भारत का क्विक कॉमर्स बाजार इस समय सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले डिजिटल सेक्टर्स में गिना जा रहा है। अब इस सेक्टर में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब मार्केट रेगुलेटर सेबी ने क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto के IPO को मंजूरी दे दी। इस मंजूरी के बाद Zepto भारत की पहली ऐसी “प्योर क्विक कॉमर्स” कंपनी बनने की ओर बढ़ रही है, जो शेयर बाजार में लिस्ट होगी।
करीब 1 अरब डॉलर यानी लगभग 9,300 करोड़ रुपये के इस IPO को भारतीय स्टार्टअप दुनिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। खास बात यह है कि Zepto सिर्फ पांच साल पुरानी कंपनी है, लेकिन इसकी रफ्तार ने बड़े-बड़े निवेशकों और प्रतिस्पर्धियों का ध्यान खींच लिया है।
आखिर Zepto है क्या?
Zepto एक भारतीय क्विक कॉमर्स कंपनी है, जो लोगों तक 10 से 15 मिनट में ग्रोसरी और रोजमर्रा का सामान पहुंचाने के लिए जानी जाती है। इसकी शुरुआत 2021 में Aadit Palicha और Kaivalya Vohra ने की थी।
कंपनी का पहला नाम KiranaKart था, जिसे बाद में बदलकर Zepto कर दिया गया। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। बहुत कम समय में कंपनी ने देश के कई बड़े शहरों में अपनी मजबूत मौजूदगी बना ली।
Zepto का मॉडल पूरी तरह “डार्क स्टोर्स” पर आधारित है। ये छोटे वेयरहाउस होते हैं, जहां पहले से सामान रखा जाता है ताकि ऑर्डर मिलते ही तुरंत पैकिंग और डिलीवरी हो सके।
कंपनी सिर्फ ग्रोसरी ही नहीं, बल्कि फल-सब्जियां, डेयरी प्रोडक्ट्स, स्नैक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और घरेलू सामान भी बेचती है।
कैसे बनी अरबों डॉलर की कंपनी?
Zepto की शुरुआत छोटे स्तर पर हुई थी, लेकिन निवेशकों ने इसकी ग्रोथ पर जल्दी भरोसा दिखाया।
2021 में कंपनी ने शुरुआती फंडिंग जुटाई थी। इसके बाद उसी साल अक्टूबर में Nexus Venture Partners, Y Combinator और दूसरे निवेशकों से 6 करोड़ डॉलर मिले। इससे कंपनी की वैल्यूएशन 22.5 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई।
दिसंबर 2021 में कंपनी ने 10 करोड़ डॉलर की Series C फंडिंग जुटाई और इसकी वैल्यूएशन 57 करोड़ डॉलर हो गई।
इसके बाद 2022 में Series D फंडिंग के जरिए कंपनी ने 20 करोड़ डॉलर हासिल किए और वैल्यूएशन बढ़कर 90 करोड़ डॉलर पहुंच गई। असल बड़ा बदलाव अगस्त 2023 में आया, जब Zepto ने 20 करोड़ डॉलर जुटाकर यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया। उस समय कंपनी की वैल्यूएशन 1.4 बिलियन डॉलर थी।
फिर 2024 में कंपनी ने लगातार बड़े निवेश हासिल किए। जून 2024 में 66.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिली, जिससे वैल्यूएशन 3.6 बिलियन डॉलर पहुंच गई। इसके दो महीने बाद ही कंपनी ने अतिरिक्त 34 करोड़ डॉलर जुटाए और इसकी वैल्यूएशन 5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। अब बाजार में कंपनी की आखिरी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 7 बिलियन डॉलर मानी जा रही है।

IPO से कंपनी को क्या फायदा होगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक Zepto का IPO करीब 1.3 अरब डॉलर तक का हो सकता है। इसका बड़ा हिस्सा फ्रेश इश्यू के रूप में रहेगा। यानी कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी।
इस फंड का इस्तेमाल नए शहरों में विस्तार, ज्यादा डार्क स्टोर खोलने, सप्लाई चेन मजबूत करने और टेक्नोलॉजी पर निवेश के लिए किया जाएगा। सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी अगले कुछ हफ्तों में अपडेटेड दस्तावेज दाखिल करेगी और जुलाई 2026 तक लिस्टिंग का लक्ष्य रखा गया है।
भारत में Quick Commerce इतना तेजी से क्यों बढ़ रहा है?
