Image Credit: Dainik Bhasakr
Tata iPhone Parts Plant एक बार फिर चर्चा में है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के होसुर स्थित iPhone कंपोनेंट्स प्लांट को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि यदि कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं देती तो फैक्ट्री की बिजली काटी जा सकती है और उसे बंद भी किया जा सकता है। आरोप है कि प्लांट से निकलने वाले वेस्टवाटर ने आसपास के खेतों और खुले कुओं के भूजल को दूषित कर दिया है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, Apple की भारत में तेजी से बढ़ती सप्लाई चेन

Tata iPhone Parts Plant पर क्या आरोप लगे हैं?
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, Tata iPhone Parts Plant से निकलने वाला गंदा पानी फैक्ट्री परिसर के भीतर बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग पोंड में छोड़ा गया था। आरोप है कि यह तालाब ओवरफ्लो हो गया, जिससे आसपास के कृषि क्षेत्रों और खुले कुओं में पानी मिल गया और भूजल प्रभावित हुआ।
बोर्ड का कहना है कि पानी की गुणवत्ता में गिरावट की शिकायत किसानों की तरफ से मिली थी। कई इलाकों में पानी में बदबू और असामान्य बदलाव की बात सामने आई, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
किसानों की शिकायत और 5 बार हुआ निरीक्षण
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह विवादित प्लांट तमिलनाडु के होसुर में स्थित है, जो टेक हब बेंगलुरु से करीब 25 मील दक्षिण में है। इस प्लांट में मुख्य रूप से आईफोन के बैक पैनल और अन्य अहम पुर्जे बनाए जाते हैं।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्लांट के आसपास स्थित कृषि भूमि के मालिकों ने प्रदूषण बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई। पी. पुष्पराज नाम के एक स्थानीय किसान ने बताया कि प्लांट से निकलने वाला पानी बहुत “गंदा और बदबूदार” था। उन्होंने आशंका जताई कि इस दूषित पानी की वजह से उनकी फसलों की पैदावार भी प्रभावित हुई है।
किसानों की इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, प्रदूषण बोर्ड ने दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच इस कारखाने का कुल पांच बार निरीक्षण किया। 25 मई 2026 को बोर्ड ने तीन पन्नों का एक नोटिस जारी किया। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया कि टाटा ने अपने परिसर में बने ‘वर्षा जल संचयन तालाब’ (Rain Water Harvesting Pond) में गंदा पानी छोड़ दिया था। यह तालाब ओवरफ्लो हो गया और इसका दूषित पानी आसपास के खेतों में मौजूद खुले कुओं तक पहुँच गया, जिससे भूजल पूरी तरह खराब हो गया।
नोटिस में यह भी बताया गया कि बोर्ड ने इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी कंपनी को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कंपनी ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
टाटा का पक्ष: “हम नियमों का पालन कर रहे हैं”
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इन गंभीर आरोपों पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना बचाव किया है। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र लेबोरेटरी (Independent Laboratory) से इस पूरे मामले की जांच करवाई है।
टाटा का दावा है कि इस स्वतंत्र जांच में यह सामने आया है कि कंपनी सभी नियामक मानकों (Regulatory Norms) का पूरी तरह से पालन कर रही है। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि वह “जिम्मेदार व्यावसायिक तौर-तरीकों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
टाटा ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना विस्तृत जवाब सौंप दिया है। हालाँकि, कंपनी ने सार्वजनिक रूप से इस जवाब की बारीक जानकारियाँ साझा नहीं की हैं। सोमवार को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन के अधिकारियों की एक टीम ने किसानों के साथ मिलकर उन खेतों का दौरा किया जहाँ पानी दूषित होने की शिकायतें की गई थीं। अधिकारी एन. वेलु ने कहा कि वे स्थिति का आकलन करने आए हैं।
एपल के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स क्यों है महत्वपूर्ण?
