Europe Heatwave 2026: फ्रांस में शराब पर पाबंदी, 58 मौतें, एयरपोर्ट से न्यूक्लियर प्लांट तक प्रभावित; आखिर यूरोप में क्यों पड़ रही है रिकॉर्ड तोड़ गर्मी?

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Europe Heatwave 2026: यूरोप इस समय पिछले कई दशकों की सबसे भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी, ब्रिटेन, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, चेक गणराज्य और लक्ज़मबर्ग समेत 26 यूरोपीय देश भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इनमें 14 देशों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। कई जगह तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि कुछ देशों में आने वाले दिनों में 40 डिग्री से ऊपर जाने का अनुमान है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई देशों में अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है, हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं, सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द किए जा रहे हैं, बिजली और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और सरकारें लोगों से घरों में रहने की अपील कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सामान्य गर्मी नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़ी एक गंभीर चेतावनी है।

 

Europe Heatwave 2026: फ्रांस सबसे ज्यादा प्रभावित 

इस बार सबसे गंभीर स्थिति फ्रांस में देखने को मिल रही है। देश ने लगातार दूसरे दिन अपने इतिहास का सबसे गर्म दिन दर्ज किया। फ्रांस की मौसम एजेंसी Météo-France के अनुसार बुधवार रात देश का औसत न्यूनतम तापमान 22°C रहा, जबकि कई शहरों में रात का तापमान भी 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा। उत्तर-पश्चिमी शहर नांत (Nantes) में रात का न्यूनतम तापमान 27.2°C रिकॉर्ड किया गया।

राजधानी पेरिस समेत कई इलाकों में तापमान 43°C तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। लगातार कई दिनों से दिन और रात दोनों समय गर्मी बनी रहने के कारण लोगों के शरीर को आराम नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक यही स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि शरीर लगातार गर्म रहता है और हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन तथा हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

 

फ्रांस में अब तक 58 लोगों की मौत

फ्रांस में भीषण गर्मी के कारण अब तक 58 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें 18 लोगों की मौत सीधे हीट स्ट्रोक और लू की वजह से हुई है, जबकि 40 लोगों की जान नदियों, झीलों और नहरों में डूबने से गई है। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पानी में उतर रहे हैं, लेकिन कई जगह तेज बहाव और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण हादसे बढ़ गए हैं। मरने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की बताई जा रही है।

इसी बीच पेरिस क्षेत्र में एक तीन वर्षीय बच्चे का शव कार के अंदर मिला। इससे कुछ दिन पहले दक्षिणी फ्रांस के कारपेंट्रा (Carpentras) शहर में भी दो छोटे बच्चों की कार में दम घुटने से मौत हो गई थी।

उधर उत्तर-पश्चिमी शहर रेनेस (Rennes) के इमरजेंसी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर लुई सोलास ने बताया कि केवल उनके क्षेत्र में ही कई बुजुर्गों की मौत अत्यधिक गर्मी से जुड़ी हुई मानी जा रही है। कई लोगों के फोन नहीं उठाने पर जब आपातकालीन सेवाएं उनके घर पहुंचीं तो वे मृत मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि खतरा केवल बहुत बुजुर्ग लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है।

Credit: BBC

अस्पतालों पर बढ़ता दबाव और स्वास्थ्य व्यवस्था संकट में

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने हालात (Paris Heatwave) को देखते हुए देश की स्वास्थ्य आपातकालीन योजना ORSAN को उसके सर्वोच्च स्तर (Level-3) पर सक्रिय कर दिया है ताकि अस्पतालों में अतिरिक्त स्टाफ लगाया जा सके और स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय तक बढ़ते दबाव को संभाल सके।

पेरिस पुलिस प्रमुख पैट्रिस फॉर ने कहा कि राजधानी के अस्पताल अब अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुके हैं। उनके अनुसार अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव है।

स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने बताया कि पिछले 24 घंटों में पेरिस की एम्बुलेंस सेवाओं को सामान्य दिनों की तुलना में चार गुना अधिक कार्डियक अरेस्ट के मामले मिले। उन्होंने कहा कि केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा भी हीट स्ट्रोक और दिल की गंभीर समस्याओं का शिकार हो रहे हैं।

 

सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर लगाई रोक 

फ्रांस सरकार ने बढ़ती गर्मी के बीच एक असामान्य लेकिन महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पेरिस में शुक्रवार और शनिवार दोपहर 12 बजे से अगले दिन सुबह 7 बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर रोक लगा दी गई है।

इसके अलावा शाम 6 बजे से सुबह 7 बजे तक शराब की टेक-अवे बिक्री (Takeaway Alcohol Sales) भी प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि लाइसेंस प्राप्त बार और रेस्तरां इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे।

सरकार का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान शराब शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा देती है, जिससे बेहोशी, हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि यह कदम अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए उठाया गया है।

