Venezuela earthquakes: 36 सेकेंड में आए दो महाभूकंप… आखिर वेनेजुएला में क्यों आई इतनी बड़ी तबाही?

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Venezuela earthquakes: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। कुछ ही सेकेंड के भीतर धरती दो बार इतनी जोर से कांपी कि हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, हवाई अड्डे का हिस्सा टूट गया, बिजली और इंटरनेट सेवाएं ठप हो गईं और लाखों लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकल आए। यह सिर्फ एक सामान्य भूकंप नहीं था, बल्कि कुछ ही सेकेंड के अंतराल में आए दो बेहद शक्तिशाली भूकंपों की ऐसी श्रृंखला थी जिसने पूरे देश में राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी।

स्थानीय समय के अनुसार बुधवार शाम 6 बजकर 04 मिनट पर सबसे पहला भूकंप आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.2 दर्ज की गई। लोग अभी इस पहले झटके से संभल भी नहीं पाए थे कि लगभग 36 सेकेंड बाद शाम 6 बजकर 05 मिनट पर दूसरा और उससे भी ज्यादा शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप आ गया। लगातार दो बड़े झटकों ने इमारतों को संभलने का मौका ही नहीं दिया और कई जगहों पर भवन धराशायी हो गए। भारत में उस समय गुरुवार तड़के लगभग 3 बजकर 34 मिनट और 3 बजकर 35 मिनट हो रहे थे।

Venezuela earthquakes: पहले एक मिनट में ही दर्ज हुए 20 आफ्टरशॉक, लोगों में मच गई दहशत

दो बड़े भूकंप आने के बाद धरती की हलचल तुरंत नहीं रुकी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार अगले लगभग 60 सेकेंड के भीतर 20 आफ्टरशॉक भी दर्ज किए गए। लगातार आते झटकों के कारण लोगों में भारी दहशत फैल गई। हजारों लोग बिना कुछ सामान उठाए अपने घरों से बाहर भागे और खुले मैदानों या सड़कों पर शरण लेने लगे।

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भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में इतने अधिक आफ्टरशॉक इस बात का संकेत हैं कि जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों में अभी भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए आने वाले दिनों में भी और झटके महसूस किए जा सकते हैं।

अब तक कितना नुकसान हुआ?

समाचार एजेंसी AP के अनुसार शुरुआती सरकारी आंकड़ों में 164 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 971 से अधिक लोग घायल बताए गए हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और प्रशासन को आशंका है कि मलबे में दबे लोगों के मिलने के बाद मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के PAGER मॉडल ने भी इस भूकंप को बेहद गंभीर श्रेणी में रखा है। एजेंसी के अनुमान के मुताबिक इस आपदा में 10 हजार से अधिक लोगों की मौत होने की 44 प्रतिशत संभावना है। वहीं लगभग 30 प्रतिशत संभावना ऐसी भी जताई गई है कि मृतकों की संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह वास्तविक मौतों का आंकड़ा नहीं बल्कि वैज्ञानिक मॉडल के आधार पर संभावित अनुमान है। अंतिम संख्या राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन आया भूकंप, इसलिए बढ़ गया नुकसान

इस त्रासदी को और भी भयावह बनाने वाली बात यह रही कि जिस दिन भूकंप आया, उसी दिन पूरे वेनेजुएला में राष्ट्रीय अवकाश था।

देश में 1821 में स्पेन के खिलाफ मिली ऐतिहासिक जीत की वर्षगांठ मनाई जा रही थी। इस कारण स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और अधिकांश निजी संस्थान बंद थे। बड़ी संख्या में लोग अपने परिवारों के साथ घरों में मौजूद थे।

जब पहला भूकंप आया तो अधिकांश लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। उसके कुछ ही सेकेंड बाद दूसरा और ज्यादा शक्तिशाली झटका आ गया, जिससे कई इमारतें सीधे लोगों के ऊपर ही गिर गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भूकंप कार्यदिवस पर आता तो कई लोग दफ्तरों या खुले स्थानों पर होते और शायद जान-माल का नुकसान कुछ कम हो सकता था।

 

सबसे ज्यादा असर किन इलाकों में पड़ा?

