अब घर में सोना रखने की जरूरत नहीं! जानिए क्या है EGR, जिससे डिजिटल तरीके से खरीद सकते हैं असली गोल्ड

भारत में सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है। लोग सालों से गहनों, सिक्कों और गोल्ड बार के रूप में सोना खरीदते आए हैं। लेकिन समय के साथ निवेश के तरीके बदल रहे हैं। अब शेयर बाजार की तरह सोने में भी डिजिटल तरीके से निवेश किया जा सकता है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम है EGR यानी Electronic Gold Receipt।

Securities and Exchange Board of India ने जनवरी 2022 में Gold Exchange Framework लागू किया था। इसके बाद भारत में Electronic Gold Receipt सिस्टम शुरू हुआ। इसकी ट्रेडिंग अक्टूबर 2022 में BSE पर शुरू हुई, जबकि मई 2026 से National Stock Exchange पर भी इसकी शुरुआत हो गई।

EGR का मकसद लोगों को ऐसा विकल्प देना है जिसमें वे बिना फिजिकल गोल्ड संभाले असली सोने के मालिक बन सकें। इससे लॉकर खर्च, चोरी का डर, शुद्धता की चिंता और मेकिंग चार्ज जैसी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाती हैं।

 

क्या होता है EGR?

Electronic Gold Receipt यानी EGR एक डिजिटल प्रमाण पत्र है, जो यह साबित करता है कि आपके नाम पर तय मात्रा का असली सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा गया है। यह सोना SEBI से मान्यता प्राप्त वॉल्ट मैनेजर के पास स्टोर होता है।

अगर किसी निवेशक के पास 1 ग्राम EGR है, तो इसका मतलब है कि उसके नाम पर 1 ग्राम असली सोना सुरक्षित रखा गया है। यह सोना 995 या 999 शुद्धता वाला होता है।

EGR पूरी तरह डिमैट फॉर्म में रहता है। जैसे शेयर आपके डिमैट अकाउंट में दिखाई देते हैं, वैसे ही EGR भी NSDL या CDSL खाते में दिखाई देता है।

 

SEBI ने क्यों शुरू किया यह सिस्टम?

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है। लेकिन लंबे समय से देश का गोल्ड बाजार बिखरा हुआ रहा है। अलग-अलग शहरों में कीमतों में अंतर, शुद्धता को लेकर सवाल और बिना रेगुलेशन वाले कारोबार बड़ी समस्या रहे हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए SEBI ने Gold Exchange Framework शुरू किया। इसका उद्देश्य था कि देश में गोल्ड ट्रेडिंग को पारदर्शी बनाया जाए और निवेशकों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म मिले।

इस व्यवस्था के जरिए सरकार और SEBI चाहते हैं कि सोने की खरीद-बिक्री शेयर बाजार की तरह आसान और भरोसेमंद बने।

 

EGR कैसे काम करता है?

EGR का पूरा सिस्टम तीन हिस्सों में काम करता है।

 

1. गोल्ड जमा करना और EGR बनना

सबसे पहले शुद्ध सोना SEBI से रजिस्टर्ड वॉल्ट मैनेजर के पास जमा किया जाता है। वहां सोने की जांच होती है और उसकी गुणवत्ता प्रमाणित की जाती है।

इसके बाद उतनी मात्रा के बराबर EGR जारी किया जाता है और निवेशक के डिमैट खाते में भेज दिया जाता है।

हालांकि सामान्य निवेशक को खुद सोना जमा करने की जरूरत नहीं होती। वे सीधे एक्सचेंज पर जाकर EGR खरीद सकते हैं।

 

2. एक्सचेंज पर ट्रेडिंग

EGR की खरीद-बिक्री NSE और BSE के Gold Exchange Segment में होती है। इसकी कीमत बाजार में चल रहे गोल्ड रेट के हिसाब से बदलती रहती है।

इसमें ट्रेडिंग शेयर बाजार की तरह होती है और सेटलमेंट T+1 आधार पर होता है। यानी खरीद के अगले कारोबारी दिन EGR आपके डिमैट खाते में आ जाता है।

 

3. फिजिकल गोल्ड में बदलना

अगर निवेशक चाहे तो बाद में अपने EGR को असली सोने में भी बदल सकता है।

इसके लिए ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म या डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के जरिए रिक्वेस्ट देनी होती है। इसके बाद वॉल्ट मैनेजर गोल्ड बार या कॉइन के रूप में डिलीवरी देता है।

हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ चार्ज और 3% GST देना पड़ता है।

EGR buy real gold digitally

EGR खरीदने के फायदे

 

