सुप्रीम कोर्ट में अब बढ़ेंगे जज, कैबिनेट ने दी 38 जजों की मंजूरी, जानें क्यों पड़ी इसकी जरूरत ?

भारत सरकार ने न्याय व्यवस्था को मजबूत और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026” को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है।

इस फैसले के बाद अब संसद में इस विधेयक को पेश किया जाएगा और अगर यह पास हो जाता है, तो देश की सर्वोच्च अदालत की कार्य क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

 

क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?

सरकार के इस नए प्रस्ताव के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। अभी तक सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर अधिकतम 33 जजों की व्यवस्था है। नए संशोधन के बाद यह संख्या बढ़ाकर 37 कर दी जाएगी।

इसका मतलब है कि अब कुल मिलाकर मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट में 38 जज होंगे।

सरकार का कहना है कि यह बदलाव इसलिए जरूरी है ताकि अदालत में मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।

 

सरकार का तर्क क्या है?

केंद्रीय मंत्रिमंडल का मानना है कि देश में अदालतों पर मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या अब 92,000 से भी ज्यादा हो चुकी है।

डिजिटल फाइलिंग और ई-कोर्ट सिस्टम के विस्तार के बाद केस दर्ज करने की प्रक्रिया आसान हो गई है, जिससे नए मामलों की संख्या भी बढ़ी है।

ऐसे में सरकार का कहना है कि जजों की संख्या बढ़ाने से मामलों का निपटारा तेजी से होगा और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

 

सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान स्थिति

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 34 स्वीकृत पदों के मुकाबले 32 जज कार्यरत हैं। यानी कुछ पद पहले से खाली भी हैं।

इसके अलावा आने वाले समय में कई जज रिटायर होने वाले हैं, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

2026 में कई अहम रिटायरमेंट तय हैं, जिनमें अलग-अलग जजों के पद खाली होंगे। ऐसे में न्याय व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।

Cabinet approved judges in Supreme Court

न्याय व्यवस्था पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?

भारत की न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी न्याय प्रणालियों में से एक है। लेकिन यहां मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

इसके मुख्य कारण हैं:

  • आबादी का बढ़ना
  • जागरूकता बढ़ने से अधिक केस दर्ज होना
  • आर्थिक और सामाजिक विवादों में बढ़ोतरी
  • डिजिटल माध्यम से आसान फाइलिंग
  • प्रशासनिक मामलों में बढ़ती जटिलता

इन सभी कारणों से सुप्रीम कोर्ट पर लगातार दबाव बना हुआ है।

 

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य जज होते हैं, लेकिन यह संख्या संसद कानून बनाकर बढ़ा सकती है।

यानी संसद को यह अधिकार है कि वह समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को जरूरत के अनुसार बदल सके।

इसी अधिकार के तहत 1956 में पहला कानून बनाया गया था, जिसमें जजों की संख्या तय की गई थी।

 

सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या में बदलाव का इतिहास

सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत में जजों की संख्या बहुत कम थी। समय के साथ इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया।

  • शुरुआत में केवल 7 जजों की व्यवस्था थी (CJI को छोड़कर)
  • 1956 में इसे बढ़ाकर 10 किया गया
  • 1960 में यह संख्या 13 हुई
  • 1977 में इसे बढ़ाकर 17 कर दिया गया
  • 1986 में संख्या बढ़ाकर 25 की गई
  • 2008 में यह बढ़कर 30 हुई
  • 2019 में इसे 33 किया गया
  • अब 2026 के प्रस्ताव में इसे 37 करने की तैयारी है

इस तरह देखा जाए तो समय के साथ अदालत की क्षमता को लगातार बढ़ाया गया है ताकि बढ़ते मामलों को संभाला जा सके।

 

सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रणाली को तेज और प्रभावी बनाना है।

इस प्रस्ताव के पीछे कुछ मुख्य लक्ष्य हैं:

  • मामलों का तेजी से निपटारा
  • लंबित केसों में कमी
  • जजों पर काम का दबाव कम करना
  • न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना
  • आम नागरिक को समय पर न्याय उपलब्ध कराना

सरकार का कहना है कि यह बदलाव न्याय व्यवस्था को आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

 

खर्च और संसाधन

जजों की संख्या बढ़ने से सरकार पर अतिरिक्त खर्च भी आएगा। इसमें शामिल हैं:

  • जजों का वेतन
  • सहायक स्टाफ का खर्च
  • कोर्ट की सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा खर्च भारत सरकार के “संघीय संचित निधि (Consolidated Fund of India)” से किया जाएगा।

 

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका

जजों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर होती है। यह एक प्रणाली है जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज शामिल होते हैं।

नए जजों की नियुक्ति के लिए भी कॉलेजियम अपनी सिफारिश देगा और उसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में कॉलेजियम आने वाले समय में नए नामों पर विचार करेगा।

 

वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल सिस्टम के कारण केस दर्ज करना आसान हो गया है, लेकिन सुनवाई की गति उतनी तेज नहीं बढ़ पाई है।

इस कारण लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है।

अगर जजों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

 

क्या इससे न्याय व्यवस्था में सुधार होगा?

सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से केस तेजी से निपटेंगे, अदालतों पर दबाव कम होगा, लोगों को जल्दी न्याय मिलेगा लेकिन कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल जज बढ़ाना ही समाधान नहीं है।

इसके साथ-साथ कोर्ट प्रक्रिया को सरल बनाना, तकनीक का बेहतर उपयोग करना, निचली अदालतों को मजबूत करना भी जरूरी है।

 

आगे क्या होगा?

अब यह विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। अगर संसद से मंजूरी मिल जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या आधिकारिक रूप से बढ़ा दी जाएगी। इसके बाद नए जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी।