भारत को दुनिया का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने शनिवार को ‘BHAVYA’ यानी भारत औद्योगिक विकास योजना की गाइडलाइंस जारी कर दीं। इस योजना के तहत देशभर में 100 आधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि यह योजना सिर्फ फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसका मकसद ऐसे तैयार औद्योगिक क्षेत्र बनाना है जहां कंपनियां बिना ज्यादा देरी के तुरंत काम शुरू कर सकें। यही वजह है कि इन पार्कों को “प्लग-एंड-प्ले” मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
33,660 करोड़ रुपये की बड़ी योजना
सरकार ने इस योजना के लिए कुल 33,660 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। यह योजना 2026-27 से लेकर 2031-32 तक छह सालों में लागू की जाएगी। इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में निवेश और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
पीयूष गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि राज्य सरकारें भी उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार करें। जिन राज्यों में जमीन, बिजली, पानी और कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं अच्छी होंगी, वहां निवेश तेजी से आ सकता है।
सरकार के मुताबिक शुरुआती चार महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे। पहले चरण में 50 इंडस्ट्रियल पार्क चुने जाएंगे। इनमें से पहले दो महीनों में 20 पार्क और उसके बाद अगले दो महीनों में 30 पार्कों के आवेदन लिए जाएंगे।
क्या होगा ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल?
BHAVYA योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका प्लग-एंड-प्ले मॉडल है। इसका मतलब यह है कि कंपनियों को फैक्ट्री लगाने से पहले सड़क, बिजली, पानी या सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं खुद तैयार नहीं करनी होंगी।
सरकार पहले से ही इन सभी सुविधाओं के साथ तैयार इंडस्ट्रियल जोन विकसित करेगी ताकि उद्योग जल्द शुरू हो सकें। इससे कंपनियों का समय और लागत दोनों कम होंगे।
इन पार्कों में कई आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी, जैसे –
- अंदरूनी सड़कें
- अंडरग्राउंड बिजली और पानी की लाइनें
- ड्रेनेज सिस्टम
- वेयरहाउस
- टेस्टिंग लैब
- कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट
- कर्मचारियों के लिए आवास
- स्किल डेवलपमेंट सेंटर
- डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम
सरकार का मानना है कि इससे भारत में उद्योग लगाना पहले के मुकाबले आसान होगा।

कितनी जमीन पर बनेंगे पार्क?
गाइडलाइंस के अनुसार मैदानी राज्यों में इंडस्ट्रियल पार्क के लिए कम से कम 100 एकड़ जमीन जरूरी होगी। वहीं पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह सीमा 25 एकड़ रखी गई है।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि जरूरत के हिसाब से 1,000 एकड़ तक बड़े पार्क भी विकसित किए जा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में कम जमीन होने के कारण वहां छोटे आकार के पार्कों को भी मंजूरी दी जाएगी ताकि औद्योगिक विकास हर क्षेत्र तक पहुंच सके।
राज्यों और निजी कंपनियों की साझेदारी
इस योजना में सिर्फ राज्य सरकारें ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी हिस्सा ले सकेंगी। अगर कोई राज्य किसी निजी डेवलपर के साथ मिलकर प्रस्ताव भेजता है, तो केंद्र सरकार प्रति एकड़ 50 लाख रुपये तक की सहायता दे सकती है।
सरकार चाहती है कि इंडस्ट्रियल पार्क सिर्फ सरकारी परियोजना बनकर न रह जाएं, बल्कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से तेजी से विकसित हों।
हर पार्क के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा। यह एक अलग कंपनी होगी जो पार्क की योजना, निर्माण, संचालन और रखरखाव का काम संभालेगी।
कैसे चुने जाएंगे इंडस्ट्रियल पार्क?
सरकार ने पार्क चुनने के लिए “चैलेंज बेस्ड सिस्टम” अपनाने का फैसला किया है। यानी जो राज्य बेहतर प्रस्ताव देंगे, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
इन बिंदुओं पर प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाएगा –
- मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी
- सड़क, रेल और पोर्ट से जुड़ाव
- जमीन की उपयुक्तता
- पर्यावरण प्रबंधन
- डिजिटल सुविधाएं
- निवेश की संभावनाएं
- उद्योगों के लिए तैयार माहौल
सरकार का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राज्यों को बेहतर औद्योगिक ढांचा तैयार करने की प्रेरणा मिलेगी।
PM गतिशक्ति और मेक इन इंडिया से जुड़ी योजना
BHAVYA योजना को सरकार की बड़ी आर्थिक योजनाओं से जोड़ा गया है। यह मेक इन इंडिया और PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का हिस्सा मानी जा रही है।
सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ उपभोक्ता बाजार न रहे, बल्कि दुनिया का प्रमुख उत्पादन केंद्र भी बने। इसके लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स, तेज सप्लाई चेन और मजबूत औद्योगिक नेटवर्क पर जोर दिया जा रहा है।
इन पार्कों में ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ संसाधनों के इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे उद्योगों की लागत कम होगी और पर्यावरण पर दबाव भी घटेगा।
रोजगार और निवेश बढ़ाने पर फोकस
सरकार को उम्मीद है कि BHAVYA योजना से बड़े स्तर पर रोजगार पैदा होंगे। जब एक ही क्षेत्र में फैक्ट्रियां, सप्लायर और सर्विस कंपनियां मौजूद होंगी, तो पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को फायदा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्लस्टर आधारित विकास मॉडल से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और सप्लाई चेन मजबूत होगी।
सरकार का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में पहले चरण के 50 इंडस्ट्रियल पार्क काम करना शुरू कर सकते हैं।
NICDC निभाएगी बड़ी भूमिका
योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) को दी गई है। यह संस्था पहले से देश के 13 राज्यों में 20 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजनाओं पर काम कर रही है।
इसके अलावा NICDC टेक्सटाइल मंत्रालय की PM MITRA पार्क योजना में भी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी की भूमिका निभा रही है।
सरकार ने बताया कि BHAVYA योजना की निगरानी GIS आधारित डिजिटल सिस्टम से की जाएगी। समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट और ऑडिट भी होंगे ताकि परियोजनाओं में देरी और गड़बड़ियों को रोका जा सके।
किन राज्यों ने दिखाई रुचि?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे कई राज्यों ने इस योजना में रुचि दिखाई है।
सरकार का मानना है कि जिन राज्यों में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल होगा, वहां विदेशी और घरेलू निवेशक ज्यादा आकर्षित होंगे।
भारत इस समय चीन के विकल्प के रूप में खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में BHAVYA योजना को उसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
उद्योग जगत के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में कई बार कंपनियों को जमीन, मंजूरी और बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इससे निवेश धीमा हो जाता है।
लेकिन अगर BHAVYA योजना सही तरीके से लागू होती है, तो कंपनियों को तैयार औद्योगिक क्षेत्र मिलेंगे, जहां वे जल्दी उत्पादन शुरू कर सकेंगी।
सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत में निवेश बढ़ेगा, निर्यात मजबूत होगा और देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।

