भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल पर वीडियो देखना, ऑनलाइन पढ़ाई करना, डिजिटल पेमेंट करना और सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल अब आम बात बन चुकी है। लेकिन बढ़ती डिजिटल जरूरतों के बीच मोबाइल नेटवर्क पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। कई बार भीड़भाड़ वाले इलाकों में इंटरनेट धीमा पड़ जाता है और ऑनलाइन पेमेंट तक फेल हो जाते हैं। ऐसे में अब सरकार एक नए और उन्नत पब्लिक वाई-फाई सिस्टम को लाने की तैयारी कर रही है।
सरकार और दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) का मानना है कि सिर्फ मोबाइल नेटवर्क के भरोसे देश की बढ़ती डेटा जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होगा। इसी वजह से अब सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क को बड़े स्तर पर मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
यह नई व्यवस्था पुराने पीएम-वाणी मॉडल की कमियों से सीख लेकर तैयार की जा रही है, ताकि यूजर्स को बेहतर इंटरनेट सुविधा मिले और कंपनियों के लिए भी यह मॉडल फायदे का सौदा बन सके।
क्या है सरकार की नई योजना?
TRAI ने “भारत में पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार” को लेकर एक नया परामर्श-पत्र जारी किया है। इसमें लोगों, कंपनियों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं कि देशभर में सार्वजनिक वाई-फाई को कैसे तेजी से बढ़ाया जाए और इसे ज्यादा उपयोगी बनाया जाए।
TRAI ने सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 25 मई 2026 रखी है, जबकि जवाबी टिप्पणियों के लिए 8 जून 2026 तक का समय दिया गया है।
इस नए सिस्टम का मकसद सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित, आसान और सस्ता बनाना भी है।
अब हर जगह अलग OTP की जरूरत नहीं
सरकार की नई योजना का सबसे बड़ा बदलाव यूजर अनुभव को आसान बनाना है।
अभी किसी नए सार्वजनिक वाई-फाई से जुड़ने के लिए हर बार नया OTP या लॉगिन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इससे कई लोग पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने से बचते हैं।
नई व्यवस्था में देशभर के करीब 4 लाख हॉटस्पॉट पर एक ही OTP या पासवर्ड से लॉगिन किया जा सकेगा। यानी एक बार रजिस्ट्रेशन के बाद बार-बार परेशानी नहीं होगी।
इससे रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बाजार, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक जगहों पर इंटरनेट इस्तेमाल करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा।

डिजिटल पेमेंट होंगे ज्यादा सुरक्षित
सरकार सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क को सिर्फ तेज ही नहीं, बल्कि सुरक्षित भी बनाना चाहती है।
नई योजना में “वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3” (WPA3) जैसे आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू करने का प्रस्ताव है। यह तकनीक साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में मदद करेगी।
इसका फायदा खासकर यूपीआई और डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वालों को मिलेगा। अभी भीड़भाड़ वाले इलाकों में नेटवर्क कमजोर होने के कारण कई बार पेमेंट फेल हो जाते हैं या सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
नए सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा पर जोर दिया जाएगा ताकि लोग बिना डर के डिजिटल लेनदेन कर सकें।
क्यों जरूरी है पब्लिक वाई-फाई?
TRAI के अनुसार इंटरनेट अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है। जिस तरह बिजली, सड़क और पानी जरूरी माने जाते हैं, उसी तरह इंटरनेट भी आज के समय में आवश्यक सेवा बन गया है।
ऑनलाइन पढ़ाई, टेलीमेडिसिन, बैंकिंग, सरकारी सेवाएं और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं अब इंटरनेट पर निर्भर हैं।
लेकिन भारत जैसे बड़े देश में हर जगह मजबूत मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना आसान नहीं है। खासकर रेलवे स्टेशन, बाजार, एयरपोर्ट और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल नेटवर्क पर बहुत दबाव रहता है।
पब्लिक वाई-फाई ऐसे समय में मोबाइल नेटवर्क का बोझ कम कर सकता है और लोगों को बेहतर स्पीड दे सकता है।
पीएम-वाणी मॉडल क्यों सफल नहीं हुआ?
