दुनिया भर में बसे भारतीय अब सिर्फ अपनी मेहनत और सफलता के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में निभाई जा रही अपनी भूमिका के कारण भी चर्चा में हैं। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत एक बार फिर दुनिया में सबसे ज्यादा विदेशी धन यानी रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बन गया है। साल 2024 में विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने भारत में 137 अरब डॉलर से ज्यादा पैसा भेजा, जो दुनिया के किसी भी दूसरे देश से काफी ज्यादा है।
यह आंकड़ा सिर्फ एक आर्थिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि विदेशों में बसे भारतीय अब भारत की आर्थिक ताकत का बड़ा आधार बन चुके हैं। शिक्षा, रोजगार, व्यापार और निवेश के जरिए भारतीय समुदाय का असर लगातार बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की “वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026” में कहा गया है कि भारत पिछले कई वर्षों से लगातार दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के बाद मेक्सिको, फिलीपींस और फ्रांस का स्थान रहा।
आखिर रेमिटेंस क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति विदेश में नौकरी या कारोबार करता है और वहां से अपने परिवार या रिश्तेदारों को पैसा भेजता है, तो उसे रेमिटेंस कहा जाता है।
भारत जैसे देशों के लिए यह पैसा बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे लाखों परिवारों का खर्च चलता है। शिक्षा, इलाज, घर बनाने और छोटे कारोबार शुरू करने में यह धन बड़ी भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश और निर्यात जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही अहम योगदान अब रेमिटेंस का भी हो चुका है।
भारत लगातार क्यों बना हुआ है नंबर-1?
रिपोर्ट के मुताबिक भारत को 2024 में 137 अरब डॉलर से ज्यादा रेमिटेंस मिला। यह दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत के बाद मेक्सिको दूसरे स्थान पर रहा। वहीं फिलीपींस और फ्रांस भी शीर्ष देशों में शामिल रहे।
भारत, मेक्सिको और फिलीपींस को मिलाकर 2024 में कुल 245 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि विदेशों से प्राप्त हुई। भारत के शीर्ष पर बने रहने की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में फैला विशाल भारतीय समुदाय है। लाखों भारतीय अमेरिका, खाड़ी देशों, यूरोप, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में काम कर रहे हैं।
इनमें आईटी प्रोफेशनल्स, डॉक्टर, इंजीनियर, बिजनेस मालिक, मजदूर और छात्र तक शामिल हैं।

पिछले 15 साल में कितना बढ़ा पैसा?
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में भारत में आने वाला विदेशी धन लगातार तेजी से बढ़ा है। साल 2010 में भारत को करीब 53.5 अरब डॉलर मिले थे। 2015 तक यह आंकड़ा बढ़कर 68.9 अरब डॉलर हो गया।
इसके बाद 2020 में यह 83.1 अरब डॉलर पहुंचा और अब 2024 में यह 137 अरब डॉलर से भी आगे निकल गया। यानी लगभग 14 साल में भारत में आने वाला विदेशी धन ढाई गुना से ज्यादा बढ़ चुका है।
दक्षिण एशिया में सबसे तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला रेमिटेंस क्षेत्र रहा। इस क्षेत्र में करीब 11.8% की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान भारत का रहा। पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी रेमिटेंस बढ़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में दक्षिण एशियाई कामगारों की बढ़ती संख्या इसकी प्रमुख वजह है।
पैसा सबसे ज्यादा किन देशों से आया?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस भेजने वाला देश बना हुआ है। 2024 में अमेरिका से 100 अरब डॉलर से ज्यादा धन अलग-अलग देशों में भेजा गया।
इसके अलावा सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख देशों में शामिल रहे। भारत को सबसे ज्यादा पैसा अमेरिका और खाड़ी देशों में बसे भारतीयों से मिलता है। अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की बड़ी संख्या उच्च आय वाले क्षेत्रों में काम कर रही है, जबकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक और तकनीकी कर्मचारी कार्यरत हैं।
भारतीय परिवारों के लिए कितनी अहम है यह रकम?