1. असली सोने का मालिकाना हक

EGR केवल डिजिटल नंबर नहीं है। इसके पीछे असली सोना रखा जाता है। यानी निवेशक वास्तव में गोल्ड का मालिक होता है।

 

2. लॉकर और सुरक्षा की चिंता खत्म

फिजिकल गोल्ड रखने पर चोरी या नुकसान का डर बना रहता है। लॉकर का खर्च भी अलग से देना पड़ता है। EGR में ऐसी समस्या नहीं होती।

 

3. शुद्धता की गारंटी

EGR के तहत रखा गया सोना SEBI के नियमों के अनुसार जांचा जाता है। इसलिए नकली या कम शुद्धता वाले सोने का खतरा नहीं रहता।

 

4. एक्सचेंज पर आसान खरीद-बिक्री

इसे शेयरों की तरह आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है। बाजार खुला रहने तक निवेशक कभी भी ट्रेड कर सकता है।

 

5. GST में राहत

जब आप एक्सचेंज पर EGR खरीदते या बेचते हैं, तब GST नहीं लगता। GST केवल तब लगता है जब EGR को फिजिकल गोल्ड में बदला जाए।

 

कौन खरीद सकता है EGR?

कोई भी व्यक्ति जिसके पास डिमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट है, वह EGR खरीद सकता है।

इसके अलावा HUF, ट्रस्ट, संस्थान, कंपनियां और कई तरह के निवेशक भी इसमें निवेश कर सकते हैं।

हालांकि हर ब्रोकर अभी EGR सुविधा नहीं देता। उदाहरण के लिए फिलहाल Groww पर EGR सपोर्ट उपलब्ध नहीं है।

 

EGR के अलग-अलग साइज

EGR कई अलग-अलग वजन में उपलब्ध है ताकि छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशक इसमें निवेश कर सकें।

इसमें 1 किलो, 100 ग्राम, 10 ग्राम, 1 ग्राम और 100 मिलीग्राम तक के विकल्प मौजूद हैं। 995 और 999 शुद्धता के अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध होते हैं।

 

EGR पर कौन-कौन से खर्च लगते हैं?

हालांकि EGR सुविधाजनक है, लेकिन इसमें कुछ खर्च भी होते हैं।

  • खरीद और बिक्री पर ब्रोकरेज फीस
  • डिमैट चार्ज
  • वॉल्ट स्टोरेज फीस
  • फिजिकल गोल्ड लेने पर डिलीवरी चार्ज
  • फिजिकल कन्वर्जन पर 3% GST

इसलिए निवेश करने से पहले इन खर्चों को समझना जरूरी है।

 

टैक्स के नियम क्या हैं?

EGR को शेयर बाजार की सिक्योरिटी माना जाता है।

अगर निवेशक इसे 12 महीने के अंदर बेचता है, तो मुनाफा Short Term Capital Gain माना जाएगा और टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।

अगर 12 महीने बाद बेचा जाता है, तो Long Term Capital Gain टैक्स 12.5% लगेगा।

एक खास बात यह है कि फिजिकल गोल्ड को EGR में बदलने या EGR को वापस गोल्ड में बदलने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता।

 

EGR और Gold ETF में क्या फर्क है?

Gold ETF और EGR दोनों एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है।

Gold ETF में निवेशक केवल फंड यूनिट खरीदता है। वह असली सोना नहीं ले सकता।

जबकि EGR में निवेशक चाहें तो बाद में फिजिकल गोल्ड की डिलीवरी ले सकता है।

यही कारण है कि कई विशेषज्ञ EGR को गोल्ड निवेश का नया और मजबूत विकल्प मान रहे हैं।

 

क्या EGR में जोखिम भी हैं?

हर निवेश की तरह EGR में भी कुछ जोखिम मौजूद हैं।

यह सिस्टम अभी नया है, इसलिए ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो सकता है। कुछ मामलों में खरीद और बिक्री के बीच कीमत का अंतर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा लंबे समय तक रखने पर स्टोरेज फीस भी बढ़ सकती है।

हालांकि SEBI के नियमों के कारण यह व्यवस्था काफी सुरक्षित मानी जा रही है।

 

क्या EGR में निवेश करना सही रहेगा?

अगर कोई निवेशक असली सोने का मालिक बनना चाहता है लेकिन घर में गोल्ड रखने की परेशानी से बचना चाहता है, तो EGR एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

यह खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो डिजिटल तरीके से सुरक्षित निवेश चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर फिजिकल गोल्ड भी लेना चाहते हैं।

सोने में निवेश के बदलते दौर में EGR को भारत के गोल्ड मार्केट का नया बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे लोगों को इसकी जानकारी बढ़ेगी, वैसे-वैसे इसका इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ सकता है।