अडाणी को अमेरिका से राहत – 2,500 करोड़ का आपराधिक केस वापस ले सकता है US न्याय विभाग, जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

भारत के बड़े उद्योगपति और अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी को अमेरिका से बड़ी राहत मिलने की खबर सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का न्याय विभाग (US Department of Justice) उनके खिलाफ चल रहे करीब 265 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,500 करोड़ रुपये के आपराधिक मामले को वापस लेने की तैयारी कर रहा है।

यह मामला कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह केस इसी सप्ताह के भीतर समाप्त किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह अडाणी ग्रुप के लिए पिछले डेढ़ साल में सबसे बड़ी कानूनी राहत मानी जाएगी।

 

क्या है पूरा मामला?

नवंबर 2024 में अमेरिकी फेडरल प्रॉसिक्यूटर ने गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी और अन्य कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाए थे। आरोप था कि भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी।

कथित तौर पर यह योजना 2020 से 2024 के बीच बनाई गई थी और इसके जरिए बड़े सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की कोशिश हुई, जिससे आने वाले 20 वर्षों में करीब 2 अरब डॉलर से ज्यादा का मुनाफा होने का अनुमान था।

अमेरिकी जांच एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया था कि इस पूरी योजना में कई कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका रही और इसे छिपाने की कोशिश भी की गई।

 

किन-किन लोगों के नाम सामने आए?

इस मामले में सिर्फ गौतम अडाणी ही नहीं, बल्कि कई अन्य नाम भी शामिल थे। इनमें शामिल हैं –

  • सागर अडाणी
  • विनीत एस जैन (पूर्व CEO, Adani Green Energy)
  • कुछ अन्य भारतीय और विदेशी कारोबारी अधिकारी
  • कनाडाई निवेश संस्था से जुड़े कुछ लोग

अमेरिकी जांच में यह भी कहा गया था कि कुछ अधिकारियों ने ईमेल, मैसेज और दस्तावेज मिटाने की कोशिश की ताकि जांच प्रभावित हो सके।

 

फंडिंग पर भी उठे थे सवाल

अमेरिकी आरोपों में यह भी कहा गया था कि अडाणी ग्रुप ने इस कथित योजना को छिपाकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और बैंकों से भारी फंड जुटाया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 3 अरब डॉलर (लगभग ₹25,000 करोड़ से ज्यादा) की फंडिंग लोन और बॉन्ड के जरिए जुटाई गई थी।

इस फंडिंग को लेकर सवाल यह था कि क्या निवेशकों को सही जानकारी दी गई थी या कुछ तथ्य छिपाए गए थे।

 

“न्यूमेरो उनो” और “द बिग मैन” जैसे कोड नाम

अमेरिकी अदालत में दाखिल दस्तावेजों में दावा किया गया था कि बातचीत के दौरान गौतम अडाणी के लिए कुछ कोड नामों का इस्तेमाल किया गया। इनमें “न्यूमेरो उनो” और “द बिग मैन” जैसे नाम शामिल थे।

हालांकि, यह सभी आरोप जांच और कोर्ट प्रक्रिया का हिस्सा थे और अंतिम निष्कर्ष नहीं था।

Adani gets relief from America

अब केस खत्म होने की संभावना क्यों बढ़ी?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग अब इस आपराधिक केस को आगे नहीं बढ़ाने पर विचार कर रहा है। साथ ही अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) भी इस मामले से जुड़े सिविल केस को सेटलमेंट के जरिए खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अगर दोनों मामलों का निपटारा हो जाता है, तो यह अडाणी ग्रुप के लिए बड़ा कानूनी क्लीन-चिट जैसा प्रभाव दे सकता है।

 

अडाणी की अमेरिकी रणनीति में बदलाव

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस मामले के दौरान अडाणी ग्रुप ने अपनी कानूनी टीम में बदलाव किया। नई टीम ने अमेरिकी एजेंसियों के सामने कई दस्तावेज और दलीलें रखीं।

यह भी बताया गया कि एक प्रस्ताव में अमेरिका में निवेश और रोजगार सृजन का भी सुझाव दिया गया था, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

क्या अडाणी कभी गिरफ्तार हुए थे?

इस पूरे मामले में गौतम अडाणी या सागर अडाणी कभी अमेरिका में हिरासत में नहीं लिए गए। हालांकि, उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की बात सामने आई थी।

उस समय बताया गया था कि वे भारत में मौजूद थे, इसलिए अमेरिकी हिरासत में नहीं आए।

 

अडाणी ग्रुप का पक्ष

अडाणी ग्रुप ने शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को खारिज किया था। कंपनी का कहना रहा है कि उन्होंने सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों का पालन किया है।

ग्रुप का दावा है कि उनके कारोबार में पारदर्शिता रखी गई है और यह मामला तथ्यों से अधिक आरोपों पर आधारित है।

 

इस केस के खत्म होने का असर क्या होगा?

अगर अमेरिकी न्याय विभाग और SEC दोनों मामलों को बंद कर देते हैं, तो इसके कई बड़े असर हो सकते हैं –

  • अडाणी ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय छवि में सुधार
  • विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होना
  • फंडिंग और वैश्विक परियोजनाओं में आसानी
  • शेयर बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया

पिछले डेढ़ साल से यह मामला अडाणी ग्रुप के लिए एक बड़ा दबाव बना हुआ था।

 

अडाणी ग्रुप का विस्तार कैसे हुआ?

गौतम अडाणी ने 1988 में गुजरात से कमोडिटी ट्रेडिंग के जरिए अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी।

धीरे-धीरे उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार कई क्षेत्रों में किया –

  • पोर्ट और शिपिंग
  • एयरपोर्ट
  • पावर और एनर्जी
  • माइनिंग
  • लॉजिस्टिक्स
  • इंफ्रास्ट्रक्चर

आज अडाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक माना जाता है।

 

आगे क्या हो सकता है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिकी एजेंसियां इस केस को पूरी तरह खत्म करेंगी या फिर कुछ शर्तों के साथ समझौता होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मामला सेटल हो जाता है, तो अडाणी ग्रुप को वैश्विक बाजार में बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन अगर किसी भी स्तर पर जांच जारी रहती है, तो पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं मानी जाएगी।

 

निष्कर्ष:

गौतम अडाणी से जुड़ा यह अमेरिकी मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक तरफ केस खत्म होने की संभावना है, तो दूसरी तरफ अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

अगर यह मामला बंद होता है, तो यह न सिर्फ अडाणी ग्रुप के लिए बल्कि भारत के बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।