CPEC 2.0 पर भारत का सख्त जवाब: चीन-पाकिस्तान को साफ संदेश, ‘जम्मू-कश्मीर हमारा अभिन्न हिस्सा’

भारत ने चीन और पाकिस्तान के उस संयुक्त बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया गया था। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी टिप्पणी को भारत पूरी तरह खारिज करता है।

यह विवाद उस समय सामने आया जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के चीन दौरे के बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में पाकिस्तान ने चीन को जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में जानकारी देने की बात कही थी। इसके बाद चीन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक “ऐतिहासिक विवाद” है और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

India strong response to CPEC 2.0

भारत ने इस बयान को अपनी संप्रभुता में दखल मानते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी भी तीसरे देश की टिप्पणी स्वीकार नहीं करता। उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों सहित पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है।

CPEC को लेकर भारत की सबसे बड़ी आपत्ति क्या है?

भारत का सबसे बड़ा विरोध चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC को लेकर है। भारत का कहना है कि यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके से होकर गुजरती है, जो कानूनी रूप से भारत का हिस्सा है।

भारत के मुताबिक, किसी भी दूसरे देश द्वारा वहां निर्माण करना या निवेश करना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसी किसी भी परियोजना का विरोध करता रहेगा, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे को मजबूत करने की कोशिश करे।

भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथित “ट्रांस-बाउंड्री वाटर रिसोर्सेज कोऑपरेशन” पर भी सवाल उठाए। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा नहीं है, इसलिए इस तरह की परियोजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

 

क्या है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC)?

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का अहम हिस्सा है। इसकी शुरुआत 2013 में की गई थी।

इस परियोजना के तहत चीन के शिंजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसकी अनुमानित लागत करीब 60 अरब डॉलर बताई जाती है।

CPEC के जरिए चीन सड़क, रेलवे, ऊर्जा प्रोजेक्ट, औद्योगिक पार्क और बंदरगाहों का बड़ा नेटवर्क तैयार कर रहा है। इसका मकसद चीन को सीधे अरब सागर तक पहुंच देना है, ताकि उसे तेल और व्यापार के लिए लंबा समुद्री रास्ता तय न करना पड़े।

 

चीन को CPEC से क्या फायदा होगा?

चीन के लिए CPEC केवल एक आर्थिक परियोजना नहीं बल्कि रणनीतिक योजना भी मानी जाती है।

अभी चीन का अधिकतर तेल आयात मलक्का जलडमरूमध्य से होकर शंघाई पहुंचता है। यह रास्ता लगभग 16 हजार किलोमीटर लंबा है। लेकिन CPEC के जरिए यह दूरी काफी कम हो सकती है।

इसके अलावा, ग्वादर पोर्ट चीन को हिंद महासागर और अरब सागर में मजबूत मौजूदगी देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में चीन इस बंदरगाह का इस्तेमाल अपनी नौसेना के लिए भी कर सकता है।

यही वजह है कि भारत CPEC को केवल आर्थिक नहीं बल्कि सुरक्षा चुनौती के रूप में भी देखता है।

 

CPEC 2.0: चीन और पाकिस्तान का नया प्लान

शहबाज शरीफ की हालिया चीन यात्रा में दोनों देशों ने CPEC 2.0 को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इसे CPEC का नया और उन्नत चरण माना जा रहा है।

दोनों देशों ने कराकोरम हाईवे के अपग्रेडेशन, ग्वादर पोर्ट के विस्तार और नए औद्योगिक पार्क बनाने पर जोर दिया। संयुक्त बयान में कहा गया कि CPEC को “नई गति” दी जाएगी।

इसके तहत 1300 किलोमीटर लंबे कराकोरम हाईवे के कुछ हिस्सों को आधुनिक बनाया जाएगा। यह सड़क चीन को सीधे पाकिस्तान से जोड़ती है और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत की चिंता यह है कि यह हाईवे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और शक्सगाम घाटी जैसे विवादित क्षेत्रों से होकर गुजरता है।

 

शक्सगाम घाटी विवाद क्या है?

भारत ने एक बार फिर 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को अवैध बताया। दरअसल, 1963 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के शक्सगाम क्षेत्र का एक हिस्सा चीन को सौंप दिया था। भारत ने कभी इस समझौते को स्वीकार नहीं किया।

भारत का कहना है कि पाकिस्तान को उस इलाके पर कोई कानूनी अधिकार नहीं था, इसलिए वह किसी तीसरे देश को वह जमीन नहीं दे सकता था।

अब जब CPEC और कराकोरम हाईवे जैसे प्रोजेक्ट उसी इलाके से गुजर रहे हैं, तो भारत की आपत्ति और ज्यादा मजबूत हो गई है।

 

ग्वादर पोर्ट क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट बलूचिस्तान में अरब सागर के किनारे स्थित है। चीन इसे अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क का अहम केंद्र बनाना चाहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर चीन यहां स्थायी लॉजिस्टिक या नौसैनिक सुविधा विकसित कर लेता है, तो हिंद महासागर में उसकी पकड़ काफी मजबूत हो सकती है।

भारत लंबे समय से चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति को लेकर चिंता जताता रहा है। माना जाता है कि चीन हिंद महासागर के आसपास बंदरगाहों का नेटवर्क बनाकर अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाना चाहता है।

 

भारत क्यों मानता है CPEC को सुरक्षा खतरा?

भारत का मानना है कि CPEC केवल व्यापारिक परियोजना नहीं है। इसके जरिए चीन पाकिस्तान में अपनी रणनीतिक मौजूदगी भी मजबूत कर रहा है।

भारत को डर है कि भविष्य में चीन पाकिस्तान के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए कर सकता है।

इसके अलावा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बड़े पैमाने पर चीनी निवेश से भारत की सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। भारत लगातार कहता रहा है कि किसी भी विवादित क्षेत्र में तीसरे देश की परियोजनाएं शांति के बजाय तनाव बढ़ा सकती हैं।

 

चीन-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी पर भारत की नजर

हाल के वर्षों में चीन और पाकिस्तान के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं।

चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बन चुका है। वहीं पाकिस्तान भी चीन को दक्षिण एशिया में अपना सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-चीन तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच चीन पाकिस्तान के जरिए इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

 

भारत का साफ संदेश: संप्रभुता से समझौता नहीं

भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा हर फैसला उसका आंतरिक मामला है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।

नई दिल्ली का मानना है कि CPEC जैसे प्रोजेक्ट विवादित क्षेत्रों से गुजरकर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाते हैं। यही वजह है कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसका विरोध करता रहा है।

आने वाले समय में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती साझेदारी तथा CPEC 2.0 की प्रगति पर भारत की नजर बनी रहेगी। दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में यह मुद्दा आगे भी बड़ा विवाद बना रह सकता है।