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी कराकस (Caracas) से लगभग 290 किलोमीटर पश्चिम में था। हालांकि झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि राजधानी समेत देश के कई बड़े शहरों में इन्हें जोरदार तरीके से महसूस किया गया।

कई स्थानों पर बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि अनेक इमारतें इतनी बुरी तरह झुक गईं कि प्रशासन को उन्हें खाली कराना पड़ा। कई पुराने भवनों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं। अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक इमारतों को भी नुकसान पहुंचा।

 

कराकस एयरपोर्ट की छत गिरी, उड़ानें रोकनी पड़ीं

भूकंप का असर राजधानी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे कराकस एयरपोर्ट पर भी दिखाई दिया। तेज झटकों के कारण एयरपोर्ट टर्मिनल की छत का एक हिस्सा गिर गया, जिससे पूरे इलाके में धूल का बड़ा गुबार फैल गया।

सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने एयरपोर्ट संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कुछ विमानों को अन्य एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया।

इंजीनियरों की टीम पूरे एयरपोर्ट परिसर की जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रनवे, कंट्रोल टावर और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएं सुरक्षित हैं या नहीं।

 

बिजली, पानी, गैस और इंटरनेट सेवाएं भी ठप

भूकंप के कारण केवल इमारतों को ही नुकसान नहीं पहुंचा बल्कि पूरे बुनियादी ढांचे पर इसका असर दिखाई दिया। तेज झटकों से कई बिजली लाइनें टूट गईं और अनेक सबस्टेशनों को नुकसान पहुंचा। एहतियात के तौर पर कई इलाकों की बिजली काट दी गई ताकि आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

मोबाइल टावर और टेलीकॉम नेटवर्क प्रभावित होने से इंटरनेट सेवाएं भी कई घंटों तक बाधित रहीं। हजारों लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पाए। कई पानी की पाइपलाइनें फट गईं, जिससे सड़कों पर पानी भर गया। गैस पाइपलाइन नेटवर्क की भी जांच शुरू की गई और सुरक्षा कारणों से कई इलाकों में गैस सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई।

 

मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करनी पड़ीं

भूकंप के बाद राजधानी कराकस और पड़ोसी मिरांडा राज्य में मेट्रो और ट्रेन सेवाएं भी तत्काल रोक दी गईं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पहले सभी ट्रैक, पुल और सुरंगों का निरीक्षण किया जाएगा। जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक ट्रेन संचालन शुरू नहीं किया जाएगा। इस वजह से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

 

हजारों लोगों ने सड़कों पर बिताई पूरी रात

भूकंप के बाद सबसे भयावह दृश्य राजधानी कराकस और आसपास के शहरों में देखने को मिला। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक और इमारतों के गिरने के डर से हजारों लोगों ने पूरी रात अपने घरों में लौटने की हिम्मत नहीं की।

कई परिवार अपने बच्चों, बुजुर्गों और जरूरी सामान के साथ खुले मैदानों, पार्कों और सड़कों पर बैठे रहे। लोगों को डर था कि यदि वे घर लौटे तो आफ्टरशॉक के दौरान पहले से क्षतिग्रस्त इमारतें कभी भी गिर सकती हैं।

रातभर सड़कों पर लोगों की भीड़ दिखाई देती रही। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की कि जब तक भवनों की सुरक्षा जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश न करें।

 

राष्ट्रपति की अपील: लापता लोगों की जानकारी VenApp पर दें

कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के साथ ही लोगों से एक विशेष अपील भी की।  उन्होंने नागरिकों से कहा कि जिनके परिवार का कोई सदस्य लापता है या जिनके घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वे इसकी जानकारी VenApp के माध्यम से सरकार तक पहुंचाएं ताकि राहत और बचाव कार्य तेजी से किया जा सके।

