NEET-UG री-टेस्ट पर सरकार का बड़ा एक्शन: अब सवालों की सुरक्षा संभाल सकती है वायुसेना

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर चर्चा में है। पेपर लीक विवाद के बाद अब केंद्र सरकार 21 जून को होने वाले री-टेस्ट को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में जुट गई है। इस बार सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि परीक्षा प्रक्रिया में पहली बार सेना और वायुसेना की मदद लेने की तैयारी की जा रही है।

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक हाईलेवल बैठक हुई। इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में पेपर की सुरक्षा से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक हर पहलू पर चर्चा हुई।

सरकार का मानना है कि पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है। इसलिए इस बार “जीरो ट्रस्ट, ऑलवेज इंस्पेक्ट” नीति के तहत परीक्षा कराई जाएगी। मतलब परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण पर कई स्तर की निगरानी होगी और किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

 

अब वायुसेना पहुंचाएगी प्रश्नपत्र

बैठक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा कि री-टेस्ट के प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने में भारतीय वायुसेना मदद करेगी। पहले यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से डाक विभाग और स्थानीय प्रशासन के पास होती थी। लेकिन मई में हुए पेपर लीक के बाद सरकार ने व्यवस्था बदलने का फैसला लिया है।

सरकार को डर है कि जून में बारिश और खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग से पेपर ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में एयरफोर्स के जरिए प्रश्नपत्रों को अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक अब प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से सीधे एयरबेस तक पहुंचाए जाएंगे। वहां से वायुसेना के विमान उन्हें अलग-अलग राज्यों में ले जाएंगे। इसके बाद जिला प्रशासन और पुलिस की निगरानी में उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।

Air Force handle security of question papers NEET-UG re-test

मोदी खुद रख रहे तैयारी पर नजर

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परीक्षा से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई जा रही है। सरकार नहीं चाहती कि री-टेस्ट में किसी तरह की गड़बड़ी हो, क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा है।

माना जा रहा है कि इस बार केंद्र सरकार परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बेहद सख्त रवैया अपनाने वाली है। हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा रही है और कई नई सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

 

आखिर सेना की जरूरत क्यों पड़ी?

NEET परीक्षा ऑफलाइन यानी पेन-पेपर मोड में होती है। यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है। JEE जैसी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित होती हैं, इसलिए उनमें पेपर लीक का खतरा कम रहता है। लेकिन NEET में प्रश्नपत्र छपाई से लेकर केंद्र तक पहुंचने तक कई लोगों के हाथों से गुजरता है। यही वह हिस्सा है जहां सबसे ज्यादा खतरा पैदा होता है।

CBI जांच में सामने आया कि 3 मई को हुई परीक्षा का पेपर प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लीक हुआ हो सकता है। जांच एजेंसियां अभी इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानव हस्तक्षेप ज्यादा रहेगा, तब तक लीक का खतरा बना रहेगा। इसलिए सरकार अब रक्षा बलों जैसी विश्वसनीय एजेंसियों की मदद लेना चाहती है।

 

कैसे होता है पेपर तैयार और ट्रांसपोर्ट?

NEET का प्रश्नपत्र एक बेहद गोपनीय प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञों का एक गुप्त पैनल बनाया जाता है। पेपर तैयार होने के बाद उसे चुनिंदा प्रिंटिंग प्रेस में भेजा जाता है।

इन प्रेस का चयन सुरक्षा जांच और ऑडिट के बाद किया जाता है। वहां CCTV निगरानी रहती है और फुटेज लंबे समय तक सुरक्षित रखी जाती है।

प्रिंटिंग के दौरान बहुत सीमित लोगों को अंदर जाने की अनुमति होती है। यहां तक कि NTA अधिकारी भी मोबाइल फोन लेकर अंदर नहीं जा सकते।

पेपर छपने के बाद उन्हें बैंक वॉल्ट में रखा जाता है और फिर GPS से लैस वाहनों के जरिए परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस की निगरानी रहती है।

फिर भी इस बार पेपर लीक हो गया, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।

 

NTA पर उठ रहे सवाल

NEET विवाद के बाद सबसे ज्यादा सवाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA पर उठ रहे हैं। यह एजेंसी देश की कई बड़ी परीक्षाएं आयोजित करती है। लेकिन जांच में सामने आया कि एजेंसी का बड़ा हिस्सा आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भर है।

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार NTA में सिर्फ 22 कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्स स्टाफ काम करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में बाहरी कर्मचारियों पर ज्यादा निर्भरता सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। यही वजह है कि सरकार अब नई सुरक्षा रणनीति तैयार कर रही है।

 

छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा

पेपर लीक विवाद ने देशभर के छात्रों और उनके परिवारों को परेशान कर दिया है। लाखों छात्रों ने सालों मेहनत की थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें दोबारा तैयारी करनी पड़ रही है।

इसी बीच राजस्थान के छात्र प्रदीप मेघवाल की आत्महत्या का मामला भी सामने आया। बताया गया कि प्रश्न बैंक लीक की खबरों से वह काफी तनाव में था।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदीप के परिवार से मुलाकात की और केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि खराब और भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था का नतीजा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि परीक्षा प्रणाली को माफियाओं के हवाले कर दिया गया है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।

 

CBI जांच में क्या मिला?

CBI इस पूरे मामले की जांच कर रही है। एजेंसी अब तक देशभर में 49 जगहों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और दस्तावेज जब्त किए गए हैं। अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस शाह को 1 जून तक CBI हिरासत में भेज दिया है। वहीं कुछ अन्य आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क के जरिए किया गया। इसमें अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल हो सकते हैं।

 

23 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर

3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा में लगभग 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर हुई थी। NTA को 7 मई की शाम गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद जांच शुरू हुई और 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब 21 जून को री-टेस्ट कराया जाएगा।

सरकार की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि छात्रों का भरोसा दोबारा कैसे जीता जाए। क्योंकि अगर इस बार भी कोई गड़बड़ी हुई, तो परीक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और कमजोर हो सकता है।

 

क्या सेना को शामिल करना सही फैसला है?

सेना और वायुसेना को परीक्षा प्रक्रिया में शामिल करने के फैसले पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह आम प्रशासनिक व्यवस्था की असफलता दिखाता है।

रिटायर्ड मेजर जनरल राजू चौहान ने सवाल उठाया कि क्या देश की बाकी एजेंसियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं, जो अब सेना को परीक्षा पेपर पहुंचाने पड़ रहे हैं।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सेना से जुड़ा भरोसा ही सरकार की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए सरकार इस भरोसे का इस्तेमाल करके छात्रों को विश्वास दिलाना चाहती है कि इस बार परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित होगी।

 

आगे क्या?

21 जून का री-टेस्ट सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि सरकार और NTA दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इस परीक्षा से यह तय होगा कि देश की परीक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा वापस लौटता है या नहीं।

सरकार अब तकनीक, निगरानी और सुरक्षा के नए मॉडल पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त हो सकती है।

फिलहाल देशभर के लाखों छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार उनकी मेहनत पर किसी तरह का दाग नहीं लगेगा।