Women Farmers: देश में पहली बार महिला किसानों को मिली कानूनी पहचान, महाराष्ट्र ने पास किया ऐतिहासिक विधेयक- जानिए नया कानून क्यों है खास ?

Women Farmers

महाराष्ट्र विधानसभा ने Women Farmers Empowerment Bill, 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर देश में एक नई पहल की शुरुआत की है। इस विधेयक का उद्देश्य कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को पहली बार कानूनी पहचान देना और उन्हें सरकारी योजनाओं, संस्थागत ऋण, कृषि सेवाओं, प्रशिक्षण तथा अन्य सुविधाओं से सीधे जोड़ना है। अब यह विधेयक विधान परिषद में पेश किया जाएगा।

राज्य सरकार का दावा है कि यह भारत का अपनी तरह का पहला कानून है, जो महिलाओं को केवल खेत में काम करने वाली मजदूर नहीं बल्कि ‘महिला किसान’ (Women Farmers) के रूप में कानूनी मान्यता देने की व्यवस्था करता है। इसके साथ ही महिला किसानों के लिए एक अलग सशक्तिकरण कोष (Fund), पहचान पत्र और संस्थागत सहायता का भी प्रावधान किया गया है।

Image: धर्मराजिका स्तूप, तक्षशिला शहर के पास मौर्य-युग का एक बौद्ध स्तूप (2010)

Women Farmers Bill की जरूरत क्यों पड़ी?

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि ग्रामीण भारत में महिलाएं बुवाई से लेकर कटाई तक खेती के लगभग हर काम में पुरुषों के साथ बराबरी से हिस्सा लेती हैं। इसके अलावा वे डेयरी, पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इसके बावजूद अधिकांश महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि कृषि भूमि का मालिकाना हक अक्सर परिवार के पुरुष सदस्यों के नाम पर दर्ज होता है। ऐसे में महिलाएं खेती करने के बावजूद आधिकारिक रूप से किसान नहीं मानी जातीं। यही स्थिति बदलने के लिए यह कानून लाया गया है।

महिला किसान की नई परिभाषा क्या होगी?

इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब भूमि का मालिक होना महिला किसान कहलाने की अनिवार्य शर्त नहीं होगी।

यदि कोई महिला खेती या कृषि से जुड़े किसी भी कार्य में सक्रिय रूप से शामिल है, तो उसे महिला किसान माना जा सकेगा, चाहे जमीन उसके नाम पर हो या नहीं।

इस कानून के दायरे में केवल फसल उत्पादन ही नहीं बल्कि पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों में काम करने वाली महिलाएं भी शामिल होंगी। सरकार का कहना है कि यह परिभाषा ग्रामीण भारत की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

महिला किसानों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?

कानून लागू होने के बाद पात्र महिलाओं को Women Farmer Certificate और आगे चलकर Women Farmer Identity Card जारी किया जाएगा। यही उनकी आधिकारिक किसान पहचान होगी।

इस पहचान के आधार पर महिलाएं बैंक ऋण, फसल बीमा, कृषि सब्सिडी, बीज और उर्वरक, ई-किसान सेवाएं, आधुनिक कृषि प्रशिक्षण, सरकारी सहायता, कृषि ऋण और सीधे बाजार से जुड़ने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और कृषि क्षेत्र में उन्हें समान अवसर देना है।

 

महिला किसान बनने के लिए आवेदन कैसे होगा?

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं अपने ग्राम पंचायत के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। आवेदन पर अंतिम निर्णय ग्राम सभा लेगी। यदि आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो संबंधित अधिकारी को स्पष्ट कारण बताना होगा।

शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में आवेदन नगर पंचायत या संबंधित स्थानीय निकाय की सामान्य सभा के माध्यम से निपटाए जाएंगे। आवेदन स्वीकृत होने के बाद 15 दिनों के भीतर महिला किसान प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य होगा।

सरकार ने यह व्यवस्था भी की है कि यदि कोई पात्र महिला स्वयं आवेदन नहीं करती है, तो स्थानीय निकाय उसे चिन्हित कर स्वतः प्रमाणपत्र जारी कर सकते हैं ताकि कोई भी योग्य महिला लाभ से वंचित न रहे।

 

कानून को लागू करने के लिए क्या व्यवस्था होगी?

