Kamikaze Drones India: ₹1,577 करोड़ का बड़ा दांव, अब दुश्मन के ठिकानों पर ‘आसमान से वार’ करेगी Indian Army!

Kamikaze Drones India

भारतीय सेना की ड्रोन क्षमता को बड़ा बूस्ट मिलने जा रहा है। Kamikaze Drones India को लेकर रक्षा मंत्रालय ने 14 अगस्त 2026 को Tata Advanced Systems Limited (TASL) और NIBE Private Limited के साथ करीब ₹1,577 करोड़ के दो अनुबंध किए हैं। इन अनुबंधों के तहत सेना के लिए Loitering Munition Systems और उनसे जुड़े उपकरण खरीदे जाएंगे। 

इन हथियार प्रणालियों की खासियत यह है कि ये लक्ष्य के ऊपर कुछ समय तक मंडरा सकती हैं और सही मौका मिलने पर उसी लक्ष्य पर हमला कर सकती हैं। आधुनिक युद्ध में ऐसे सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

Kamikaze Drones India: ₹1,577 करोड़ के इस Defence Deal में क्या मिला?

Kamikaze Drones India से जुड़ा यह सौदा भारतीय सेना की Precision Strike क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, Loitering Munition System आर्टिलरी रेजिमेंट की क्षमता बढ़ाने और सेना की समग्र ऑपरेशनल प्रभावशीलता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

यह खरीद ‘Buy Indian’ श्रेणी के तहत Fast-Track Procedure से की गई है। यानी इस सौदे में भारतीय कंपनियों से घरेलू स्तर पर उपलब्ध रक्षा प्रणालियों की खरीद को प्राथमिकता दी गई है। 

 

कौनकौन सी कंपनियां शामिल हैं?

इस Defence Deal में दो भारतीय कंपनियां शामिल हैं:

  • Tata Advanced Systems Limited (TASL) 
  • NIBE Private Limited 

यानी यह सिर्फ सेना के आधुनिकीकरण की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के घरेलू Defence Manufacturing Ecosystem को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

Kamikaze Drone या Loitering Munition क्या होता है?

Loitering Munition को आम भाषा में Kamikaze Drone कहा जाता है। यह ऐसा मानवरहित हवाई हथियार होता है जो किसी इलाके में उड़ान भरते हुए संभावित लक्ष्य की तलाश कर सकता है और लक्ष्य मिलने पर उस पर हमला करता है।

इसकी खासियत पारंपरिक मिसाइल और ड्रोन के बीच की क्षमता जैसी है। यह केवल एक तय दिशा में तुरंत हमला करने के बजाय लक्ष्य क्षेत्र में कुछ समय तक ‘Loiter’ कर सकता है।

इसी वजह से Indian Army Loitering Munitions को आधुनिक युद्ध में Precision Strike के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सेना को क्यों चाहिए इतने Unmanned Systems?

भारतीय सेना ने भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में Unmanned Aerial Systems और Loitering Munitions को शामिल करने की योजना बनाई है।

सेना के Technology Roadmap में अलगअलग भूमिकाओं के लिए करीब 80 प्रकार के Unmanned Systems की जरूरत बताई गई है। इनमें Intelligence, Surveillance and Reconnaissance यानी ISR, Precision Strike, Munition Dropping, Air Defence, Jamming, Mine Warfare, Data Relay और Logistics जैसी भूमिकाएं शामिल हैं।

इससे साफ है कि Indian Army Drone Procurement का उद्देश्य सिर्फ हमला करने वाले ड्रोन खरीदना नहीं, बल्कि युद्ध के अलगअलग स्तरों पर Unmanned Technology का इस्तेमाल बढ़ाना है।

 

Drone Warfare क्यों बदल रहा है आधुनिक युद्ध?