विशेषज्ञों के अनुसार रेमिटेंस सिर्फ विदेशी मुद्रा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों परिवारों की जीवनरेखा है। गांवों और छोटे शहरों में हजारों परिवार ऐसे हैं जिनकी आय का बड़ा हिस्सा विदेश में काम कर रहे किसी सदस्य से आता है।
यह पैसा बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च, इलाज, खेती और छोटे व्यवसायों में लगाया जाता है। कई राज्यों जैसे केरल, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस की बड़ी भूमिका मानी जाती है।
भारतीय प्रवासी अब सिर्फ पैसा नहीं भेज रहे
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय प्रवासी अब सिर्फ पैसा भेजने तक सीमित नहीं हैं। तकनीक, स्टार्टअप, रिसर्च और निवेश के क्षेत्र में भी उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
सरकार ने विदेशों में बसे भारतीयों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। स्टार्टअप में निवेश, नए कारोबार को मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की भागीदारी बढ़ रही है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऐसे कार्यक्रमों के परिणाम हर बार एक जैसे नहीं होते और इन्हें सफल बनाने के लिए लंबे समय तक प्रयास जरूरी होते हैं।
विदेशों में पढ़ाई के लिए भी भारत आगे
रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। भारत से 6.2 लाख से ज्यादा छात्र विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं। इस मामले में चीन पहले स्थान पर है।
अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों की पसंद बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में पढ़ने वाले कई छात्र आगे चलकर वहीं नौकरी करते हैं और बाद में भारत में पैसा भेजते हैं, जिससे रेमिटेंस और बढ़ता है।
अमेरिका में भारतीय कंपनियों का बढ़ता असर
इस बीच अमेरिका से भी भारतीय निवेश को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ब्रैंडन रेमिंगटन ने बताया कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में लगभग 16.4 अरब डॉलर का निवेश किया है।
इस निवेश की वजह से अमेरिका में करीब 70,800 नौकरियां पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं।
अमेरिका में भारतीय निवेश क्यों बढ़ रहा?
भारतीय कंपनियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। फार्मा, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा और आईटी सेक्टर की कई भारतीय कंपनियां अमेरिका में तेजी से विस्तार कर रही हैं।
हाल ही में सन फार्मा ने अमेरिका की कंपनी ऑर्गेनॉन एंड कंपनी को खरीदने के लिए 12 अरब डॉलर की बड़ी डील की घोषणा की। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां अमेरिका में नए निवेश की तैयारी कर रही हैं।
भारतीय कंपनियों से अमेरिका को क्या फायदा?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारतीय निवेश से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिल रहा है। भारतीय कंपनियां वहां रोजगार पैदा कर रही हैं, सप्लाई चेन मजबूत कर रही हैं और स्थानीय समुदायों में निवेश कर रही हैं।
CII की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में रिसर्च प्रोजेक्ट्स और सामाजिक परियोजनाओं पर भी बड़ा खर्च किया है।
किन अमेरिकी राज्यों में सबसे ज्यादा भारतीय निवेश?
CII की रिपोर्ट के अनुसार टेक्सास भारतीय निवेश पाने वाला सबसे बड़ा अमेरिकी राज्य बना हुआ है। इसके बाद जॉर्जिया और न्यू जर्सी का स्थान है। इन राज्यों में भारतीय कंपनियों ने अरबों डॉलर का निवेश किया है और हजारों लोगों को रोजगार दिया है।
क्या भारत की वैश्विक ताकत बढ़ रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रवासियों की बढ़ती आर्थिक ताकत भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत कर रही है।
आज भारतीय समुदाय दुनिया के लगभग हर बड़े देश में मौजूद है। टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, शिक्षा और बिजनेस जैसे क्षेत्रों में भारतीयों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
रेमिटेंस और विदेशी निवेश दोनों यह दिखाते हैं कि भारत की आर्थिक पहुंच अब सीमाओं से कहीं आगे जा चुकी है।
निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट यह साफ दिखाती है कि विदेशों में बसे भारतीय अब भारत की अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभों में शामिल हो चुके हैं।
137 अरब डॉलर से ज्यादा का रेमिटेंस सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की उम्मीद और भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत की कहानी है।
साथ ही भारतीय कंपनियों का अमेरिका समेत दूसरे देशों में बढ़ता निवेश यह भी दिखाता है कि भारत अब सिर्फ विदेशी निवेश लेने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया में निवेश करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन रहा है।