 

पेरिस के मेयर और स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की अपील

पेरिस के कार्यवाहक मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने लोगों से कुछ दिनों तक व्यायाम न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने शाम के समय भी बड़ी संख्या में लोगों को दौड़ते हुए देखा, जबकि उस समय भी तापमान बेहद अधिक था। उनके मुताबिक ऐसी गर्मी में जॉगिंग करना गैर-जिम्मेदाराना है और लोगों को अपनी दिनचर्या मौसम के अनुसार बदलनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ और युवा है तब भी वह इस गर्मी से सुरक्षित नहीं है। उन्होंने लोगों से धूप में कम निकलने, पर्याप्त पानी पीने और शारीरिक गतिविधियां सीमित रखने की सलाह दी।

 

स्कूल, न्यूक्लियर प्लांट और बड़े आयोजन भी प्रभावित

हीटवेव का असर केवल स्वास्थ्य व्यवस्था तक सीमित नहीं है। फ्रांस में 1,350 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। शिक्षकों के संगठनों ने गर्मी में काम करने की खराब परिस्थितियों को लेकर हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

Image Source: Reuters

भीषण गर्मी के कारण गोलफेश (Golfech) न्यूक्लियर पावर प्लांट को बंद करना पड़ा। इसकी वजह यह है कि प्लांट को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली गारोन (Garonne) नदी का तापमान 28°C तक पहुंचने की आशंका है। गर्म पानी से रिएक्टरों को सुरक्षित तरीके से ठंडा करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए एहतियातन उत्पादन रोक दिया गया।

इसके अलावा अटलांटिक तट पर तेज आंधी और तूफान की चेतावनी के कारण Garorock Music Festival का पहला दिन भी रद्द कर दिया गया है।

 

ब्रिटेन, स्पेन, जर्मनी, इटली समेत पूरे यूरोप में क्यों बढ़ रहा है संकट

फ्रांस अकेला ऐसा देश नहीं है जो इस समय भीषण गर्मी से जूझ रहा है। पूरे यूरोप में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, लक्ज़मबर्ग और चेक गणराज्य समेत कई देशों में रेड या एक्सट्रीम हीट अलर्ट जारी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल कुछ दिनों की सामान्य गर्मी नहीं बल्कि कई देशों में पिछले दशकों की सबसे गंभीर हीटवेव बन सकती है।

ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) ने दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड और लंदन के लिए रेड एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग बढ़ा दी है। बुधवार को तापमान 39°C के करीब पहुंच गया और यदि यह 39.6°C से ऊपर जाता है तो जून महीने का लगभग 50 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट सकता है, जो 1976 में बना था। मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि कई इलाकों में ट्रॉपिकल नाइट्स देखने को मिल सकती हैं, यानी रात में भी तापमान 20°C से नीचे नहीं जाएगा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिलेगी।

स्पेन में भी कई हिस्सों में तापमान लगातार 38 से 40°C के बीच बना हुआ है। देश के दक्षिणी शहर अंदूजार (Andújar) में इस सप्ताह 45.1°C तापमान दर्ज किया गया, जो जून महीने के सबसे अधिक तापमान में शामिल है। स्पेन की सरकारी निगरानी प्रणाली MoMo के अनुसार केवल रविवार से बुधवार के बीच 213 लोगों की मौत गर्मी से जुड़ी हो सकती है, जिनमें अकेले बुधवार को 95 मौतें दर्ज की गईं।

हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि अटलांटिक महासागर से ठंडी हवाएं आने के कारण स्पेन के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों में तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है।

Credit: The Economist

जर्मनी, बेल्जियम और नीदरलैंड में भी रिकॉर्ड टूटने की आशंका

जर्मनी में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। मौसम विभाग DWD ने देश के बड़े हिस्से में “Heat Stress” की चेतावनी जारी की है। कई इलाकों में तापमान 40°C तक पहुंचने का अनुमान है।

दक्षिण-पश्चिमी शहर Bad Bergzabern में रात का तापमान 26.2°C रिकॉर्ड किया गया, जो देश के इतिहास के सबसे गर्म रातों में शामिल है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हीटवेव जर्मनी के इतिहास की सबसे गंभीर गर्मी साबित हो सकती है।

तेज गर्मी के कारण हैम्बर्ग हाफ मैराथन रद्द कर दी गई है। राष्ट्रीय रेलवे कंपनी Deutsche Bahn ने यात्रियों को मुफ्त टिकट रद्द करने की सुविधा दी है ताकि लोग अनावश्यक यात्रा से बच सकें।

बेल्जियम के मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा गर्मी देश के इतिहास की सबसे भीषण हीटवेव बन सकती है। कई स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए आधे दिन की कक्षाएं शुरू कर दी हैं।

