अमेरिकी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है, और वजह हैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। हाल ही में व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि वे 8-9 साल बाद पद छोड़ेंगे। पहले तो वहां मौजूद लोग इसे मजाक समझकर हंस पड़े, लेकिन ट्रम्प ने साफ किया कि वे गंभीर हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रम्प पहले भी कई बार तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि, अमेरिका के संविधान में फिलहाल ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी व्यक्ति को दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति बनने की अनुमति देता हो।
ट्रम्प का बयान और उसका मतलब
कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें काम करना पसंद है और अभी उनके कार्यकाल की शुरुआत ही हुई है। उन्होंने यह भी इशारा दिया कि उनके पास अभी बहुत काम बाकी है।
दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अपनी उम्र को लेकर भी मजाक किया। अगले महीने 80 साल के होने जा रहे ट्रम्प ने कहा कि वे खुद को बुजुर्ग नहीं मानते, बल्कि उन्हें आज भी वैसा ही महसूस होता है जैसा कई साल पहले होता था।
यह बयान सिर्फ एक हल्की-फुल्की टिप्पणी नहीं था, बल्कि इसमें एक राजनीतिक संदेश भी छिपा था – कि ट्रम्प खुद को अभी भी सक्रिय और सक्षम मानते हैं।
पहले भी दे चुके हैं संकेत
यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने तीसरे कार्यकाल की बात की हो। पिछले कुछ समय में वे अलग-अलग मौकों पर इस विषय पर अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं।
- नवंबर 2024 में उन्होंने कहा था कि वे शायद फिर चुनाव न लड़ें, लेकिन अगर लोग चाहेंगे तो वे इस पर विचार कर सकते हैं।
- मार्च 2025 में उन्होंने कहा कि बहुत से लोग चाहते हैं कि वे तीसरी बार राष्ट्रपति बनें और इसके रास्ते मौजूद हैं।
- अप्रैल 2025 में उन्होंने दावा किया कि जनता उन्हें तीसरी बार देखने के लिए उत्साहित है।
- अक्टूबर 2025 में उन्होंने यह भी कहा कि कानून की वजह से वे तीसरी बार नहीं बन सकते, जिससे उनकी निराशा झलकती है।
इन बयानों से यह साफ होता है कि ट्रम्प इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे।
तीसरे कार्यकाल के लिए कोशिश भी हुई
ट्रम्प के समर्थकों ने इस दिशा में कदम भी उठाए थे। जनवरी 2025 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसका मकसद संविधान में बदलाव करके ट्रम्प के लिए तीसरी बार चुनाव लड़ने का रास्ता खोलना था।
इस प्रस्ताव में सुझाव दिया गया था कि जो व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति नहीं रहा है, वह तीसरी बार चुनाव लड़ सके। चूंकि ट्रम्प 2020 का चुनाव हार चुके थे, इसलिए इस बदलाव के बाद वे फिर से उम्मीदवार बन सकते थे।
लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका और वोटिंग तक भी नहीं पहुंच पाया।

संविधान बदलना क्यों है मुश्किल?
अमेरिका में संविधान में बदलाव करना आसान नहीं है। इसके लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
सबसे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट – दोनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास होना जरूरी है। इसके बाद कम से कम 50 में से 38 राज्यों की मंजूरी भी लेनी होती है।
मौजूदा राजनीतिक स्थिति में यह बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है और कई राज्यों में विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी की सरकार है।
दो कार्यकाल की सीमा कैसे बनी?
अमेरिका में शुरू में राष्ट्रपति के लिए दो कार्यकाल की कोई कानूनी सीमा नहीं थी। यह परंपरा पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन से शुरू हुई, जिन्होंने दो कार्यकाल के बाद पद छोड़ दिया।
इसके बाद यह एक अनौपचारिक नियम बन गया, जिसका पालन कई सालों तक होता रहा।
लेकिन यह परंपरा फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के समय टूटी। उन्होंने 1933 से 1945 तक चार बार राष्ट्रपति पद संभाला। उनके लंबे कार्यकाल के बाद 1951 में संविधान में 22वां संशोधन किया गया, जिसमें यह तय किया गया कि कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता।
रूजवेल्ट का उदाहरण क्यों खास है?
रूजवेल्ट का समय असाधारण था। उस दौर में दुनिया दूसरे विश्व युद्ध से गुजर रही थी। ऐसे हालात में अमेरिका की जनता और डेमोक्रेटिक पार्टी ने स्थिरता बनाए रखने के लिए उन्हें बार-बार चुना।
हालांकि, वे अपना चौथा कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और 1945 में उनका निधन हो गया।
इसी अनुभव के बाद अमेरिका ने राष्ट्रपति पद के लिए समय सीमा तय करने का फैसला लिया।
अधिकतम 10 साल का नियम
अमेरिकी व्यवस्था में एक और खास नियम है। अगर कोई व्यक्ति बीच में राष्ट्रपति बनता है – जैसे कि किसी राष्ट्रपति की मृत्यु या इस्तीफे के बाद – तो वह दो बार चुनाव जीतकर कुल मिलाकर अधिकतम 10 साल तक पद पर रह सकता है।
लेकिन सीधे चुनाव जीतकर कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता।
क्या ट्रम्प कोई दूसरा रास्ता अपना सकते हैं?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रम्प तीसरी बार सीधे राष्ट्रपति नहीं बन पाते, तो वे दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं।
एक संभावना यह बताई जाती है कि वे उपराष्ट्रपति बन सकते हैं और किसी करीबी नेता को राष्ट्रपति बना सकते हैं। इस तरह वे परोक्ष रूप से सत्ता में प्रभाव बनाए रख सकते हैं।
दूसरी संभावना यह भी है कि वे अपने परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाएं और खुद पीछे से भूमिका निभाएं।
रूस का उदाहरण
इस तरह की रणनीति का उदाहरण रूस में देखा जा चुका है। वहां व्लादिमीर पुतिन दो कार्यकाल के बाद सीधे तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे।
ऐसे में उन्होंने अपने करीबी दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बनाया और खुद प्रधानमंत्री बने रहे। बाद में वे फिर से राष्ट्रपति पद पर लौट आए।
हालांकि, अमेरिका की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था रूस से काफी अलग है, इसलिए वहां ऐसा करना आसान नहीं माना जाता।
मौजूदा राजनीतिक गणित
अगर आंकड़ों की बात करें, तो ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 100 में से 52 सीटें हैं, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं।
यह संख्या संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से काफी कम है। ऐसे में फिलहाल संविधान बदलना लगभग असंभव नजर आता है।
बड़ा सवाल: क्या यह सिर्फ बयान है या रणनीति?
ट्रम्प के हालिया बयान को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे एक राजनीतिक रणनीति मानते हैं, जिससे वे अपने समर्थकों को सक्रिय रखना चाहते हैं।
वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह उनके लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने का संकेत है।
यह भी संभव है कि वे सीधे तीसरे कार्यकाल की बजाय किसी और तरीके से अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करें।
निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रम्प का तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का विचार अमेरिकी राजनीति में एक दिलचस्प और जटिल मुद्दा बन चुका है।
एक तरफ उनका आत्मविश्वास और इच्छा दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ संविधान की सख्त सीमाएं भी हैं।
अभी की स्थिति में यह साफ है कि बिना संविधान में बदलाव के ट्रम्प तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। और संविधान बदलना इतना आसान नहीं है।
फिर भी, राजनीति में संभावनाएं हमेशा खुली रहती हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रम्प इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं और अमेरिकी राजनीति किस ओर जाती है।