विधेयक में प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में Women Farmers Empowerment Council बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा राज्य स्तर पर एक समिति और Women Farmers Empowerment Cell भी गठित किया जाएगा, जो समन्वय, निगरानी, मूल्यांकन और शिकायतों के समाधान का काम करेगा।

सरकार महिला किसानों के लिए विशेष सहायता केंद्र और शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित करेगी ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी न हो।

 

विधानसभा में इस कानून को लेकर क्या चर्चा हुई?

विधेयक को सभी दलों का समर्थन मिला। शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि महिलाएं खेती में बराबर की भागीदार हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल कृषि मजदूर के रूप में देखा जाता रहा है। उनके अनुसार यह कानून महिलाओं को किसान की कानूनी पहचान देगा, हालांकि उन्होंने ग्रामीण महिलाओं में कुपोषण, आयरन, कैल्शियम और विटामिन B12 की कमी जैसे मुद्दों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

एनसीपी (एसपी) के जयंत पाटिल ने महिलाओं को पारिवारिक कृषि भूमि में सह-स्वामित्व देने की मांग की। वहीं भास्कर जाधव ने पूछा कि यदि जमीन का स्वामित्व किसान बनने की शर्त नहीं है तो भविष्य में भूमि अधिकारों को लेकर सरकार की क्या नीति होगी।

जवाब में कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को भूमि का मालिक बनाना नहीं, बल्कि कृषि और उससे जुड़े कार्यों में उनके वास्तविक योगदान को स्वतंत्र किसान के रूप में मान्यता देना है।

 

एम.एस. स्वामीनाथन का जिक्र किया गया

विधेयक पेश करते समय कृषि मंत्री ने हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन हमेशा मानते थे कि कृषि विकास तभी संभव है जब किसानों का कल्याण केंद्र में हो और महिला किसानों के योगदान को भी समान महत्व मिले। यह विधेयक उसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

 

यह कानून क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

भारत में करोड़ों महिलाएं खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगी हैं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका नाम किसान के रूप में दर्ज नहीं होता। इसकी वजह से वे बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं, बीमा और कई अन्य सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं।

महाराष्ट्र का यह कानून पहली बार महिलाओं को उनकी वास्तविक भूमिका के आधार पर कानूनी पहचान देने की कोशिश करता है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, कृषि क्षेत्र में उनकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत करने और उन्हें संस्थागत सहायता से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। भविष्य में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

 

निष्कर्ष

Women Farmers Empowerment Bill, 2026 केवल एक नया कानून नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की दशकों पुरानी अनदेखी को दूर करने की पहल है। यह विधेयक उन लाखों महिलाओं को आधिकारिक किसान की पहचान देने का प्रयास करता है, जो वर्षों से खेती करती रही हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में किसान नहीं मानी जाती थीं। यदि यह कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो इससे महिला किसानों की आर्थिक स्थिति, सरकारी योजनाओं तक पहुंच और कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को नई मजबूती मिल सकती है।

FAQs:

यह महाराष्ट्र सरकार का नया कानून है, जिसका उद्देश्य खेती और कृषि से जुड़े कार्यों में लगी महिलाओं को कानूनी रूप से ‘महिला किसान’ की पहचान देना है।

क्योंकि अधिकांश महिलाएं खेती में बराबर योगदान देती हैं, लेकिन भूमि उनके नाम पर न होने के कारण उन्हें आधिकारिक किसान नहीं माना जाता और वे कई सरकारी लाभों से वंचित रह जाती हैं।

उन्हें महिला किसान प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, बैंक ऋण, फसल बीमा, सरकारी योजनाएं, कृषि प्रशिक्षण, सब्सिडी और बाजार से सीधे जुड़ने जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।

महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, महिलाओं को स्वतंत्र किसान की कानूनी पहचान देने वाला यह देश का अपनी तरह का पहला प्रस्तावित कानून है।

इससे महिलाओं को कृषि क्षेत्र में स्वतंत्र पहचान मिलेगी, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ेगी, आर्थिक सशक्तिकरण होगा और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत होगी।