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मणिपुर में छह नागा ग्रामीणों की हत्या का मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसने राज्य की पहले से जटिल जातीय और राजनीतिक स्थिति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने आरोप लगाया है कि इस घटना में एक ऐसा हथियारबंद कुकी समूह शामिल हो सकता है जो सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते (Suspension of Operations Pact) के तहत आता है। यह पहली बार है जब सरकार के किसी वरिष्ठ सदस्य ने सार्वजनिक रूप से इस तरह का आरोप लगाया है।
डिप्टी CM का यह बयान ऐसे समय आया है जब नागा संगठनों ने छह लोगों की हत्या के विरोध में प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन हाईवे नाकाबंदी शुरू कर रखी है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों के बावजूद जातीय तनाव क्यों कम नहीं हो रहा।

क्या है छह नागा ग्रामीणों की हत्या का मामला?
जानकारी के अनुसार, 13 मई को कांगपोकपी जिले के कोंसाखुल गांव के छह नागा ग्रामीण लापता हो गए थे। बाद में 10 जून को सुरक्षा बलों ने उनके शव बरामद किए। यह घटना उस समय सामने आई जब नागा समुदाय ने कथित तौर पर 14 कुकी लोगों को रिहा किया था, जिन्हें उसी दिन अगवा किए जाने का दावा किया गया था।
नागा संगठनों का कहना है कि उन्होंने मानवीय आधार और चर्च संगठनों की अपील पर कुकी लोगों को छोड़ा था, लेकिन इसके बाद छह नागा ग्रामीणों की हत्या ने समुदाय में भारी नाराजगी पैदा कर दी।
मणिपुर के उपमुख्यमंत्री ने क्या कहा ?
उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस अपराध को अंजाम देने वाला समूह SoO समझौते का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि लोगों की हत्या कर शवों के साथ अमानवीय व्यवहार करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
डिखो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि SoO के तहत आने वाले हथियारबंद समूहों को नियंत्रित किया जाना चाहिए ताकि राज्य में शांति स्थापित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर के लोग शांति चाहते हैं और मौजूदा हालात को जल्द नियंत्रित करना जरूरी है।
हालांकि मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने किसी विशेष संगठन का नाम नहीं लिया और कहा कि मामले की जांच NIA कर रही है।
Suspension of Operations (SoO) Pact क्या है?
सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी SoO समझौता वर्ष 2008 में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कई कुकी उग्रवादी संगठनों के बीच हुआ था।
इस समझौते का उद्देश्य हथियारबंद संघर्ष को रोकना और राजनीतिक बातचीत के जरिए समाधान तलाशना था। समझौते के तहत शामिल संगठनों को तय कैंपों में रहना होता है और बदले में सुरक्षा बल उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं करते।
समय-समय पर इस समझौते का नवीनीकरण होता रहा है। हालांकि राज्य के कई संगठन आरोप लगाते रहे हैं कि कुछ समूह इस व्यवस्था का फायदा उठाकर अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं।
किस कुकी समूह पर आरोप लगाया गया है?
डिप्टी CM ने किसी संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन नागा संगठनों ने कुकी नेशनल फ्रंट (P) पर संदेह जताया है। यह संगठन SoO व्यवस्था के तहत आने वाले समूहों में शामिल बताया जाता है।
दूसरी ओर कुकी समुदाय के नेताओं और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने इन आरोपों को खारिज किया है। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी संगठन की भूमिका आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है।
Naga-Kuki Conflict की पृष्ठभूमि क्या है?
मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव कोई नया मुद्दा नहीं है। पहाड़ी इलाकों में दोनों समुदायों की आबादी रहती है और लंबे समय से भूमि, प्रशासनिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद रहे हैं।

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हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की राजनीति में मैतेई-कुकी विवाद अधिक चर्चा में रहा, लेकिन नागा और कुकी समुदायों के बीच भी समय-समय पर तनाव देखने को मिला है। हालिया हत्या कांड ने इस पुराने विवाद को फिर सामने ला दिया है।
मणिपुर की सामाजिक संरचना को समझना क्यों जरूरी है?
मणिपुर की आबादी मुख्य रूप से तीन बड़े समूहों में बंटी हुई है। मैतेई समुदाय राज्य की कुल आबादी का लगभग 53 प्रतिशत है और मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहता है। दूसरी ओर नागा और कुकी जनजातियां पहाड़ी क्षेत्रों में रहती हैं।
राज्य का लगभग 90 प्रतिशत भूभाग पहाड़ी है, जबकि इंफाल घाटी केवल 10 प्रतिशत क्षेत्र में फैली हुई है। इसके बावजूद आधे से ज्यादा लोग घाटी में रहते हैं। भूमि और संसाधनों को लेकर यही असंतुलन लंबे समय से विवाद की वजह बना हुआ है।
मैतेई समुदाय और ST दर्जे की मांग ने कैसे बढ़ाया तनाव?
मणिपुर में हालिया हिंसा की बड़ी वजह मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग रही है। मैतेई संगठनों का तर्क है कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और जमीन की सुरक्षा के लिए ST दर्जा जरूरी है। वहीं नागा और कुकी समुदायों को डर है कि अगर मैतेई समुदाय को यह दर्जा मिल गया तो उन्हें मिलने वाले आरक्षण और भूमि अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे पर 2023 में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी, जिसने पूरे राज्य को प्रभावित किया।
सरकार की प्रतिक्रिया क्या रही?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
उन्होंने बताया कि मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि चाहे कोई मंत्री, अधिकारी या किसी भी संगठन का सदस्य क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर उसे कानून के अनुसार सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब तक अवैध हथियार पूरी तरह जमा नहीं कराए जाते, तब तक राज्य में स्थायी शांति स्थापित करना मुश्किल रहेगा।
SoO समझौते को खत्म करने की मांग क्यों उठ रही है?
मैतेई और नागा संगठनों का एक वर्ग लंबे समय से SoO समझौते को खत्म करने की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था की वजह से कुछ हथियारबंद समूहों को अप्रत्यक्ष सुरक्षा मिलती है। डिप्टी CM के ताजा बयान के बाद यह मांग और तेज हो सकती है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार का मानना है कि किसी भी फैसले से पहले जांच और व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल पूरे मामले की निगाह NIA की जांच पर टिकी हुई है। यदि जांच में किसी SoO समूह की भूमिका सामने आती है तो मणिपुर की सुरक्षा नीति और शांति प्रक्रिया पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सुरक्षा कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। राज्य में स्थायी शांति के लिए विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा बहाल करना, राजनीतिक संवाद बढ़ाना और लंबे समय से चले आ रहे भूमि तथा पहचान संबंधी विवादों का समाधान करना भी जरूरी होगा।
FAQ
Q1. What allegation has the Manipur Deputy CM made?
उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने आरोप लगाया है कि छह नागा ग्रामीणों की हत्या में SoO समझौते के तहत आने वाला एक हथियारबंद समूह शामिल था।
Q2. What is the Suspension of Operations (SoO) pact?
यह 2008 में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कई कुकी संगठनों के बीच हुआ समझौता है, जिसका उद्देश्य हिंसा रोककर राजनीतिक बातचीत को बढ़ावा देना था।
Q3. Which Kuki group has been accused?
नागा संगठनों ने कुकी नेशनल फ्रंट (P) का नाम लिया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
Q4. What is the background of the Naga-Kuki conflict?
भूमि अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय नियंत्रण जैसे मुद्दों को लेकर नागा और कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
Q5. How has the government responded to the allegations?
राज्य सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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