सरकार का कहना था कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रभावित लोगों तक सहायता जल्दी पहुंचाई जा सकेगी और लापता लोगों का रिकॉर्ड भी तैयार होगा।

 

126 साल का सबसे बड़ा भूकंप क्यों कहा जा रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार यह वेनेजुएला के इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है। रिकॉर्ड बताते हैं कि इससे पहले वर्ष 1900 में लगभग 7.7 तीव्रता का बड़ा भूकंप आया था। उसके बाद इतने बड़े पैमाने पर धरती नहीं हिली थी।

इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे पिछले 126 वर्षों का सबसे बड़ा भूकंप बता रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल तीव्रता ही नहीं बल्कि लगातार दो बड़े झटकों और उसके बाद आए अनेक आफ्टरशॉक ने इस आपदा को और भी गंभीर बना दिया।

राष्ट्रीय आपातकाल क्यों घोषित करना पड़ा?

लगातार दो बड़े भूकंप, उसके बाद आफ्टरशॉक, बिजली व्यवस्था ठप होना, एयरपोर्ट को नुकसान, हजारों इमारतों के क्षतिग्रस्त होने और राहत कार्यों की चुनौती को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने पूरे देश में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) घोषित कर दिया।

इसका उद्देश्य राहत एजेंसियों, सेना, पुलिस और स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ सक्रिय करना था ताकि प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से बचाव अभियान चलाया जा सके। सरकार ने इंजीनियरों, डॉक्टरों, सेना और आपदा राहत बलों को तत्काल प्रभावित इलाकों में भेजा।

 

आखिर वेनेजुएला में इतने बड़े भूकंप क्यों आते हैं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वेनेजुएला में इतनी भीषण प्राकृतिक आपदा क्यों आई। इसका जवाब धरती के हजारों किलोमीटर नीचे छिपा हुआ है।

दरअसल हमारी पृथ्वी एक ठोस चट्टान नहीं है। इसकी बाहरी सतह कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार पूरी धरती मुख्य रूप से 7 बड़ी और दर्जनों छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार हर साल कुछ मिलीमीटर से लेकर कुछ सेंटीमीटर तक खिसकती रहती हैं।

वेनेजुएला दुनिया के उन इलाकों में शामिल है जहां कैरेबियन प्लेट (Caribbean Plate) और दक्षिण अमेरिकी प्लेट (South American Plate) एक-दूसरे के संपर्क में रहती हैं। दोनों प्लेटें लगातार अलग-अलग दिशा में दबाव बनाती रहती हैं।

जब वर्षों तक जमा हुआ तनाव अचानक टूटता है तो कुछ सेकेंड में ही करोड़ों टन चट्टानों के बराबर ऊर्जा बाहर निकलती है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में महसूस होती है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार बुधवार को आए दोनों शक्तिशाली भूकंप भी इन्हीं प्लेटों की अचानक हुई हलचल का परिणाम थे।

 

36 सेकेंड में दो बड़े भूकंप कैसे आ गए?

कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या एक भूकंप के तुरंत बाद दूसरा बड़ा भूकंप आ सकता है?

वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा संभव है। इस घटना में पहले 7.2 तीव्रता का झटका आया। इस झटके ने भूगर्भ के भीतर जमा तनाव को पूरी तरह समाप्त नहीं किया बल्कि उसे दूसरी फॉल्ट लाइन की ओर स्थानांतरित कर दिया। परिणाम यह हुआ कि कुछ ही सेकेंड बाद दूसरी फॉल्ट लाइन टूट गई और उससे भी अधिक ऊर्जा बाहर निकली। इसी कारण दूसरा भूकंप 7.5 तीव्रता का दर्ज किया गया।

यानी यह सामान्य आफ्टरशॉक नहीं था बल्कि लगभग उसी क्षेत्र में आया दूसरा शक्तिशाली मुख्य भूकंप था।

भूकंप सिर्फ एक जगह नहीं आता

अक्सर लोगों को लगता है कि भूकंप किसी एक छोटे से बिंदु पर आता है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।