यूक्रेन से लेकर मध्य पूर्व तक हाल के संघर्षों ने दिखाया है कि छोटे और अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन भी युद्ध के मैदान में बड़ा असर डाल सकते हैं।

Loitering Munitions की मदद से सेना को लक्ष्य पर तेजी से Precision Strike करने की क्षमता मिलती है। वहीं Drone Swarms और अलगअलग तरह के Unmanned Systems Surveillance और Target Identification में भी उपयोगी हो सकते हैं।

भारत भी इसी बदलते युद्धक्षेत्र को देखते हुए अपनी Drone Warfare क्षमता को तेजी से विकसित कर रहा है।

 

‘Global Drone Hub’ बनना चाहता है भारत

भारत की रणनीति सिर्फ अपनी सेना के लिए ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं है। सरकार देश को Drone Manufacturing का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले भारत को 2030 तक Global Drone Hub के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। 

इसी दिशा में घरेलू Defence Companies को बढ़ावा, स्वदेशी तकनीक, निजी क्षेत्र की भागीदारी और Defence Exports पर फोकस बढ़ाया जा रहा है।

 

Tata और NIBE के लिए भी क्यों अहम है यह Deal?

₹1,577 करोड़ का यह Indian Army Drone Deal घरेलू रक्षा उद्योग के लिए बड़ा अवसर है। इससे भारतीय कंपनियों को Advanced Unmanned Systems के क्षेत्र में उत्पादन और तकनीकी क्षमता बढ़ाने का मौका मिलेगा।

सरकार पिछले कुछ वर्षों से Defence Procurement में Domestic Vendors और Indigenous Technology को प्राथमिकता दे रही है। Loitering Munitions भी पहले से भारतीय सेना के आधुनिक Unmanned Arsenal का हिस्सा बन रहे हैं। 

भारत की Defence Strategy में बड़ा बदलाव

भारत की Defence Strategy अब सिर्फ पारंपरिक हथियारों और प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना चाहती। सेना के रोडमैप में Surveillance से लेकर Strike, Communication और Logistics तक Unmanned Systems की भूमिका बढ़ाने की योजना दिखाई देती है।

 

Kamikaze Drones India की यह खरीद इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा हैजहां भविष्य के युद्ध में मानव सैनिकों के साथसाथ Autonomous और Unmanned Platforms भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

निष्कर्ष

Kamikaze Drones India को लेकर ₹1,577 करोड़ की यह खरीद Indian Army की Precision Strike और Unmanned Warfare क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। Tata Advanced Systems और NIBE के साथ हुआ यह सौदा एक तरफ सेना को आधुनिक Loitering Munitions देगा, वहीं दूसरी तरफ भारत के स्वदेशी Defence Manufacturing Ecosystem को भी बढ़ावा देगा।

आने वाले वर्षों में अगर भारत अपने ड्रोन निर्माण, तकनीक और निर्यात क्षमता को तेजी से बढ़ाता है, तो Kamikaze Drones India सिर्फ सेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत की Global Defence Manufacturing Strategy का भी महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

 

FAQs

  1. Kamikaze Drones India से जुड़ी ₹1,577 करोड़ की Deal क्या है?
    रक्षा मंत्रालय ने Indian Army के लिए Loitering Munition Systems और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए Tata Advanced Systems और NIBE के साथ करीब ₹1,577 करोड़ के दो अनुबंध किए हैं।
  2. Loitering Munition क्या होता है?
    यह एक मानवरहित हवाई हथियार प्रणाली है जो लक्ष्य क्षेत्र में कुछ समय तक मंडरा सकती है और लक्ष्य मिलने पर उस पर Precision Strike कर सकती है।
  3. Indian Army Drone Deal किन कंपनियों से हुआ है?
    इस सौदे में Tata Advanced Systems Limited और NIBE Private Limited शामिल हैं।
  4. Indian Army को Kamikaze Drones की जरूरत क्यों है?
    इनका इस्तेमाल Precision Strike और Tactical Targets को निशाना बनाने जैसी भूमिकाओं में किया जा सकता है। रक्षा मंत्रालय भी Loitering Munitions को सेना की Operational Effectiveness बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण प्रणाली मानता है।
  5. क्या भारत Drone Manufacturing में Global Hub बनना चाहता है?
    हां। भारत ने 2030 तक Global Drone Hub बनने का लक्ष्य रखा है और घरेलू Drone तथा Counter-Drone Technology के Design, Development, Manufacturing और Export को बढ़ावा दिया जा रहा है।