मिडिल ईस्ट तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत – क्या बनेगा नंबर 1, क्यों बढ़ा भारत की ग्रोथ का अनुमान?

दुनिया में जहां एक तरफ आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है और कई बड़े देशों की विकास दर धीमी पड़ती दिख रही है, वहीं भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। International Monetary Fund (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना ताजा अनुमान जारी किया है, जिसमें देश की ग्रोथ रेट को पहले से ज्यादा मजबूत बताया गया है।

IMF के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करेगी। संस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। इससे पहले जनवरी में जारी रिपोर्ट में इसे 6.4% बताया गया था।

 

क्यों बढ़ा भारत की ग्रोथ का अनुमान?

IMF ने अपने नए आंकड़ों में भारत की विकास दर में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए गए हैं।

पहला कारण है साल 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन। देश में मांग, निवेश और उत्पादन गतिविधियों में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जिससे आर्थिक आधार मजबूत हुआ।

दूसरा बड़ा कारण है अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ में भारी कमी। पहले जहां यह शुल्क करीब 50% तक था, उसे घटाकर 10% कर दिया गया है। इससे भारतीय निर्यात को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

IMF का मानना है कि ये दोनों सकारात्मक कारक मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव से होने वाले नुकसान की भरपाई कर देंगे।

 

भारत सरकार और IMF के अनुमान में अंतर

हालांकि IMF ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है, लेकिन भारत सरकार का अनुमान इससे भी ज्यादा आशावादी है। सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 7.6% की दर से बढ़ सकती है।

इसका मतलब है कि सरकार का अनुमान IMF के पहले के आंकड़ों से लगभग 1% ज्यादा है। यह अंतर बताता है कि अलग-अलग संस्थाएं अलग-अलग मानकों के आधार पर अनुमान लगाती हैं।

फिर भी एक बात साफ है – भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में बना हुआ है।

India economy remains strong despite Middle East tensions

2027 तक स्थिर रह सकती है ग्रोथ

IMF का यह भी कहना है कि भारत की विकास दर 2027 तक लगभग 6.5% के आसपास स्थिर रह सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी रह सकती है, भले ही दुनिया में आर्थिक उतार-चढ़ाव जारी रहें।

 

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत आगे

अगर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना करें, तो भारत सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाले देशों में शामिल है।

  • अमेरिका: 2.3%
  • चीन: 4.4%
  • जर्मनी: 0.8%
  • जापान: 0.7%
  • ब्रिटेन: 0.8%
  • फ्रांस: 0.9%
  • इटली: 0.5%
  • रूस: 1.1%
  • कनाडा: 1.5%
  • भारत: 6.5%

इन आंकड़ों से साफ है कि भारत की विकास दर अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी ज्यादा है।

 

महंगाई को लेकर चेतावनी

जहां एक तरफ ग्रोथ के आंकड़े उत्साहजनक हैं, वहीं IMF ने महंगाई को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में महंगाई दर करीब 2.1% रहने की उम्मीद है। लेकिन इसके बाद इसमें तेज बढ़ोतरी हो सकती है और 2026-27 में यह बढ़कर 4.7% तक पहुंच सकती है।

हालांकि राहत की बात यह है कि 2027-28 तक महंगाई फिर से Reserve Bank of India (RBI) के लक्ष्य यानी 4% के आसपास आ सकती है।

 

महंगाई बढ़ने की वजह क्या है?

महंगाई में संभावित बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। 2025 के दौरान खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी से महंगाई कम रही थी, लेकिन आगे चलकर कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है।

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में बाधाएं भी महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर IMF की नजर

IMF ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर भी अपने अनुमान जारी किए हैं। संस्था का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।

IMF ने ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3.3% से घटाकर 3.1% कर दिया है। इससे पहले 2025 में दुनिया की अर्थव्यवस्था करीब 3.4% की दर से बढ़ी थी। इसका मतलब है कि अब वैश्विक स्तर पर सुस्ती के संकेत दिख रहे हैं।

 

किन देशों पर ज्यादा असर पड़ेगा?

IMF के अनुसार, आर्थिक सुस्ती का असर अलग-अलग देशों पर अलग तरीके से पड़ेगा।

यूरोप इस सुस्ती से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है। यूरो क्षेत्र की विकास दर में गिरावट आने की संभावना है। ब्रिटेन के लिए भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। वहां की ग्रोथ में 0.5% तक की कटौती की गई है।

वहीं अमेरिका और चीन जैसे बड़े देश इस मंदी से काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं। इनके ग्रोथ अनुमान में बहुत कम बदलाव किया गया है।

 

अमेरिका के टैरिफ में कटौती का भारत को फायदा

अमेरिका द्वारा टैरिफ कम करने का सीधा फायदा भारत को मिल सकता है।

जब किसी देश के उत्पादों पर टैक्स कम होता है, तो वे वहां सस्ते हो जाते हैं। इससे उस देश के निर्यातकों को ज्यादा ऑर्डर मिलने लगते हैं।

भारत के मामले में कपड़ा, आभूषण, आईटी सेवाएं और अन्य उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इससे भारत की कमाई बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

 

भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण

भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत रहने के पीछे कई कारण हैं:

  • घरेलू मांग में बढ़ोतरी
  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का जोर
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार
  • निर्यात में सुधार
  • निवेश में बढ़ोतरी

इन सभी कारकों ने मिलकर भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है।

 

क्या हैं आगे की चुनौतियां?

हालांकि तस्वीर काफी सकारात्मक दिख रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने हैं:

  • महंगाई में संभावित बढ़ोतरी
  • वैश्विक बाजार में अनिश्चितता
  • कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
  • भू-राजनीतिक तनाव

अगर इन चुनौतियों को सही तरीके से संभाला गया, तो भारत अपनी विकास दर को बनाए रख सकता है।

 

निष्कर्ष:

IMF की ताजा रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने की क्षमता रखती है।

जहां दुनिया के कई बड़े देश धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भारत एक स्थिर और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।