नीदरलैंड के 12 में से 8 प्रांतों में कोड रेड लागू किया गया है। यहां कुछ इलाकों में तापमान 39°C तक पहुंच सकता है।

लक्ज़मबर्ग ने भी जून महीने का नया तापमान रिकॉर्ड बनाया है, जहां 38.3°C दर्ज किया गया। वहां शनिवार रात तक “Extreme Thermal Stress” अलर्ट जारी रहेगा।

 

इटली में संग्रहालय से लेकर सार्वजनिक सेवाएं तक प्रभावित

इटली में अभी गर्मी अपने चरम पर भी नहीं पहुंची है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार तक उत्तरी इटली के कई हिस्सों में तापमान 40°C तक पहुंच सकता है।

रोम, मिलान समेत 15 शहरों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है और अगले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।

मिलान में आयोजित Men’s Fashion Week भी गर्मी से प्रभावित हुआ है। वहीं फ्लोरेंस स्थित दुनिया के प्रसिद्ध Uffizi Museum ने 28 जून तक नई टिकट बिक्री रोक दी है क्योंकि संग्रहालय का एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगातार बढ़ती गर्मी और पर्यटकों की संख्या को संभाल नहीं पा रहा था। बुधवार को संग्रहालय के अंदर का तापमान 32°C तक पहुंच गया था।

रोम में नई इलेक्ट्रिक बसों की बैटरियां भी तेजी से डिस्चार्ज हो रही हैं क्योंकि लगातार एयर कंडीशनर चलाने से बिजली की खपत बढ़ गई है।

 

स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य भी अलर्ट पर

स्विट्जरलैंड के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में अधिकतम मौसम चेतावनी जारी कर दी गई है। मौसम एजेंसी MeteoSwiss ने सूखे की गंभीर स्थिति की भी चेतावनी दी है।

चेक गणराज्य के मौसम विभाग ने कहा है कि सप्ताहांत तक तापमान 40°C तक पहुंच सकता है और देश के अधिकांश हिस्सों में “Extreme Weather Conditions” बन सकते हैं।

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में भी तापमान 40°C तक पहुंचने का अनुमान है।

इतनी भीषण गर्मी की असली वजह क्या है?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार यूरोप की भीषण गर्मी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण Heat Dome और Omega Block का एक साथ बनना है।

हीट डोम ऐसी स्थिति होती है जिसमें ऊपरी वायुमंडल में उच्च दबाव (High Pressure System) बन जाता है। यह किसी ढक्कन की तरह काम करता है और गर्म हवा को जमीन के ऊपर ही कैद कर देता है। गर्म हवा ऊपर नहीं जा पाती और लगातार तापमान बढ़ता जाता है।

इसके साथ ओमेगा ब्लॉक (Omega Block) बनने से सामान्य पश्चिमी हवाओं का प्रवाह रुक जाता है। जब हवा आगे नहीं बढ़ती तो वही गर्म हवा कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में फंसी रहती है। परिणामस्वरूप लगातार कई दिनों तक रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ती रहती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार यही दोनों मौसमीय स्थितियां एक साथ बनने से पूरे यूरोप में असामान्य गर्मी देखने को मिल रही है।

 

क्या जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार है?

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा है कि मौजूदा यूरोपीय हीटवेव पर जलवायु परिवर्तन की स्पष्ट छाप दिखाई देती है।

यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। Copernicus Climate Service के अनुसार यूरोप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोयला, तेल और गैस के लगातार उपयोग से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है, जिससे पृथ्वी का औसत तापमान लगातार ऊपर जा रहा है। इसके कारण हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार, अधिक समय तक और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिल रही हैं।

इसके अलावा इस वर्ष विकसित हो रही एल नीनो (El Niño) की स्थिति भी वैश्विक तापमान बढ़ाने में योगदान दे रही है।

 

2003 जैसी त्रासदी दोहराने का खतरा

मौजूदा हालात की तुलना बार-बार अगस्त 2003 की यूरोपीय हीटवेव से की जा रही है। 2003 में लगभग 16 दिनों तक चली भीषण गर्मी के कारण पूरे यूरोप में करीब 80,000 लोगों की मौत हुई थी। अकेले फ्रांस में लगभग 15,000 लोगों की जान चली गई थी। इसे आज भी यूरोप के इतिहास की सबसे घातक हीटवेव माना जाता है।

फ्रांस की मौसम एजेंसी का कहना है कि इस बार की गर्मी की तीव्रता कई मामलों में 2003 जैसी दिखाई दे रही है। यही वजह है कि सरकारें पहले से अधिक सतर्क हैं और अस्पतालों से लेकर आपदा प्रबंधन एजेंसियों तक को अलर्ट पर रखा गया है।

 

यूरोप में AC कम होने से क्यों बढ़ रही है परेशानी?

