UNESCO Takshashila: संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था UNESCO ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि तक्षशिला (Taxila) स्थित दो ऐतिहासिक स्थलों पर किए गए निर्माण कार्यों (Interventions) को वापस नहीं लिया गया, तो इस विश्व धरोहर (World Heritage Site) को पहले “World Heritage in Danger List” में डाला जा सकता है और भविष्य में इसका विश्व धरोहर का दर्जा भी खतरे में पड़ सकता है।
UNESCO ने साफ कहा है कि Mohra Moradu और Sirkap में हुए हालिया बदलावों ने इन स्थलों की प्रामाणिकता (Authenticity) और अखंडता (Integrity) को प्रभावित किया है। यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार से इन कार्यों पर विस्तृत जवाब और दस्तावेज मांगे गए हैं।

Takshashila आखिर है क्या और इसका इतिहास इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
तक्षशिला वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी जिले में स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में से एक है। इसे 1980 में UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिला था।

यह कोई एक स्मारक नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक स्थलों का समूह है। इसमें प्रागैतिहासिक गुफाएं, प्राचीन नगरों के अवशेष, बौद्ध मठ, स्तूप, मस्जिद और मदरसा शामिल हैं। UNESCO के अनुसार तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग पांच शताब्दियों तक शहरी विकास की कहानी को दर्शाता है। यह क्षेत्र बौद्ध शिक्षा, व्यापार और संस्कृति का एक बड़ा केंद्र भी रहा है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
UNESCO को किस बात पर सबसे ज्यादा आपत्ति है?
रिपोर्ट के अनुसार कई जगह पुरानी असमान आकार की प्राचीन पत्थर की दीवारों की जगह नए, एक समान आकार वाले आधुनिक पत्थर और चिनाई सामग्री का इस्तेमाल किया गया। कुछ हिस्सों में दीवारों को पहले से अधिक ऊंचा भी बनाया गया।
UNESCO का मानना है कि विश्व धरोहर स्थलों पर संरक्षण (Conservation) इस तरह किया जाना चाहिए कि मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप में न्यूनतम बदलाव हो। यदि नई सामग्री और आधुनिक निर्माण मूल संरचना पर हावी होने लगें, तो स्थल की ऐतिहासिक विश्वसनीयता प्रभावित हो जाती है।
पाकिस्तान सरकार का क्या कहना है?
पंजाब पुरातत्व विभाग ने UNESCO की आपत्तियों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। विभाग के महानिदेशक मलिक ज़हीर अब्बास ने कहा कि इन स्थलों पर पुनर्निर्माण (Reconstruction) नहीं बल्कि संरक्षण (Conservatio) किया जा रहा है।
उनके अनुसार इन कार्यों का उद्देश्य कमजोर हो चुकी पुरातात्विक संरचनाओं को स्थिर करना, आगे होने वाले नुकसान को रोकना और विश्व धरोहर की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब पुनर्निर्माण किया ही नहीं गया तो उसे वापस लेने का सवाल भी नहीं उठता।
UNESCO ने अब पाकिस्तान से क्या मांगा है?
पिछले महीने UNESCO, पाकिस्तान के Department of Archaeology and Museums (DOAM) और National Heritage and Cultural Division की संयुक्त तकनीकी टीम ने Taxila Museum और संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया।
UNESCO ने पाकिस्तान से संरक्षण कार्यों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें Heritage Impact Assessment Report, संरक्षण से पहले और बाद की तस्वीरें तथा पूरे कार्य का तकनीकी रिकॉर्ड शामिल है। इन दस्तावेजों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
क्या तक्षशिला पहले भी खतरे में आ चुका है?
यह पहली बार नहीं है जब तक्षशिला पर संकट आया हो। वर्ष 1998 में भी Bhir Mound क्षेत्र में स्टेडियम बनाने की योजना के कारण UNESCO ने इसे World Heritage in Danger List में डालने की चेतावनी दी थी। बाद में विरोध के चलते वह परियोजना रद्द कर दी गई थी।
इस बार भी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण जारी रहा तो यह विश्व धरोहर के मूल स्वरूप को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
इस विवाद से पाकिस्तान को क्या नुकसान हो सकता है?
पाकिस्तान लंबे समय से अपने 24 अन्य ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में यदि Takshashila पर सवाल उठते हैं तो इससे देश की अंतरराष्ट्रीय साख प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा यदि UNESCO किसी स्थल को Danger List में डाल देता है, तो यह पूरी दुनिया के लिए संकेत होता है कि वह धरोहर गंभीर खतरे में है। अगर स्थिति में सुधार नहीं होता, तो अंततः उस स्थल को World Heritage List से भी हटाया जा सकता है। ऐसा पहले जर्मनी सहित कुछ अन्य देशों के मामलों में भी हो चुका है।
Takshashila विवाद का भारत से क्या संबंध है?
हालांकि Takshashila आज पाकिस्तान में स्थित है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध पूरे भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में यह शिक्षा, दर्शन, बौद्ध धर्म और व्यापार का प्रमुख केंद्र था। इतिहासकार इसे दुनिया के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक भी मानते हैं।
इसी वजह से Takshashila केवल पाकिस्तान की नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत मानी जाती है। UNESCO का मानना है कि ऐसी धरोहरों का संरक्षण आधुनिक निर्माण के बजाय अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार होना चाहिए।

निष्कर्ष
Takshashila को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण किस तरह किया जाना चाहिए। एक ओर पाकिस्तान इसे संरक्षण अभियान बता रहा है, जबकि दूसरी ओर UNESCO का कहना है कि हालिया हस्तक्षेपों ने स्मारकों की ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित किया है। अब पाकिस्तान द्वारा दिए जाने वाले तकनीकी दस्तावेज और UNESCO की आगे की समीक्षा तय करेगी कि Takshashila अपना विश्व धरोहर का दर्जा सुरक्षित रख पाएगा या नहीं।
FAQs:
UNESCO का कहना है कि Mohra Moradu और Sirkap में किए गए निर्माण कार्यों ने ऐतिहासिक स्थलों की प्रामाणिकता और अखंडता को प्रभावित किया है।
तक्षशिला प्राचीन भारत का प्रमुख शिक्षा, व्यापार और बौद्ध संस्कृति का केंद्र था तथा आज UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
यह UNESCO द्वारा तैयार की गई उन सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की सूची है जिन्हें पूरी मानवता की साझा विरासत माना जाता है और जिनका संरक्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है।
UNESCO ने संरक्षण कार्यों से जुड़े सभी तकनीकी दस्तावेज, प्रभाव आकलन रिपोर्ट और पहले तथा बाद की तस्वीरें प्रस्तुत करने को कहा है तथा विवादित हस्तक्षेपों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
ऐसा होने पर पाकिस्तान की सांस्कृतिक साख को नुकसान पहुंच सकता है, पर्यटन प्रभावित हो सकता है और भविष्य में अन्य स्थलों को UNESCO सूची में शामिल कराने की उसकी कोशिशें भी कमजोर पड़ सकती हैं।