USGS के अनुसार जब कोई बड़ा भूकंप आता है तो जमीन के नीचे कई किलोमीटर लंबे हिस्से में फॉल्ट लाइन खिसकती है। जितना बड़ा यह क्षेत्र होता है, उतनी ही अधिक ऊर्जा निकलती है।

यही कारण है कि वेनेजुएला में भूकंप का केंद्र एक स्थान पर होने के बावजूद उसके झटके सैकड़ों किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए।

 

अभी भी खतरा टला नहीं है

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों बड़े भूकंपों के बाद भी धरती के भीतर हलचल पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

इसी कारण पहले एक मिनट में करीब 20 आफ्टरशॉक दर्ज किए गए। आने वाले कई दिनों तक और झटके महसूस हो सकते हैं। इनमें से कुछ आफ्टरशॉक इतने शक्तिशाली भी हो सकते हैं कि पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों को पूरी तरह गिरा दें।

इसी वजह से प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे किसी भी क्षतिग्रस्त भवन में प्रवेश न करें।

 

जापान में 7 तीव्रता का भूकंप आता है फिर भी इतनी तबाही क्यों नहीं होती?

यह सवाल पूरी दुनिया में पूछा जा रहा है।

किसी भी भूकंप से होने वाला नुकसान केवल उसकी तीव्रता पर निर्भर नहीं करता।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि भूकंप कितनी गहराई पर आया, उसका केंद्र आबादी से कितना दूर था और जिस देश में भूकंप आया वहां की इमारतें कितनी मजबूत थीं।

अगर भूकंप बहुत गहराई में आता है तो उसकी ऊर्जा सतह तक पहुंचते-पहुंचते काफी कमजोर हो जाती है।

लेकिन अगर भूकंप उथला हो यानी जमीन की सतह के काफी करीब आए और उसका केंद्र किसी बड़े शहर के पास हो तो नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।

इसी वजह से कई बार 7 या 8 तीव्रता के समुद्री भूकंप में बहुत कम नुकसान होता है जबकि 6.5 या 7 तीव्रता का उथला भूकंप हजारों लोगों की जान ले सकता है।

 

जापान, मलेशिया और टोंगा में कम नुकसान क्यों हुआ?

इस वर्ष जापान, मलेशिया और टोंगा में भी 7 तीव्रता से अधिक के भूकंप दर्ज किए गए थे। लेकिन उनमें अधिकांश भूकंप समुद्र के भीतर या काफी अधिक गहराई में आए थे। इसके अलावा जापान जैसे देशों में दुनिया के सबसे आधुनिक भूकंपरोधी भवन बनाए जाते हैं।

वहां इमारतों में विशेष शॉक एब्जॉर्बर लगाए जाते हैं, शुरुआती चेतावनी प्रणाली मौजूद है और लोगों को नियमित रूप से भूकंप से बचाव का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसके विपरीत वेनेजुएला लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश की बड़ी संख्या में इमारतें पुरानी हैं और आधुनिक भूकंपरोधी मानकों के अनुसार निर्मित नहीं हैं। इसी कारण यहां नुकसान कहीं अधिक हुआ।

 

USGS ने इतनी बड़ी मौतों की आशंका क्यों जताई?

भूकंप के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के उस अनुमान की हुई जिसमें हजारों मौतों की आशंका जताई गई।

असल में USGS का PAGER (Prompt Assessment of Global Earthquakes for Response) सिस्टम केवल रिक्टर स्केल नहीं देखता।

यह भूकंप की तीव्रता, गहराई, आसपास की आबादी, भवनों की गुणवत्ता, पुराने भूकंपों के रिकॉर्ड और स्थानीय निर्माण शैली समेत कई मानकों का विश्लेषण करता है।

इन्हीं आंकड़ों के आधार पर यह बताता है कि संभावित आर्थिक नुकसान कितना हो सकता है और कितनी जनहानि की आशंका है।