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में लोगों को गर्मी से बचने में सबसे बड़ी समस्या एयर कंडीशनर की कमी है। पूरे यूरोप में केवल करीब 20% घरों में एयर कंडीशनर लगे हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा लगभग 90% है।

यूरोप का मौसम पारंपरिक रूप से ठंडा रहा है, इसलिए अधिकांश इमारतों का निर्माण गर्मी से बचाव के बजाय ठंड से सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया था। लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार बढ़ रही गर्मी ने इस व्यवस्था को चुनौती दे दी है।

डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी में शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक, चक्कर आना, हृदय रोग, किडनी की समस्या और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ता है।

 

निष्कर्ष

यह (Europe Heatwave 2026) केवल एक मौसमीय घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है। फ्रांस में अस्पतालों पर दबाव, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर रोक, स्कूलों का बंद होना, न्यूक्लियर पावर प्लांट का अस्थायी रूप से बंद होना और पूरे यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ तापमान यह दिखाते हैं कि अत्यधिक गर्मी अब केवल दक्षिणी देशों की समस्या नहीं रही। यदि वैश्विक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो भविष्य में ऐसी हीटवेव और अधिक लंबी, अधिक तीव्र और अधिक विनाशकारी हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल राहत उपायों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक नीतियों पर भी तेजी से काम करना जरूरी होगा।

 

FAQs

यूरोप में इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ रही है?

यूरोप में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की सबसे बड़ी वजह हीट डोम (Heat Dome) और ओमेगा ब्लॉक (Omega Block) का एक साथ बनना है। हीट डोम गर्म हवा को जमीन के ऊपर फंसा देता है, जबकि ओमेगा ब्लॉक सामान्य हवाओं के प्रवाह को रोक देता है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और विकसित हो रही एल नीनो (El Niño) की स्थिति भी तापमान बढ़ाने में योगदान दे रही है।

 

फ्रांस में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर रोक क्यों लगाई गई?

फ्रांस सरकार ने भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करने और लोगों की सुरक्षा के लिए यह फैसला लिया है। अत्यधिक गर्मी में शराब पीने से शरीर में पानी की कमी (Dehydration), हीट स्ट्रोक और बेहोशी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए पेरिस में तय समय के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और टेक-अवे शराब बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है।

 

फ्रांस में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?

फ्रांस में हीटवेव के कारण अब तक 58 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें 18 लोगों की मौत लू और अत्यधिक गर्मी से हुई, जबकि 40 लोगों की जान गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, झीलों और नहरों में नहाने के दौरान डूबने से गई। इसके अलावा कई इलाकों में अस्पतालों में हार्ट अरेस्ट और हीट स्ट्रोक के मामलों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

 

यूरोप के किन देशों में रेड अलर्ट जारी किया गया है?

फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, इटली, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड, लक्ज़मबर्ग, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य समेत यूरोप के 26 देश हीटवेव से प्रभावित हैं। इनमें 14 देशों में अत्यधिक गर्मी को देखते हुए रेड या एक्सट्रीम हीट अलर्ट जारी किया गया है।

 

न्यूक्लियर पावर प्लांट गर्मी की वजह से क्यों बंद करना पड़ा?

फ्रांस के Golfech Nuclear Power Plant को इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि इसे ठंडा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली गारोन (Garonne) नदी का तापमान बहुत अधिक बढ़ गया था। गर्म पानी से रिएक्टरों को सुरक्षित रूप से ठंडा करना मुश्किल हो जाता है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से एहतियात के तौर पर प्लांट का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया।

 

क्या यह हीटवेव 2003 जैसी त्रासदी बन सकती है?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा हालात कई मामलों में 2003 की ऐतिहासिक यूरोपीय हीटवेव जैसे दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2003 में लगभग 80 हजार लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अकेले फ्रांस में करीब 15 हजार लोग शामिल थे। हालांकि इस बार सरकारें पहले से अधिक सतर्क हैं, लेकिन यदि अत्यधिक गर्मी लंबे समय तक जारी रहती है तो जोखिम काफी बढ़ सकता है।

 

यूरोप में AC कम होने से लोगों को ज्यादा परेशानी क्यों हो रही है?

यूरोप के अधिकांश देशों में पारंपरिक रूप से मौसम ठंडा रहता था, इसलिए वहां एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बहुत कम होता है। वर्तमान में यूरोप के केवल करीब 20% घरों में AC हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा लगभग 90% है। इसी वजह से लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव के दौरान लोगों को गर्मी से बचने में ज्यादा कठिनाई होती है।

 

क्या जलवायु परिवर्तन इस हीटवेव के लिए जिम्मेदार है?

संयुक्त राष्ट्र और जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार Climate Change इस भीषण हीटवेव का एक प्रमुख कारण है। जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल और गैस) के लगातार उपयोग से पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है। इसके कारण हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार, अधिक समय तक और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिल रही हैं।