Bangladesh BRICS SCO Membership Russia Support को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश ने BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की सदस्यता हासिल करने के लिए रूस से आधिकारिक समर्थन मांगा है। यह मांग मॉस्को में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार खलीलुर रहमान और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच हुई बैठक में उठाई गई।
बांग्लादेश का मानना है कि BRICS और SCO जैसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूहों में शामिल होकर वह अपनी आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। वहीं रूस ने इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिससे ढाका की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
खलीलुर रहमान तीन दिवसीय दौरे पर रूस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की और BRICS तथा SCO की सदस्यता के लिए समर्थन मांगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार, रूस ने इस अनुरोध पर सकारात्मक रुख दिखाया है।

बैठक में दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों यानी “ग्लोबल साउथ” के सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा की। बांग्लादेश चाहता है कि वैश्विक संस्थाओं में उसकी भूमिका और प्रभाव बढ़े, जिसके लिए BRICS और SCO की सदस्यता अहम मानी जा रही है।
BRICS में शामिल होना क्यों चाहता है बांग्लादेश?
BRICS दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। बाद में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गए।
बांग्लादेश ने 2023 में BRICS सदस्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। अब रूस का समर्थन मिलने से उसकी संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक BRICS की सदस्यता मिलने से बांग्लादेश को निवेश, व्यापार, विकास वित्त और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंचों पर अधिक प्रभाव हासिल हो सकता है।

SCO क्या है और बांग्लादेश को इससे क्या फायदा होगा?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक प्रमुख यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है। इसमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
यदि बांग्लादेश SCO का सदस्य बनता है तो उसे क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भागीदारी का मौका मिलेगा। साथ ही मध्य एशिया और यूरेशियाई देशों के साथ उसके संबंध और मजबूत हो सकते हैं।

रूस-बांग्लादेश संबंधों पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। बांग्लादेश ने रूस से यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन (EEC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने में मदद मांगी।
इसके अलावा ढाका ने रूसी बाजार में अपने उत्पादों के लिए शुल्क-मुक्त और कोटा-मुक्त पहुंच की मांग भी रखी। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 2 अरब डॉलर से अधिक का है।
रूपपुर परमाणु परियोजना पर क्या चर्चा हुई?
बैठक में बांग्लादेश के सबसे बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस परियोजना का निर्माण रूस की मदद से हो रहा है।
संयंत्र की पहली इकाई अप्रैल 2026 में शुरू हो चुकी है, जबकि दूसरी इकाई इसी वर्ष चालू होने की उम्मीद है। पूरी तरह संचालन शुरू होने के बाद यह परियोजना बांग्लादेश की कुल बिजली जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर सकती है।
रोहिंग्या मुद्दे पर रूस का समर्थन
रूस ने एक बार फिर म्यांमार में रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी का समर्थन किया है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
साथ ही रूस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के अध्यक्ष चुने जाने पर खलीलुर रहमान को बधाई दी और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को मजबूत बनाने के प्रयासों का समर्थन किया।
बांग्लादेश के लिए क्यों अहम है यह कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS और SCO की सदस्यता हासिल करने की कोशिश बांग्लादेश की नई विदेश नीति का हिस्सा है। ढाका अब केवल पारंपरिक साझेदारों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उभरते वैश्विक मंचों में अपनी जगह मजबूत करना चाहता है।
रूस जैसे प्रभावशाली देश का समर्थन मिलने से बांग्लादेश की दावेदारी को मजबूती मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला BRICS और SCO के सदस्य देशों की सामूहिक सहमति से ही होगा।
निष्कर्ष
Bangladesh BRICS SCO Membership Russia Support की यह पहल दिखाती है कि बांग्लादेश वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए सक्रिय कूटनीति अपना रहा है। रूस के सकारात्मक रुख से उसकी उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन BRICS और SCO की सदस्यता का रास्ता अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश इन दोनों महत्वपूर्ण संगठनों में जगह बना पाता है या नहीं।
FAQs
Bangladesh BRICS SCO Membership Russia Support का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि बांग्लादेश ने BRICS और SCO की सदस्यता पाने के लिए रूस से आधिकारिक समर्थन मांगा है।
बांग्लादेश BRICS में क्यों शामिल होना चाहता है?
BRICS की सदस्यता से बांग्लादेश को आर्थिक सहयोग, निवेश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभाव हासिल हो सकता है।
SCO क्या है?
SCO एक क्षेत्रीय राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसमें भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान समेत 10 सदस्य देश शामिल हैं।
क्या बांग्लादेश BRICS या SCO का सदस्य बन गया है?
नहीं, फिलहाल बांग्लादेश सदस्य नहीं बना है। वह सदस्यता के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
रूस की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
रूस BRICS और SCO दोनों का प्रमुख सदस्य है। उसका समर्थन बांग्लादेश की सदस्यता की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।