यही कारण है कि शुरुआती घंटों में वास्तविक मौतों की संख्या कम होने के बावजूद एजेंसी ने भविष्य में कहीं अधिक नुकसान की संभावना जताई।

 

पूरी दुनिया मदद के लिए आगे आई

भूकंप के बाद केवल वेनेजुएला ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया सक्रिय हो गई। ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स (OAS) के महासचिव अलबर्ट रामदीन ने कहा कि अभी नुकसान का पूरा आकलन नहीं हुआ है, लेकिन पूरा अमेरिकी महाद्वीप वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

 

दक्षिण अमेरिका के 8 देशों ने मदद का भरोसा दिया

भूकंप के कुछ ही घंटों बाद दक्षिण अमेरिका और लैटिन अमेरिका के कई देशों ने वेनेजुएला को राहत सहायता देने की घोषणा कर दी।

ब्राजील, अर्जेंटीना, पेरू, मेक्सिको, कोलंबिया, बोलीविया, कोस्टा रिका और एल सल्वाडोर ने अलग-अलग बयान जारी कर संवेदना व्यक्त की और कहा कि जरूरत पड़ने पर वे राहत सामग्री, बचाव दल, मेडिकल टीम और मानवीय सहायता भेजने के लिए तैयार हैं।

इन देशों ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा है और यदि आवश्यकता पड़ी तो हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

भारत ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री और बचाव सहायता भेजी जा सकती है।

 

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी वेनेजुएला को हरसंभव मदद देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहायता देने के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने अपनी सरकार की सभी संबंधित एजेंसियों को राहत कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दे दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि शुरुआती रिपोर्टें अच्छी नहीं हैं और अमेरिका इस कठिन समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा रहेगा।

विपक्षी नेता ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?

वेनेजुएला के विपक्षी नेता एडमंडो गोंजालेज उरुतिया ने कहा कि इस आपदा से निपटने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी तबाही के बाद देश को अंतरराष्ट्रीय सहायता की आवश्यकता पड़ेगी।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भूकंप के कई घंटे बाद भी नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो पाया है और राहत व्यवस्था लोगों की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं दिखाई दे रही।

 

आगे सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालना है। इसके साथ ही बिजली, पानी, इंटरनेट, गैस और परिवहन सेवाओं को दोबारा शुरू करना भी बेहद जरूरी है।

हजारों लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में अस्थायी राहत शिविर, भोजन, दवाइयां और साफ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। यदि अगले कुछ दिनों में तेज आफ्टरशॉक आते हैं तो राहत कार्य और कठिन हो सकते हैं।

 

निष्कर्ष

वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी भी हैं कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर आपदा प्रबंधन और आधुनिक चेतावनी प्रणाली कितनी महत्वपूर्ण होती है।

सिर्फ 36 सेकेंड के अंतराल में आए दो महाभूकंपों ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी। अब पूरी दुनिया की नजर राहत एवं बचाव अभियान पर है और वैज्ञानिक लगातार जमीन के भीतर हो रही हलचल पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह आपदा वेनेजुएला के इतिहास में कितनी बड़ी मानवीय और आर्थिक त्रासदी बनकर दर्ज होती है।

FAQs:

दो शक्तिशाली भूकंपों से हुई भारी तबाही, बड़ी जनहानि, इमारतों के ढहने और लगातार आफ्टरशॉक के खतरे को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया ताकि राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से किए जा सकें।

कराकस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की इमारत को नुकसान पहुंचा और टर्मिनल की छत का हिस्सा गिर गया। यात्रियों की सुरक्षा के लिए उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं।

सरकार ने अभी इसकी कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की है। हालात सामान्य होने और राहत कार्य पूरा होने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।

कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन और स्थानीय प्रशासन की सलाह देखने की जरूरत है।

राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। कई इलाकों में बिजली, पानी और संचार सेवाएं प्रभावित हैं। प्रशासन लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और आफ्टरशॉक को देखते हुए सतर्क रहने की अपील कर रहा है।