डिजिटल दुनिया में भारत की बड़ी छलांग: AI ताकत में दुनिया में चौथा, डिजिटल अर्थव्यवस्था में पहुंचा पांचवें स्थान पर

भारत ने डिजिटल क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (ICRIER) की ओर से जारी “स्टेट ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी (SIDE) 2026” रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे अधिक डिजिटाइज्ड अर्थव्यवस्था बन गया है। पिछले साल भारत इस सूची में आठवें स्थान पर था, लेकिन एक साल के भीतर तीन पायदान ऊपर पहुंचकर उसने अपनी डिजिटल ताकत का प्रदर्शन किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, फिनटेक सेक्टर के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ती क्षमता ने भारत को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

 

AI की दौड़ में भारत ने कई विकसित देशों को छोड़ा पीछे

रिपोर्ट के अनुसार AI प्रदर्शन को मापने वाले CHIPS-AI इंडेक्स में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में केवल अमेरिका, चीन और सिंगापुर भारत से आगे हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत ने डिजिटल प्रदर्शन और AI क्षमता के मामले में जर्मनी, फ्रांस, जापान, ब्रिटेन और कनाडा जैसे विकसित देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव दिखाता है कि भारत अब केवल एक बड़ा डिजिटल बाजार नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र भी बन रहा है।

 

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI टैलेंट हब

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI टैलेंट पूल बन चुका है। बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक और AI विशेषज्ञ इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

भारत में स्टार्टअप्स, टेक कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच AI को लेकर तेजी से काम हो रहा है। यही कारण है कि देश वैश्विक AI इकोसिस्टम में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

 

भारत की प्रमुख उपलब्धियां

  • दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था
  • AI प्रदर्शन में चौथा स्थान
  • दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI टैलेंट पूल
  • डिजिटल माध्यम से लगभग 328 अरब डॉलर का व्यापार
  • वैश्विक AI उपयोगकर्ताओं में भारत की हिस्सेदारी करीब 26%

 

विकासशील देशों में बढ़ रहा AI का प्रभाव

रिपोर्ट के मुताबिक अब दुनिया के 72% AI उपयोगकर्ता विकासशील देशों में मौजूद हैं। यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि पहले नई तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से विकसित देशों में होता था।

भारत और चीन मिलकर दुनिया के लगभग 40% AI उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। अकेले भारत की हिस्सेदारी करीब 26% है, जो देश में AI तकनीक की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जनरेटिव AI ने इतिहास की किसी भी अन्य तकनीक की तुलना में सबसे तेजी से लोगों तक पहुंच बनाई है। लॉन्च होने के तुरंत बाद इसका इस्तेमाल विकासशील देशों में भी बड़े स्तर पर शुरू हो गया।

India takes a big leap in the digital world

डिजिटल लेनदेन ने बढ़ाई भारत की ताकत

भारत की डिजिटल सफलता में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों का बड़ा योगदान माना जा रहा है।

देश में डिजिटल माध्यम से होने वाले लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। इससे न केवल कारोबार आसान हुआ है बल्कि लाखों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसी पहल ने भारत को दुनिया के सबसे मजबूत डिजिटल नेटवर्क वाले देशों में शामिल कर दिया है।

 

फिर भी चुनौतियां कम नहीं

हालांकि रिपोर्ट में भारत की उपलब्धियों की सराहना की गई है, लेकिन कुछ बड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।

सबसे बड़ी चिंता AI क्षेत्र में निवेश को लेकर है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में होने वाले कुल निजी AI निवेश का केवल 1% हिस्सा ही भारत को मिल रहा है।

इसके अलावा उन्नत चिप निर्माण, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े AI मॉडल विकसित करने जैसी तकनीकें अभी भी कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत को AI क्षेत्र में शीर्ष देशों की बराबरी करनी है, तो अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी ढांचे में निवेश बढ़ाना होगा।

 

स्टार्टअप और यूनिवर्सिटी की साझेदारी होगी अहम

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को अपनी डिजिटल प्रगति बनाए रखने के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

नई तकनीकों पर रिसर्च, घरेलू AI मॉडल तैयार करने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इससे भारत केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि नई तकनीक विकसित करने वाले देशों की श्रेणी में भी शामिल हो सकेगा।

 

दुनिया में बदल रहा है डिजिटल नेतृत्व

रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। दुनिया की शीर्ष पांच डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में अब तीन देश – चीन, सिंगापुर और भारत – इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हैं।

यह संकेत देता है कि डिजिटल शक्ति का केंद्र अब केवल अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं है। एशिया की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और भारत इस बदलाव का प्रमुख हिस्सा बनकर उभर रहा है।

 

भारत के लिए आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने डिजिटल कनेक्टिविटी, उद्यमिता और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के दम पर मजबूत आधार तैयार कर लिया है। अब अगला कदम AI आधारित नवाचार को बढ़ावा देना, लोगों के डिजिटल भरोसे को मजबूत करना और वैश्विक निवेश आकर्षित करना होगा।

यदि भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में वह दुनिया की सबसे प्रभावशाली डिजिटल और AI अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है। फिलहाल SIDE 2026 रिपोर्ट यह साफ संकेत देती है कि भारत डिजिटल क्रांति के नए दौर में वैश्विक मंच पर तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है।

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