भारत में लग्जरी कार बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जगुआर लैंड रोवर (JLR) इंडिया ने अपनी सबसे महंगी और प्रीमियम SUV रेंज रोवर SV की कीमत में भारी कटौती की है। कंपनी ने इसकी कीमत करीब ₹75 लाख तक घटा दी है, जिसके बाद अब इसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹3.5 करोड़ रह गई है। पहले यही मॉडल ₹4.25 करोड़ में बिक रहा था।
इसके साथ ही रेंज रोवर स्पोर्ट SV एडिशन टू की कीमत में भी बड़ी कटौती की गई है। इसमें लगभग ₹40 लाख की कमी की गई है और अब यह SUV करीब ₹2.35 करोड़ में उपलब्ध होगी। यह नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
यह फैसला सिर्फ कंपनी का सामान्य प्राइस एडजस्टमेंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इस समझौते के लागू होने से पहले ही कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं और कीमतों को नए टैक्स ढांचे के हिसाब से एडजस्ट कर रही हैं।
भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का असर
भारत और ब्रिटेन के बीच 24 जुलाई 2025 को एक बड़ा आर्थिक और व्यापार समझौता हुआ था, जिसे व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) कहा जाता है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने और टैक्स कम करने पर सहमति बनी है।
इस डील का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ने वाला है। खासकर ब्रिटेन से भारत में पूरी तरह बनी हुई (CBU) लग्जरी गाड़ियों पर इंपोर्ट ड्यूटी में भारी कटौती की जाएगी।
पहले इन गाड़ियों पर करीब 110% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी, लेकिन नए समझौते के तहत इसे पहले साल में घटाकर 30% कर दिया जाएगा। आगे चलकर 5वें साल तक यह टैक्स घटकर सिर्फ 10% तक रह जाएगा।
यह नियम खास तौर पर बड़े इंजन वाली गाड़ियों पर लागू होगा, जैसे 3,000cc से ज्यादा पेट्रोल इंजन और 2,500cc से ज्यादा डीजल इंजन वाले मॉडल।
JLR की कीमतों में लगातार बदलाव
यह पहली बार नहीं है जब JLR ने भारत में अपनी कीमतों में कटौती की है। इससे पहले सितंबर 2025 में GST सुधारों के बाद भी कंपनी ने कीमतों में लगभग ₹30 लाख तक की कमी की थी। यानी एक साल के अंदर यह दूसरी बड़ी कीमत कटौती है।
कंपनी ने इस बार रेंज रोवर SV मॉडल में एक और बदलाव किया है। अब इसमें अल्ट्रा मैटेलिक पेंट फिनिश (ग्लॉस और सैटिन दोनों) स्टैंडर्ड फीचर के तौर पर दिया जाएगा। यह इसे और ज्यादा प्रीमियम बनाता है।
इसके अलावा बाजार से जुड़ी खबरों के अनुसार कंपनी जल्द ही रेंज रोवर स्पोर्ट का एक नया SV वेरिएंट भी लॉन्च कर सकती है, जिसकी कीमत लगभग ₹2.05 करोड़ के आसपास हो सकती है।

किन गाड़ियों पर असर नहीं पड़ेगा?
JLR ने यह भी साफ किया है कि सभी मॉडलों की कीमतों में बदलाव नहीं किया गया है।
भारत में जो गाड़ियां लोकल असेंबली के जरिए बनती हैं, जैसे रेंज रोवर इवोक, वेलार और स्टैंडर्ड रेंज रोवर, उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इसके अलावा डिफेंडर और डिस्कवरी मॉडल भी महंगे बने रहेंगे। इन गाड़ियों का निर्माण स्लोवाकिया और अन्य यूरोपीय देशों में होता है, इसलिए ये भारत-UK फ्री ट्रेड डील के दायरे में पूरी तरह शामिल नहीं हैं।
हालांकि कंपनी भारत में डिफेंडर की लोकल असेंबली शुरू करने पर विचार कर रही है, जिससे भविष्य में इसकी कीमतों पर असर पड़ सकता है।
पावर और परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं
कीमतों में कमी के बावजूद इन SUV की ताकत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
रेंज रोवर SV और रेंज रोवर स्पोर्ट SV दोनों में 4.4-लीटर का ट्विन-टर्बो V8 पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन बेहद पावरफुल माना जाता है।
रेंज रोवर SV करीब 540hp की पावर देता है, जबकि रेंज रोवर स्पोर्ट SV लगभग 635hp की पावर और 800Nm का टॉर्क जनरेट करता है। यह इसे दुनिया की सबसे तेज और लग्जरी SUV में शामिल करता है।
अन्य ब्रिटिश ब्रांड्स को भी फायदा
इस फ्री ट्रेड डील का फायदा सिर्फ JLR तक सीमित नहीं रहेगा। अन्य ब्रिटिश लग्जरी कार ब्रांड्स जैसे बेंटले, रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन और मैकलारेन को भी इसका फायदा मिलेगा।
हालांकि इस सुविधा के लिए एक सीमा तय की गई है। पहले साल में लगभग 20,000 गाड़ियों का कोटा रखा गया है, जिसे सभी ब्रिटिश ब्रांड्स को मिलकर शेयर करना होगा।
इसका मतलब यह है कि भारत में लग्जरी कारों की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
भारत-UK व्यापार समझौते का बड़ा लक्ष्य
भारत और ब्रिटेन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करना है।
इस समझौते के तहत लगभग 99% भारतीय सामान ब्रिटेन में बिना या कम टैक्स के बिक सकेंगे। इससे कपड़ा, चमड़ा, मछली, ज्वेलरी जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा।
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस डील से भारत का निर्यात लगभग 33 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
वहीं भारत ने अपने किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए कुछ क्षेत्रों जैसे डेयरी, अनाज, पोल्ट्री, फल और सब्जियों को इस समझौते से बाहर रखा है।
सर्विस सेक्टर और नौकरी के अवसर
इस समझौते का एक बड़ा फायदा भारत के प्रोफेशनल्स को भी मिलेगा। IT, एजुकेशन और अन्य सर्विस सेक्टर में भारतीय कंपनियों और लोगों को यूरोपीय बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे।
भारत के कई सर्विस सेक्टर अब ब्रिटेन और यूरोपीय देशों में काम कर सकेंगे, जिससे रोजगार और व्यापार दोनों में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन सेवाएं और नई तकनीकों को भी इस समझौते से बढ़ावा मिलेगा।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में लग्जरी कारों की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। जैसे-जैसे टैक्स कम होगा, वैसे-वैसे गाड़ियां और सस्ती हो सकती हैं।
हालांकि इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां अपनी कीमत नीति कैसे तय करती हैं।
निष्कर्ष:
JLR इंडिया द्वारा की गई यह कीमत कटौती भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ा संकेत है। यह साफ दिखाता है कि भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।
लग्जरी कारें अब पहले से थोड़ी सस्ती जरूर हो रही हैं, लेकिन असली बदलाव आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा जब पूरा टैक्स ढांचा लागू होगा।

