमारी के दौरान क्या हुआ था?
जनवरी में हुई कार्रवाई के दौरान ED की टीम सुबह-सुबह कोलकाता में I-PAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पहुंची थी। जांच के दौरान डिजिटल और कागजी दस्तावेजों की जांच की जा रही थी।
कुछ ही घंटों में यह मामला चर्चा का विषय बन गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंचीं। वे कुछ समय तक अंदर रहीं और बाद में एक फाइल लेकर बाहर निकलीं। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं।
ED का आरोप है कि इस दौरान जांच में बाधा डाली गई और कुछ जरूरी दस्तावेज हटा दिए गए। वहीं, TMC का कहना है कि यह कार्रवाई चुनावी रणनीति से जुड़े गोपनीय दस्तावेज हासिल करने के लिए की गई थी।


विनेश चंदेल की भूमिका क्या है?
विनेश चंदेल I-PAC के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उन्होंने इस कंपनी की स्थापना प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर की थी। I-PAC ने देश के कई राज्यों में अलग-अलग पार्टियों के लिए चुनावी अभियान संभाले हैं।
राजनीतिक रणनीति बनाने, डेटा विश्लेषण और ग्राउंड कैंपेन चलाने में I-PAC की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में इसके किसी बड़े अधिकारी की गिरफ्तारी चुनाव से पहले बड़ा असर डाल सकती है।
अन्य जगहों पर भी कार्रवाई
ED ने सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि बेंगलुरु और मुंबई में भी कई जगहों पर छापेमारी की थी। बेंगलुरु में I-PAC के को-फाउंडर ऋषिराज सिंह और मुंबई में आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नायर के ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई थी।
इससे साफ है कि जांच एजेंसी इस मामले को कई स्तरों पर जोड़कर देख रही है।
राजनीतिक असर और सवाल
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर राजनीतिक माहौल पर पड़ा है। चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई से विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
एक तरफ ED इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी तरफ TMC इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कह रही है।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस तरह की कार्रवाई चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है? क्या इससे मतदाताओं के मन पर असर पड़ेगा?


आगे क्या होगा?
विनेश चंदेल को फिलहाल ED की कस्टडी में रखा गया है और उनसे पूछताछ जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर भी सबकी नजर है, जहां ED और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।