सरकार ने 2020 में पीएम-वाणी योजना शुरू की थी। इसका मकसद देशभर में लाखों सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट बनाना था।
लेकिन यह योजना उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सकी।
TRAI ने अपनी रिपोर्ट में इसकी कई वजहें बताई हैं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वाई-फाई चलाने वाले ऑपरेटरों को पर्याप्त कमाई नहीं हो रही थी। कई जगह लगाए गए हॉटस्पॉट का इस्तेमाल बहुत कम हुआ।
इसके अलावा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी चिंताएं थीं। कई राज्यों और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी भी कमजोर रही।
इसी वजह से सरकार अब ऐसा मॉडल बनाना चाहती है जिसमें कंपनियों को आर्थिक फायदा भी हो और लोग ज्यादा से ज्यादा इसका इस्तेमाल करें।
कंपनियां कैसे कमाएंगी?
नई योजना में सरकार पब्लिक वाई-फाई को ऑपरेटरों के लिए कमाई का मॉडल बनाना चाहती है। इसके लिए कई विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
सबसे पहला तरीका विज्ञापन आधारित मॉडल होगा। यानी कंपनियां वाई-फाई इस्तेमाल करने वाले लोगों को विज्ञापन दिखाकर कमाई कर सकेंगी।
दूसरा विकल्प “पेड वाई-फाई” होगा। बेसिक इंटरनेट मुफ्त रहेगा, लेकिन ज्यादा स्पीड या अतिरिक्त डेटा के लिए छोटे रिचार्ज प्लान उपलब्ध हो सकते हैं।
सरकार “वायबिलिटी गैप फंडिंग” यानी आर्थिक सहायता देने पर भी विचार कर रही है, ताकि ऑपरेटरों को नुकसान न उठाना पड़े।
डेटा एनालिटिक्स का क्या होगा रोल?
नई व्यवस्था में डेटा एनालिटिक्स को भी अहम माना जा रहा है। इससे कंपनियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन से इलाके में लोग ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, कहां हाई-स्पीड सेवा की मांग ज्यादा है और किस तरह के विज्ञापन लोगों को दिखाए जाएं।
इससे कंपनियां अपनी सेवाओं को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएंगी और कमाई भी बढ़ा सकेंगी।
गांव और शहर के लिए अलग मॉडल
TRAI के प्रस्ताव के अनुसार शहरों और गांवों के लिए अलग रणनीति अपनाई जाएगी।
बड़े शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट वाले उन्नत वाई-फाई नेटवर्क लगाए जाएंगे। वहीं गांवों में कम लागत वाला “कम्युनिटी वाई-फाई” मॉडल लागू किया जाएगा।
इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में भी सस्ता इंटरनेट पहुंचाना है, ताकि डिजिटल सेवाओं का फायदा हर व्यक्ति तक पहुंचे।
भारत में पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल कितना कम?
रिपोर्ट के अनुसार भारत की 140 करोड़ से ज्यादा आबादी में अभी केवल करीब 2% लोग ही सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं।
यह आंकड़ा कई दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम है। दक्षिण कोरिया में लगभग 80% लोग पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 70% है, जबकि यूरोप और चीन में लगभग 60% लोग सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते हैं। इंग्लैंड में यह संख्या करीब 50% है। यानी भारत में इस क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर करेंगी काम
नई योजना में सरकारी और निजी कंपनियों के बीच साझेदारी पर भी जोर दिया गया है। भारत नेट जैसी सरकारी फाइबर परियोजनाओं और निजी कंपनियों की फाइबर लाइनों का संयुक्त इस्तेमाल किया जाएगा। इससे तेजी से नेटवर्क फैलाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकारी और निजी क्षेत्र साथ मिलकर काम करें तो देशभर में मजबूत इंटरनेट नेटवर्क बनाना आसान होगा।
डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क डिजिटल इंडिया मिशन को नई ताकत दे सकता है।
बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि सस्ता और तेज इंटरनेट डिजिटल ढांचे को मजबूत बनाता है। खासकर उन लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण है जो महंगे मोबाइल डेटा प्लान नहीं खरीद सकते।
उन्होंने कहा कि वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑनलाइन शिक्षा जैसी सेवाओं के लिए वाई-फाई बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
निष्कर्ष:
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में मजबूत और सुरक्षित इंटरनेट नेटवर्क बेहद जरूरी हो गया है।
सरकार का नया पब्लिक वाई-फाई मॉडल सिर्फ इंटरनेट सुविधा बढ़ाने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस और नई तकनीकों को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

