मॉस्को में अजित डोभाल की बड़ी कूटनीतिक पहल, रूस के साथ रक्षा, समुद्री और अंतरिक्ष सहयोग पर हुई अहम चर्चा

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने रूस की राजधानी मॉस्को में कई वरिष्ठ रूसी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, समुद्री संपर्क, ऊर्जा, अंतरिक्ष कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर भी भारत ने अपनी चिंता जाहिर की।

डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और ऊर्जा आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका असर दिखाई दे रहा है।

 

रूस के शीर्ष अधिकारियों से की मुलाकात

मॉस्को में अजित डोभाल ने रूस के राष्ट्रपति के सलाहकार और रूस के मैरीटाइम बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पात्रुशेव से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में हुई पिछली चर्चाओं की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में समुद्री संपर्क बढ़ाने, जहाज निर्माण, रक्षा क्षेत्र में सहयोग और ध्रुवीय क्षेत्रों में काम करने वाले नाविकों के प्रशिक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए।

भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और रणनीतिक सहयोग रहा है, और यह बैठक उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र पर भी फोकस

अपनी यात्रा के दौरान डोभाल ने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की गई।

रूसी पक्ष ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को अपने नेशनल स्पेस सेंटर और रोस्कोस्मोस जॉइंट इंडस्ट्री इंफॉर्मेशन सेंटर का दौरा भी कराया। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों देश अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं।

भारत और रूस पहले से ही कई अंतरिक्ष और वैज्ञानिक परियोजनाओं में साथ काम कर चुके हैं और आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और बढ़ सकती है।

 

ब्रिक्स बैठक और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा

अजित डोभाल ने रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक में नई दिल्ली में होने वाली आगामी ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

भारत और रूस दोनों ही ब्रिक्स समूह के प्रमुख सदस्य हैं और वैश्विक मुद्दों पर अक्सर एक-दूसरे के साथ समन्वय करते हैं।

Ajit Doval major diplomatic initiative in Moscow

पश्चिम एशिया के हालात पर जताई चिंता

मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच को संबोधित करते हुए अजित डोभाल ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जारी तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे और ऊर्जा ढांचे पर पड़ने वाले दबाव से पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है।

डोभाल ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन रास्तों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सुरक्षित और निर्बाध संचालन पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी है।

भारत ने साफ किया कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर सकारात्मक प्रयास का समर्थन करता है।

 

तेल और गैस आपूर्ति पर भी चिंता

अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि तेल और गैस की आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में वहां अस्थिरता बढ़ने से ऊर्जा कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका प्रभाव कई देशों पर पड़ेगा।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बेहद महत्वपूर्ण मानता है।

 

म्यांमार के साथ भी हुई अहम बातचीत

रूस यात्रा के दौरान अजित डोभाल ने म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टिन आंग सान से भी मुलाकात की।

दोनों पक्षों ने सुरक्षा, रक्षा, संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जुलाई में भारत यात्रा को लेकर भी बातचीत हुई। वे भारत में होने वाली BIMSTEC देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में हिस्सा लेने आएंगे।

 

आर्कटिक मार्ग पर भारत की नजर

बैठकों के दौरान रूस द्वारा विकसित किए जा रहे आर्कटिक समुद्री मार्ग पर भी चर्चा हुई। यह मार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए एक वैकल्पिक रास्ता माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग भविष्य में समुद्री परिवहन का समय कम कर सकता है और भारत को नए व्यापारिक अवसर प्रदान कर सकता है।

इसके अलावा इससे भारत को आर्कटिक क्षेत्र के संसाधनों और नए व्यापार नेटवर्क तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।

 

भारत-रूस संबंधों को मिली नई गति

मॉस्को में हुई इन बैठकों से साफ संकेत मिलता है कि भारत और रूस केवल पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहते। दोनों देश अब समुद्री संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में भी साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।

ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत और रूस के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।