भारत में क्विक कॉमर्स की असली रफ्तार कोविड महामारी के बाद शुरू हुई। लॉकडाउन के दौरान लोगों को घर बैठे सामान मंगाने की आदत पड़ गई।
शुरुआत में कंपनियां केवल ग्रोसरी डिलीवर करती थीं, लेकिन अब मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन एक्सेसरीज़, दवाइयां और कई दूसरे सामान भी कुछ मिनटों में घर पहुंचाए जा रहे हैं।
2026 तक भारत का क्विक कॉमर्स बाजार लगभग 10 से 11 अरब डॉलर GMV तक पहुंच चुका है। यह सेक्टर अभी भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
कौन-कौन हैं इस बाजार के बड़े खिलाड़ी?
भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर में इस समय कई बड़ी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart, BigBasket, Flipkart Minutes, Amazon India और JioMart शामिल हैं।
फिलहाल Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart को सबसे बड़े खिलाड़ी माना जाता है। Blinkit कई शहरों में मार्केट लीडर है, जबकि Zepto सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कंपनियों में गिनी जाती है।
अब बड़ी कंपनियों की एंट्री से बढ़ी टक्कर
पहले क्विक कॉमर्स बाजार केवल स्टार्टअप्स तक सीमित था, लेकिन अब देश की बड़ी कंपनियां भी इसमें उतर चुकी हैं।
Reliance JioMart अपने बड़े रिटेल नेटवर्क का फायदा उठा रही है। Flipkart “Flipkart Minutes” के जरिए तेजी से नए डार्क स्टोर्स खोल रही है। वहीं Amazon भी भारत में हाइपरफास्ट डिलीवरी मॉडल पर काम कर रहा है।
इन कंपनियों की एंट्री से मुकाबला और कठिन हो गया है। अब केवल तेज डिलीवरी ही काफी नहीं है। कंपनियां बेहतर कीमत, ज्यादा प्रोडक्ट्स और बेहतर ग्राहक अनुभव देने की कोशिश कर रही हैं।
Swiggy और Zomato के शेयरों ने क्यों बढ़ाई चिंता?
Zepto के IPO को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन निवेशकों के मन में सवाल भी हैं। वजह है दूसरे क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी स्टॉक्स का प्रदर्शन।
Swiggy नवंबर 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। शुरुआत में शेयर ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बाद में गिरावट शुरू हो गई। अभी इसका शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे चल रहा है।
वहीं Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal का शेयर भी पिछले छह महीनों में दबाव में रहा है। हालांकि लंबे समय में इसने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन हालिया गिरावट ने बाजार को सतर्क कर दिया है।
Swiggy का घाटा क्यों बढ़ा?
Swiggy ने FY26 के नतीजों में बताया कि उसका सालाना घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है। हालांकि मार्च तिमाही में घाटा कुछ कम जरूर हुआ।
कंपनी का रेवेन्यू मजबूत रहा और Q4 में 45% की बढ़ोतरी के साथ 6,383 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेजी से विस्तार के कारण लागत भी बहुत बढ़ रही है। यही वजह है कि निवेशक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि Zepto का बिजनेस मॉडल लंबे समय में कितना मुनाफेदार साबित होगा।
क्या Zepto निवेशकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी?
Zepto ने बेहद कम समय में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी के साथ General Catalyst, Lightspeed Venture Partners, Haldiram Snacks और Motilal Oswal AMC जैसे बड़े निवेशक जुड़े हुए हैं। लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी। शेयर बाजार में केवल तेज ग्रोथ काफी नहीं होती, वहां मुनाफा, स्थिरता और लंबी अवधि की रणनीति भी अहम होती है।
क्विक कॉमर्स सेक्टर में मुकाबला लगातार बढ़ रहा है और कंपनियां भारी खर्च करके ग्राहकों को जोड़ रही हैं। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या Zepto इस प्रतिस्पर्धा में टिककर निवेशकों को भरोसा दिला पाएगी या फिर यह सेक्टर अभी भी जोखिम भरा बना रहेगा।

