केरल का बड़ा फैसला: बुजुर्गों के लिए बनेगा अलग विभाग, जापान मॉडल से बदलेगी लाखों वरिष्ठ नागरिकों की जिंदगी

देश में जहां ज्यादातर राज्य अभी भी युवाओं की आबादी और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं केरल एक ऐसी चुनौती का सामना कर रहा है जो आने वाले वर्षों में पूरे भारत के सामने खड़ी हो सकती है। यह चुनौती है तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की।

इसी समस्या को देखते हुए केरल की नई सरकार ने एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है। राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए देश का पहला समर्पित विभाग और एक विशेष वरिष्ठ नागरिक आयोग (Senior Citizens Commission) बनाने की घोषणा की गई है। सरकार का कहना है कि अब बुजुर्गों की देखभाल को केवल पारिवारिक जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसे शासन और समाज की प्राथमिकता बनाना होगा।

 

क्यों बढ़ रही है चिंता?

केरल लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और लंबी आयु के कारण यहां लोग अधिक समय तक जीवित रहते हैं। दूसरी ओर, जन्म दर लगातार कम हुई है और बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए विदेशों या दूसरे राज्यों में जा चुके हैं। इसी वजह से राज्य में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

‘भारत में बुजुर्ग’ रिपोर्ट 2021 के अनुसार, वर्ष 2011 में केरल में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी 12.5% थी। अब यह बढ़कर लगभग 16.5% से 18.7% के बीच पहुंच चुकी है। अनुमान है कि 2031 तक राज्य की 20.9% आबादी वरिष्ठ नागरिकों की होगी, जबकि पूरे भारत में यह आंकड़ा लगभग 13.1% रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2051 तक केरल की करीब एक-तिहाई आबादी बुजुर्ग हो सकती है।

 

बुजुर्गों के सामने सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, अकेलेपन की भी समस्या

केरल के कई जिलों में अब ऐसे घर आम हो गए हैं जहां कभी संयुक्त परिवार रहते थे, लेकिन आज वहां सिर्फ बुजुर्ग दंपती या अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक नजर आते हैं।

बच्चों के विदेश या बड़े शहरों में बस जाने के कारण कई बुजुर्ग आर्थिक रूप से सुरक्षित होने के बावजूद भावनात्मक रूप से अकेलापन महसूस कर रहे हैं। कई मामलों में बच्चों द्वारा पैसे भेजे जाते हैं, लेकिन माता-पिता को साथ और देखभाल की कमी महसूस होती है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, बुजुर्गों में अवसाद, चिंता, डिमेंशिया और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। कई वृद्ध लोग लंबे समय तक बिस्तर पर रहने को मजबूर हैं और उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

Kerala separate department will be created for the elderly

जापान मॉडल से क्या सीख रहा है केरल?

दुनिया में सबसे अधिक बुजुर्ग आबादी वाले देशों में जापान शामिल है। वहां सरकार ने बुजुर्गों के लिए विशेष देखभाल व्यवस्था विकसित की है, जिसे अब केरल अपनी जरूरतों के अनुसार अपनाने की तैयारी कर रहा है।

जापानी मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बुजुर्गों को परिवार और समाज से अलग नहीं किया जाता। उन्हें अपने घर और परिचित माहौल में रहने की सुविधा देते हुए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

 

जापानी मॉडल की प्रमुख विशेषताएं

  • समुदाय आधारित देखभाल व्यवस्था
  • घर पर स्वास्थ्य और नर्सिंग सेवाएं
  • असिस्टेड लिविंग सुविधाएं
  • बुजुर्गों के अनुकूल सार्वजनिक ढांचा
  • स्थानीय स्तर पर सहायता नेटवर्क
  • सामाजिक गतिविधियों में वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी

केरल सरकार का मानना है कि इन सिद्धांतों को अपनाकर बुजुर्गों की जिंदगी को अधिक सम्मानजनक और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

 

क्या करेगा नया वरिष्ठ नागरिक आयोग?

सरकार द्वारा प्रस्तावित वरिष्ठ नागरिक आयोग को विशेष अधिकार दिए जाने की योजना है।

यह आयोग बुजुर्गों के साथ होने वाली उपेक्षा, दुर्व्यवहार और अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर सकेगा। साथ ही यह वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को सुझाव भी देगा।

इसके अलावा आयोग ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी नजर रखेगा। यह कानून बच्चों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करने के लिए बाध्य करता है, लेकिन कई स्थानों पर इसका पालन सही तरीके से नहीं हो रहा है।

 

राज्य में तैयार होगा नया बुजुर्ग-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर

सरकार केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसके लिए सार्वजनिक सुविधाओं में भी बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है।

योजना के तहत:

  • घरों में देखभाल के लिए प्रशिक्षित केयरगिवर्स उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
  • बुजुर्गों के लिए लो-फ्लोर बसें चलाई जाएंगी।
  • सुरक्षित पैदल मार्ग और फुटपाथ विकसित किए जाएंगे।
  • सरकारी इमारतों और अस्पतालों को व्हीलचेयर अनुकूल बनाया जाएगा।
  • बैंकों और सरकारी कार्यालयों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सरकार का उद्देश्य है कि बुजुर्गों को रोजमर्रा के कामों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

महिलाओं पर रहेगा विशेष फोकस

केरल में महिलाओं की औसत आयु पुरुषों की तुलना में अधिक है। इसका परिणाम यह है कि बड़ी संख्या में वृद्ध महिलाएं अपने जीवन के अंतिम वर्षों में अकेली रह जाती हैं।

कई विधवा महिलाएं सीमित आय, कमजोर सामाजिक सुरक्षा और भावनात्मक अकेलेपन की समस्या का सामना करती हैं। इसलिए नई नीति में वरिष्ठ महिलाओं की जरूरतों को विशेष महत्व दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्ध महिलाओं को आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है।

 

रिटायर्ड लोगों के अनुभव का भी होगा उपयोग

सरकार एक “स्किल बैंक” बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत सेवानिवृत्त शिक्षक, इंजीनियर, डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य पेशेवरों को समाज से जोड़ा जाएगा। वे युवाओं को मार्गदर्शन दे सकेंगे, डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों में सहयोग कर सकेंगे और स्थानीय विकास कार्यों में भाग ले सकेंगे।

इससे बुजुर्गों को सक्रिय जीवन जीने का अवसर मिलेगा और समाज को उनके अनुभव का लाभ भी मिलेगा।

 

क्या पूरे भारत के लिए मिसाल बनेगा केरल?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशकों में भारत की बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ने वाली है। लेकिन अभी भी अधिकांश राज्यों में इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं हो रही है।

ऐसे समय में केरल का यह कदम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि भविष्य की चुनौती को पहचानने की कोशिश माना जा रहा है।

अगर यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य राज्य भी इससे सीख लेकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर नीतियां बना सकते हैं।

 

निष्कर्ष:

केरल की नई पहल यह संदेश देती है कि बुजुर्गों की देखभाल केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है। बढ़ती उम्र, अकेलापन, स्वास्थ्य समस्याएं और सम्मानजनक जीवन जैसे मुद्दे आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाले हैं। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग विभाग और आयोग बनाने का फैसला देश में सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।