अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापार को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यूरोपीय संघ को साफ चेतावनी दी है कि अगर लंबित व्यापार समझौते को जल्द लागू नहीं किया गया, तो अमेरिका यूरोपीय सामानों पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगा सकता है। इसमें यूरोप से आने वाली कारें और ट्रक भी शामिल होंगे।
ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल अमेरिका यूरोपीय कारों पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला रोक रहा है, लेकिन यह राहत सिर्फ 4 जुलाई तक ही रहेगी। अमेरिका इस दिन अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ मनाएगा। अगर तब तक समझौते को लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठे, तो अमेरिका आयात शुल्क बढ़ा सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले साल हुए “टर्नबेरी समझौते” के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक माहौल कुछ शांत हुआ था। अब ट्रंप के नए रुख ने फिर से ट्रांस-अटलांटिक व्यापार विवाद को चर्चा में ला दिया है।
ट्रंप ने आखिर कहा क्या?
ट्रंप ने यूरोपीय आयोग की प्रमुख Ursula von der Leyen से फोन पर बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ ने वादा किया था कि वह अमेरिकी उत्पादों पर अपने टैरिफ को शून्य करेगा, लेकिन अब तक उस दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है।
ट्रंप ने लिखा कि उन्होंने यूरोप को अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ तक का समय दिया है। इसके बाद यदि समझौते को लागू नहीं किया गया, तो टैरिफ तुरंत बढ़ा दिए जाएंगे।
क्या है टर्नबेरी समझौता?
अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच जुलाई 2025 में स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में एक बड़ा व्यापार समझौता हुआ था।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने यूरोपीय उत्पादों पर लगाए गए कई भारी टैरिफ घटाकर 15% कर दिए थे। इसके बदले यूरोप ने अमेरिकी औद्योगिक सामानों पर टैक्स कम करने और अमेरिकी कृषि व समुद्री उत्पादों को बेहतर बाजार पहुंच देने का वादा किया था।
उस समय माना जा रहा था कि इससे दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चला आ रहा व्यापार विवाद कम होगा। लेकिन करीब नौ महीने बाद भी समझौते को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।
समझौता अटका क्यों हुआ है?
यूरोपीय संघ में किसी बड़े व्यापार समझौते को लागू करने के लिए कई स्तरों की मंजूरी लेनी पड़ती है। इस समय यह समझौता यूरोपीय संसद और सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली परिषद के बीच बातचीत में फंसा हुआ है।
यूरोपीय संसद की ट्रेड कमेटी के प्रमुख बर्न्ड लैंगे ने कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है। अब अगली बैठक 19 मई को होने वाली है।

यूरोप के भीतर भी मतभेद
समझौते को लेकर यूरोपीय देशों के बीच भी एक राय नहीं बन पा रही है। कुछ सांसद चाहते हैं कि अगर भविष्य में अमेरिका फिर से टैरिफ बढ़ाता है, तो यूरोपीय संघ को भी समझौता रोकने का अधिकार मिले।
कुछ नेता यह भी चाहते हैं कि यूरोप द्वारा दी जाने वाली व्यापारिक रियायतें अमेरिका के व्यवहार से जुड़ी हों। यानी अगर अमेरिका नियमों का पालन नहीं करे, तो यूरोप भी अपनी रियायतें वापस ले सके।
लेकिन कई यूरोपीय सरकारें इस तरह की सख्त शर्तों के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें डर है कि ज्यादा देरी होने पर ट्रंप अपने टैरिफ वाले फैसले को लागू कर सकते हैं।
सबसे ज्यादा चिंता ऑटो सेक्टर को
ट्रंप की चेतावनी से यूरोप का ऑटो उद्योग सबसे ज्यादा चिंतित है। अगर अमेरिका यूरोपीय कारों पर टैरिफ 15% से बढ़ाकर 25% कर देता है, तो इसका सबसे बड़ा असर जर्मनी जैसे देशों पर पड़ेगा, जहां कार उद्योग अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है।
जर्मनी की अर्थव्यवस्था मंत्री कैथरीना रीशे ने कहा कि अमेरिका के अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत जारी है और दोनों पक्ष समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या टैरिफ सिर्फ कारों पर लगेंगे?
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक अगर बातचीत में और देरी हुई, तो अमेरिका सिर्फ ऑटो सेक्टर ही नहीं बल्कि दूसरे क्षेत्रों पर भी टैरिफ लगा सकता है।
इसमें फार्मा, सेमीकंडक्टर और अन्य तकनीकी उद्योग शामिल हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन पहले भी कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का इस्तेमाल करके आयात शुल्क बढ़ा चुका है।
यूरोपीय संघ का जवाब क्या है?
फोन बातचीत के बाद उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने माहौल को शांत रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जुलाई की शुरुआत तक टैरिफ में कमी लाने की दिशा में काम हो रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत में पश्चिम एशिया और ईरान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में बदलती व्यापार नीति
राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप लगातार “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि कई देशों ने वर्षों तक अमेरिका के बाजार का फायदा उठाया, जबकि अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हुआ।
इसी वजह से ट्रंप प्रशासन बार-बार टैरिफ को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
हालांकि इस साल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की कुछ आपातकालीन टैरिफ शक्तियों को सीमित किया था, लेकिन ट्रंप के पास अभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत सेक्टर आधारित टैरिफ लगाने का अधिकार मौजूद है।
वैश्विक बाजार क्यों चिंतित हैं?
अमेरिका और यूरोपीय संघ दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। अगर दोनों के बीच व्यापार युद्ध बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ इन क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा।
ऑटो उद्योग, टेक्नोलॉजी कंपनियां, सप्लाई चेन और वैश्विक निवेश बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टैरिफ बढ़े, तो कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
क्या समझौता समय पर हो पाएगा?
फिलहाल दोनों पक्षों के पास 4 जुलाई तक का समय है। यूरोपीय संघ तेज गति से बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि अमेरिका को टैरिफ बढ़ाने का मौका न मिले।
लेकिन यूरोप के अंदर जारी मतभेद और राजनीतिक दबाव इस प्रक्रिया को मुश्किल बना रहे हैं।दूसरी ओर ट्रंप लगातार सख्त संदेश देकर दबाव बढ़ा रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अगर जुलाई तक समझौते पर सहमति नहीं बनी, तो अमेरिका यूरोपीय कारों और अन्य सामानों पर आयात शुल्क बढ़ा सकता है। इससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आ सकती है।
हालांकि अभी भी बातचीत जारी है और दोनों पक्ष किसी बड़े टकराव से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

