भारत सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय यानी बाइलेटरल खेल संबंध फिलहाल बहाल नहीं किए जाएंगे। युवा मामले और खेल मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर नया मेमोरेंडम जारी कर यह स्पष्ट किया है कि भारत की खेल नीति देश की विदेश नीति के अनुरूप ही चलेगी। इसका मतलब यह है कि भारतीय टीमें पाकिस्तान जाकर कोई बाइलेटरल सीरीज नहीं खेलेंगी और न ही पाकिस्तानी टीमों को भारत में ऐसी सीरीज खेलने की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि वर्ल्ड कप, ओलिंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मल्टीलेटरल टूर्नामेंट्स में दोनों देशों की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती रहेंगी। यानी खेल संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए गए हैं, बल्कि उन्हें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय आयोजनों तक सीमित रखा गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत खुद को दुनिया के बड़े खेल आयोजनों का केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है। साथ ही यह निर्णय भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच लिया गया है।
खेल मंत्रालय ने क्या कहा?
खेल मंत्रालय की ओर से जारी मेमोरेंडम में कहा गया है कि पाकिस्तान के साथ भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है।
दस्तावेज में लिखा गया है कि दोनों देशों के बीच बाइलेटरल खेल प्रतियोगिताओं की अनुमति नहीं होगी। भारतीय टीमें पाकिस्तान में होने वाली द्विपक्षीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेंगी और पाकिस्तान की टीमें भी भारत में ऐसी सीरीज नहीं खेल पाएंगी।
लेकिन इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के नियमों और भारतीय खिलाड़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मल्टीलेटरल प्रतियोगिताओं में भागीदारी जारी रहेगी।
यानी अगर किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पाकिस्तान की टीम मौजूद है, तो भारतीय खिलाड़ी उसमें हिस्सा लेंगे। इसी तरह भारत में होने वाले मल्टीलेटरल आयोजनों में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आने की अनुमति दी जाएगी।
किन संस्थाओं को भेजा गया आदेश?
खेल मंत्रालय ने यह निर्देश भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को भेज दिया है। सरकार चाहती है कि भविष्य में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न बने और सभी खेल संस्थाएं एक समान नीति का पालन करें।
मंत्रालय ने साफ किया कि यह फैसला भारत की व्यापक कूटनीतिक नीति के अनुसार लिया गया है।

ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले का जिक्र
यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” की बरसी है। यह अभियान पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी।
उस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव बढ़ गया था। खेल जगत में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का नया फैसला सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
सबसे ज्यादा असर क्रिकेट पर
भारत और पाकिस्तान के बीच खेल संबंधों पर सबसे ज्यादा असर क्रिकेट में देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच आखिरी बाइलेटरल क्रिकेट सीरीज 2012-13 में हुई थी, जब पाकिस्तान की टीम भारत दौरे पर आई थी।
इसके बाद से दोनों टीमें सिर्फ ICC टूर्नामेंट्स और एशिया कप जैसे मल्टीलेटरल आयोजनों में ही आमने-सामने आई हैं। क्रिकेट प्रशंसकों के बीच हमेशा यह सवाल उठता रहा है कि क्या कभी फिर दोनों देशों के बीच नियमित सीरीज शुरू होगी, लेकिन सरकार के नए रुख ने फिलहाल इस संभावना को लगभग खत्म कर दिया है।
चैंपियंस ट्रॉफी और भविष्य के टूर्नामेंट
हाल के समय में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। कई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि भारत पाकिस्तान जाकर खेलने के पक्ष में नहीं है। अब सरकार के नए सर्कुलर के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि भारत अपनी पुरानी नीति पर कायम रहेगा।
हालांकि ICC और अन्य वैश्विक टूर्नामेंट्स में दोनों टीमें खेलती रहेंगी। आने वाले महीनों में भारत और पाकिस्तान की टीमें कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आ सकती हैं।
हॉकी में भी कई मुकाबले तय
क्रिकेट के अलावा हॉकी में भी दोनों देशों के बीच मुकाबले जारी रहेंगे। भारत और पाकिस्तान जून में लंदन में होने वाली FIH प्रो लीग में दो बार भिड़ेंगे। इसके अलावा अगस्त में एम्स्टर्डम में होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप में भी दोनों टीमों का सामना हो सकता है।
इसके अलावा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे आयोजनों में भी दोनों देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
भारत क्यों बदल रहा है अपनी खेल रणनीति?
सरकार अब भारत को दुनिया के बड़े खेल आयोजनों के लिए भरोसेमंद मेजबान के रूप में पेश करना चाहती है। भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और 2036 ओलिंपिक तथा 2038 एशियन गेम्स की मेजबानी के लिए भी जोरदार तैयारी कर रहा है।
इसी सिलसिले में एशियन ओलिंपिक काउंसिल (OCA) के अधिकारी अहमदाबाद का दौरा भी करने वाले हैं। इसके अलावा भारत 2029 में क्रिकेट चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 वनडे वर्ल्ड कप की भी मेजबानी करेगा।
ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि वीजा विवाद या भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ टकराव हो।
वीजा नियमों में बड़ी राहत
सरकार ने इस नई नीति के साथ वीजा प्रक्रिया को भी आसान बनाने का फैसला किया है। खेल मंत्रालय के अनुसार अब खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों, तकनीकी स्टाफ और अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के पदाधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया सरल की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के अधिकारियों को पांच साल तक का प्राथमिकता वाला मल्टी-एंट्री वीजा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के दौरान आवाजाही आसान होगी और भारत वैश्विक मानकों के अनुसार काम कर सकेगा।
पहले वीजा को लेकर विवाद क्यों हुए?
पिछले कुछ वर्षों में कई बार पाकिस्तानी खिलाड़ियों और अधिकारियों को वीजा देने में देरी या अनिश्चितता को लेकर विवाद हुए थे। कुछ अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं ने इस पर चिंता भी जताई थी।
भारत सरकार पर पिछले साल बिहार में हुए हॉकी एशिया कप और चेन्नई में जूनियर वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तानी टीम को वीजा देने को लेकर राजनीतिक आलोचना भी हुई थी।
लेकिन अब सरकार ने औपचारिक रूप से यह स्पष्ट कर दिया है कि मल्टीलेटरल आयोजनों में भागीदारी अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार होगी।
जनता की प्रतिक्रिया कैसी?
भारत-पाकिस्तान मैच हमेशा भावनाओं से जुड़े रहते हैं। एक तरफ बड़ी संख्या में खेल प्रेमी दोनों देशों के बीच मुकाबले देखना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों को लेकर कड़ा रुख अपनाने की मांग भी होती रही है।
पहलगाम हमले के बाद कई लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ पूरी तरह खेल बहिष्कार की मांग की थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों के कारण पूरी तरह अलगाव संभव नहीं है।
क्या खेल और राजनीति अलग हो सकते हैं?
यह सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है कि क्या खेल को राजनीति से अलग रखा जा सकता है। भारत सरकार का नया रुख यही दिखाता है कि वह दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
एक तरफ द्विपक्षीय संबंधों पर सख्ती दिखाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिबद्धताओं का पालन भी किया जा रहा है।
निष्कर्ष:
भारत सरकार का नया खेल नीति मेमोरेंडम यह दिखाता है कि देश पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को लेकर दोहरी रणनीति अपना रहा है।
बाइलेटरल खेल संबंध पूरी तरह बंद रहेंगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी जारी रहेगी। सरकार इसे अपनी कूटनीतिक नीति और वैश्विक खेल प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन के रूप में पेश कर रही है।

