राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश : पाकिस्तान को बताया अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र, बोले ‘ऑपरेशन सिंदूर हमने खुद रोका’

नई दिल्ली में 30 अप्रैल 2026 को आयोजित नेशनल सिक्योरिटी समिट में देश की सुरक्षा नीति और बदलते वैश्विक माहौल को लेकर कई अहम बातें सामने आईं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि अब भारत आतंकवादी हमलों के जवाब में सिर्फ बयान देने वाला देश नहीं रहा। उन्होंने बताया कि सरकार ने अपने इरादों को जमीन पर उतारकर दिखाया है और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

रक्षा मंत्री के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस नई सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अब अपने हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने में सक्षम है।

 

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद केवल एक सुरक्षा चुनौती नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ एक बड़ी समस्या है। उन्होंने इसे एक गलत सोच का नतीजा बताया, जो समाज को नुकसान पहुंचाती है।

उनके मुताबिक, आतंकवाद को किसी धर्म या विचारधारा से जोड़ना खतरनाक है। ऐसा करने से आतंकियों को छिपने का मौका मिल जाता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद कई स्तरों पर काम करता है – इसमें ऑपरेशन, विचारधारा और राजनीति सब शामिल होते हैं। इसलिए इसे खत्म करने के लिए हर स्तर पर कार्रवाई जरूरी है।

 

भारत और पाकिस्तान पर टिप्पणी

अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान पर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने एक ही समय आजादी हासिल की थी, लेकिन आज दोनों देशों की पहचान अलग-अलग है। भारत को दुनिया में ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को ‘इंटरनेशनल टेररिज्म’ का केंद्र माना जाता है।

यह बयान भारत की उस नीति को दिखाता है, जिसमें आतंकवाद को लेकर किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा रही है।

 

ऑपरेशन सिंदूर: सेना की एकजुट ताकत

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की एकजुटता का शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस मिशन में सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर काम किया।

उन्होंने बताया कि अब भारत की सेना अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ मिलकर काम करने वाली ताकत बन चुकी है। इससे देश की सैन्य क्षमता और भी मजबूत हुई है।

Rajnath Singh Calls Pakistan a hub of international terrorism

भारत ने अपने तरीके से किया ऑपरेशन

राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत ने अपने समय और अपनी शर्तों पर किया। उन्होंने साफ किया कि इस दौरान सिर्फ उन्हीं लोगों को निशाना बनाया गया, जो हमले में शामिल थे।

उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका गया कि भारत की ताकत कम हो गई थी, बल्कि इसे पूरी तरह अपनी योजना के अनुसार खत्म किया गया। जरूरत पड़ती तो भारत लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए तैयार था।

 

युद्ध की तैयारी और क्षमता

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के पास ऐसी क्षमता है कि वह अचानक आई किसी भी चुनौती का सामना कर सके। देश के पास जरूरी संसाधन और तकनीक मौजूद है, जिससे जरूरत के समय तेजी से ताकत बढ़ाई जा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत का रक्षा उद्योग शांति के समय ही नहीं, बल्कि युद्ध के दौरान भी तेजी से जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

 

परमाणु धमकी से नहीं डरा भारत

राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने किसी भी तरह की धमकी, यहां तक कि परमाणु हमले की चेतावनी को भी नजरअंदाज किया और अपने लक्ष्य हासिल किए।

उन्होंने इसे ‘नया भारत’ बताया, जो आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों में कोई फर्क नहीं करता।

 

डिटरेंस यानी रोकथाम की नई नीति

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह एक मजबूत संदेश भी था। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन भले ही 72 घंटे में खत्म हो गया, लेकिन इसकी तैयारी लंबे समय से चल रही थी।

भारत की तेजी से संसाधन जुटाने की क्षमता, हथियारों का भंडार और स्वदेशी तकनीक पर भरोसा – ये सभी चीजें मिलकर देश की सुरक्षा नीति को मजबूत बनाती हैं।

 

रक्षा निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी

राजनाथ सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया में भारत के हथियारों और रक्षा उपकरणों पर भरोसा बढ़ा है। कई देशों ने भारत से रक्षा सामग्री खरीदने में रुचि दिखाई है।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 62.66% ज्यादा है। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

 

यूरोप के साथ बढ़ता सहयोग

रक्षा मंत्री ने अपने जर्मनी दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि यूरोप की कई बड़ी कंपनियां भारत के निजी और सरकारी रक्षा क्षेत्र के साथ काम करना चाहती हैं। यह भारत की बढ़ती ताकत और भरोसे को दर्शाता है।

 

आधुनिक युद्ध में AI की भूमिका

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के समय में युद्ध सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रह गया है। अब साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और सूचना तकनीक भी इसका हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस बदलाव के केंद्र में है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों और निगरानी सिस्टम में AI का इस्तेमाल किया गया, जिससे हमलों की सटीकता बढ़ी।

AI की मदद से खतरे को पहले ही पहचानकर उसे खत्म किया जा सकता है।

 

AI से सेना को नई ताकत

रक्षा मंत्री ने कहा कि AI सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि सैनिकों की ताकत बढ़ाने का जरिया भी है। उन्होंने इसे ‘Augmented Infantry’ बताया, जो सैनिकों की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।

उन्होंने बताया कि सेना में नई तरह की यूनिट्स बनाई जा रही हैं, जैसे ‘रुद्र ब्रिगेड’, ‘भैरव बटालियन’, ‘शक्तिबाण रेजिमेंट’ और ‘दिव्यास्त्र बैटरी’। ये यूनिट्स आधुनिक खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम होंगी।

 

सैनिकों के जीवन में भी AI का उपयोग

AI का इस्तेमाल सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग सैनिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए भी किया जा रहा है।

SPARSH पोर्टल के जरिए पेंशन से जुड़े काम आसान किए गए हैं। AI आधारित सिस्टम शिकायतों को हल करने और मेडिकल रिकॉर्ड संभालने में भी मदद कर रहे हैं।

इसके अलावा, सैनिकों के परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी AI का उपयोग किया जा रहा है।

 

AI के फायदे और खतरे दोनों

हालांकि रक्षा मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि AI के साथ कुछ खतरे भी जुड़े हैं। डीपफेक, साइबर हमले और स्वचालित हथियार जैसी चीजें नई चुनौतियां बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर AI का सही इस्तेमाल नहीं किया गया, तो यह सुरक्षा के बजाय खतरा भी बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि इसे सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए।

 

AI में भारत की बड़ी योजना

भारत सरकार AI के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम कर रही है। ‘IndiaAI’ मिशन के तहत देशभर में तकनीकी संसाधनों को बढ़ाया जा रहा है।

10,000 से ज्यादा GPU क्षमता, FutureSkills प्रोग्राम और AI लैब्स जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि छोटे शहरों के युवा भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

हाल ही में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कई देशों ने भारत की AI नीति का समर्थन किया। इससे साफ है कि भारत अब इस क्षेत्र में भी नेतृत्व कर रहा है।

 

आगे का रास्ता

राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले समय में AI, साइबर और नई तकनीकें भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा होंगी। सरकार इन क्षेत्रों में लगातार निवेश कर रही है।

उन्होंने भरोसा जताया कि नई तकनीकों की मदद से भारत न सिर्फ सुरक्षित होगा, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बनेगा।