भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। अब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर निवेश करने जा रही हैं। उनके मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था में 20.5 अरब डॉलर यानी करीब 1.94 लाख करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है। इसे दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
अमेरिका में आयोजित ‘सेलेक्टयूएसए इन्वेस्टमेंट समिट 2026’ के दौरान यह जानकारी सामने आई। इस समिट को अमेरिकी वाणिज्य विभाग का सबसे बड़ा निवेश कार्यक्रम माना जाता है, जहां दुनिया भर की कंपनियां अमेरिका में निवेश की घोषणाएं करती हैं।
अमेरिकी राजदूत ने क्या कहा?
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर निवेश आ रहा है और भारतीय कंपनियां भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल सेक्टर सहित कई क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश करने की तैयारी में हैं। उनके अनुसार यह निवेश केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे अमेरिका में रोजगार भी बढ़ेगा और सप्लाई चेन मजबूत होगी।
गोर ने बताया कि केवल एक दिन में 12 भारतीय कंपनियों ने 1.1 अरब डॉलर यानी करीब 10,450 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की। उन्होंने इसे दोनों देशों की साझेदारी का मजबूत उदाहरण बताया।
किन क्षेत्रों में होगा निवेश?
जानकारी के मुताबिक, भारतीय कंपनियों का निवेश कई बड़े क्षेत्रों में होने जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से –
- टेक्नोलॉजी
- दवा उद्योग
- मैन्युफैक्चरिंग
- ऊर्जा
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट
- सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर
जैसे सेक्टर शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अमेरिका के भीतर उत्पादन और रिसर्च बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। इससे उन्हें अमेरिकी बाजार तक सीधी पहुंच भी मिलेगी।
सेलेक्टयूएसए समिट में भारत की मजबूत मौजूदगी
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के इंटरनेशनल ट्रेड अंडर सेक्रेटरी विलियम किमिट ने कहा कि इस बार सेलेक्टयूएसए समिट में भारतीय कंपनियों की भागीदारी अब तक की सबसे बड़ी रही।
उनके अनुसार, किसी एक देश के प्रतिनिधिमंडल द्वारा इतनी बड़ी संख्या में निवेश घोषणाएं पहली बार हुई हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध अब नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों के निवेश से अमेरिकी उद्योगों को मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग और गहरा होगा।
भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने की तैयारी
दोनों देशों ने पहले ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में लगातार बातचीत चल रही है।
हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पाद, विमान, विमान के पार्ट्स, धातु, कोयला और टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पाद खरीदेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में बड़ा विस्तार हो सकता है। अमेरिका जहां अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार चाहता है, वहीं भारत आधुनिक तकनीक और निवेश को आकर्षित करने पर जोर दे रहा है।

AMCHAM के साथ भी हुई अहम बैठक
पिछले महीने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (AMCHAM) के बोर्ड सदस्यों के साथ बैठक की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार को तेज करने पर चर्चा हुई।
गोर ने कहा कि भारत में काम कर रही अमेरिकी कंपनियां न केवल व्यापार बढ़ा रही हैं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को भी मजबूत बना रही हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका और भारत का लक्ष्य 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाना है।
Pax Silica पहल क्या है?
भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी सहयोग बढ़ा है। इसी कड़ी में भारत ने ‘Pax Silica’ पहल में हिस्सा लिया है।
यह पहल मुख्य रूप से –
- AI तकनीक
- सेमीकंडक्टर
- महत्वपूर्ण खनिज
- हाई-टेक सप्लाई चेन
जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए शुरू की गई है।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका के आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग के बीच हुई बैठक में इस साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
भारतीय कंपनियों को क्या फायदा होगा?
अमेरिका में निवेश बढ़ाने से भारतीय कंपनियों को कई फायदे मिल सकते हैं –
- बड़ा बाजार: अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहां उत्पादन और कारोबार बढ़ाने से भारतीय कंपनियों को नए ग्राहक मिलेंगे।
- आधुनिक तकनीक: अमेरिका में रिसर्च और इनोवेशन का स्तर काफी ऊंचा है। वहां निवेश करने से भारतीय कंपनियां नई तकनीकों तक पहुंच बना सकेंगी।
- वैश्विक पहचान: अमेरिकी बाजार में मजबूत मौजूदगी किसी भी कंपनी की अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ाती है।
- सप्लाई चेन मजबूत होगी: दोनों देशों के बीच कारोबारी नेटवर्क मजबूत होने से वैश्विक सप्लाई चेन में स्थिरता आएगी।
क्या यह निवेश भारत के लिए भी फायदेमंद है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में निवेश का फायदा भारत को भी अप्रत्यक्ष रूप से मिलेगा। जब भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर मजबूत होंगी, तो उनका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां अमेरिका में रिसर्च सेंटर बनाकर नई तकनीक विकसित कर रही हैं, जिसका उपयोग बाद में भारत में भी किया जा सकता है।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
भारत और अमेरिका के रिश्ते अब केवल रक्षा और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश अब तकनीक, निवेश, AI, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से करीब आ रहे हैं।
अमेरिका जहां भारत को एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है, वहीं भारत भी वैश्विक निवेश और तकनीकी सहयोग के जरिए अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाना चाहता है।