एपल इस समय अपनी “चाइना प्लस वन” रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य आईफोन निर्माण (iPhone Manufacturing) के लिए चीन पर निर्भरता कम करना है। इस योजना में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एक मुख्य कड़ी है। ताइवान की दिग्गज कंपनी फॉक्सकॉन के बाद, दक्षिण एशिया में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ही एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर बन चुकी है।
मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट (Counterpoint) के अनुसार, चार साल पहले दुनिया भर में बनने वाले कुल आईफोन्स में भारत की हिस्सेदारी केवल 6 प्रतिशत थी। लेकिन उत्पादन में तेज विस्तार के कारण, साल 2026 में इसके बढ़कर 26 प्रतिशत होने का अनुमान है। ऐसे में टाटा के इस होसुर प्लांट में उत्पादन रुकने से एपल के ग्लोबल सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है।
एपल की भारत सप्लाई चेन से जुड़े पिछले विवाद
यह पहली बार नहीं है जब एपल के लिए काम करने वाली भारतीय फैक्ट्रियों में कोई रुकावट या विवाद सामने आया हो।
- आग लगने की घटनाएँ: सितंबर 2024 में इसी होसुर प्लांट में भीषण आग लग गई थी, जिससे कुछ समय के लिए आईफोन कंपोनेंट्स का उत्पादन रोकना पड़ा था। इससे पहले सितंबर 2023 में एपल के पूर्व सप्लायर पेगाट्रॉन (Pegatron) के प्लांट में भी आग लगने से कई दिनों तक काम ठप रहा था।
- कामगारों से जुड़े विवाद: साल 2024 में एक जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि फॉक्सकॉन अपने एक भारतीय प्लांट में असेंबली लाइन की नौकरियों से विवाहित महिलाओं को कथित तौर पर दूर रख रहा था। हालाँकि, फॉक्सकॉन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सभी कानूनों के पालन का दावा किया था।
प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर क्या हैं सरकार और एपल के नियम?
भारत में पर्यावरण मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण विभाग औद्योगिक नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त रवैया अपनाते हैं। पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही में संसद में बताया था कि पिछले पांच सालों में 5 लाख से अधिक उद्योगों की जांच की गई, जिनमें से 4.4% कारखाने नियमों का उल्लंघन करते पाए गए और 3,600 फैक्ट्रियों को बंद कर दिया गया।
दूसरी ओर, एपल के अपने सप्लायर्स के लिए बेहद कड़े “सप्लायर कोड ऑफ कंडक्ट” (Supplier Code of Conduct) होते हैं। इनमें कारखाने से निकलने वाले वेस्टवाटर (गंदे पानी) के सुरक्षित निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सख्त गाइडलाइंस शामिल होती हैं। यदि कोई सप्लायर बार-बार इन नियमों की अनदेखी करता है, तो एपल उसके साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट रद्द भी कर सकता है।
फिलहाल इस मामले में एपल और तमिलनाडु सरकार की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की जांच जारी है।
FAQ
Q1. Why is Tata’s Hosur plant facing a shutdown threat?
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने आरोप लगाया है कि टाटा के होसुर प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी ने आसपास के खेतों के भूजल को दूषित कर दिया है। इसी कारण बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो प्लांट की बिजली काटकर उसे बंद कर दिया जाएगा।
Q2. What wastewater discharge issues have been reported?
किसानों की शिकायत और बोर्ड के 5 निरीक्षणों के अनुसार, टाटा ने अपने परिसर में मौजूद वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) तालाब में कारखाने का गंदा पानी छोड़ दिया था। तालाब के ओवरफ्लो होने से यह दूषित पानी आसपास के खेतों और खुले कुओं में चला गया, जिससे पानी से बदबू आने लगी और फसलें प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
Q3. How could the shutdown affect Apple’s supply chain?
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है। कंपनी चीन के बाहर अपना उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में होसुर प्लांट बंद होने से दुनिया भर में आईफोन कंपोनेंट्स की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे एपल की मैन्युफैक्चरिंग रफ्तार धीमी पड़ जाएगी।
Q4. What products are manufactured at the Hosur facility?
तमिलनाडु के होसुर स्थित इस टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कारखाने में मुख्य रूप से आईफोन (iPhone) के बैक पैनल (Back Panels) और अन्य जरूरी पुर्जे बनाए जाते हैं।
Q5. What actions are authorities taking regarding the plant?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, जिला प्रशासन की एक टीम ने किसानों के साथ खेतों और कुओं का निरीक्षण किया है ताकि स्थिति का सही आकलन कर आगे की कार्रवाई की जा सके।

