PoK Clashes 11 Killed: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में क्यों भड़की हिंसा, 11 लोगों की मौत के पीछे क्या है पूरा विवाद?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। रावलकोट और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में नागरिकों के साथ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

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यह हिंसा ऐसे समय में हुई है जब PoK में जुलाई के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि क्षेत्र की राजनीति, प्रतिनिधित्व और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष से भी जुड़ा हुआ है।

आखिर क्यों शुरू हुआ विवाद?

ताजा विवाद की जड़ PoK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए रखी गई हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में जाकर बसे थे।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो जाता है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों का फायदा कुछ चुनिंदा राजनीतिक परिवारों और दलों को मिलता है, जबकि स्थानीय आबादी की समस्याएं पीछे छूट जाती हैं।

इसी मांग को लेकर JAAC लंबे समय से आंदोलन चला रहा है और आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग कर रहा है।

JAAC पर प्रतिबंध के बाद भड़का गुस्सा

तनाव तब और बढ़ गया जब PoK सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना है कि संगठन की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थीं।

प्रतिबंध के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इससे प्रदर्शन और उग्र हो गए।

रविवार को एक JAAC कार्यकर्ता की कथित पुलिस फायरिंग में मौत के बाद बड़ी संख्या में समर्थक अस्पताल के बाहर जमा हो गए। जब पुलिस ने भीड़ को हटाने की कोशिश की तो स्थिति हिंसक हो गई और दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई।

 

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग

प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों और शॉटगन से हमला किया, जिसमें चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें छह प्रदर्शनकारी मारे गए।

दूसरी तरफ JAAC और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया और नागरिकों को निशाना बनाया गया।

इसी वजह से घटना को लेकर दोनों पक्षों की कहानी अलग-अलग दिखाई दे रही है।

 

सिर्फ आरक्षित सीटों का मुद्दा नहीं है मामला

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हिंसा सिर्फ 12 सीटों के विवाद तक सीमित नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों में PoK में महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ा है। JAAC इन्हीं मुद्दों को उठाकर लगातार आंदोलन करता रहा है।

2024 और 2025 में भी बिजली दरों और आटे की बढ़ती कीमतों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। ऐसे में मौजूदा आंदोलन आर्थिक और राजनीतिक दोनों तरह की नाराजगी का मिश्रण माना जा रहा है।

 

चुनाव से पहले बढ़ी सरकार की चिंता

PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में हिंसा का बढ़ना पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले किसी भी बड़े आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन सख्ती दिखा रहा है, जबकि विपक्षी और स्थानीय समूह इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं।

स्थिति को देखते हुए कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा है और बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर निगरानी रखी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी चिंता

PoK में बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान खींचा है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है।

इन देशों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में सड़कें बंद हो सकती हैं, संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ सकती है।

वहीं पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध और हिंसा पर चिंता जताते हुए सरकार से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है।

 

PoK में आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल PoK में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। JAAC ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि प्रशासन सख्त कार्रवाई के मूड में दिखाई दे रहा है।

अगर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत नहीं होती, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। खासकर चुनाव से पहले यह संकट PoK की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

 

निष्कर्ष

PoK clashes 11 killed की यह घटना सिर्फ एक हिंसक झड़प नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक समस्याओं और प्रशासनिक असंतोष का परिणाम मानी जा रही है। JAAC पर प्रतिबंध और विधानसभा की आरक्षित सीटों को लेकर विवाद ने पहले से मौजूद नाराजगी को और बढ़ा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव से पहले सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं।

 

FAQs

What caused the clashes in PoK?

PoK में झड़पों की मुख्य वजह JAAC पर लगाया गया प्रतिबंध और विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर चल रहा विवाद बताया जा रहा है।

 

How many people were killed in PoK protests?

रिपोर्ट्स के अनुसार हिंसा में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है, जिनमें नागरिक और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं।

 

Where did the PoK violence happen?

सबसे ज्यादा हिंसा रावलकोट और उसके आसपास के इलाकों में हुई।

 

Which group was involved in the protest?

प्रदर्शनों का नेतृत्व जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही थी, जिस पर हाल ही में प्रतिबंध लगाया गया है।

 

Why is JAAC demanding removal of reserved seats?

JAAC का कहना है कि 12 आरक्षित सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो जाता है, इसलिए इन्हें खत्म किया जाना चाहिए।