Hormuz से आई राहत! 15 जहाज़ों ने बचाई खेती? जानिए क्यों खुश हैं भारत के किसान

Hormuz Relief

भारत की India Fertiliser Supplies को उस समय बड़ी राहत मिली है, जब खरीफ सीजन में उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा था। हालांकि अब 15 जहाज़ सुरक्षित इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इससे किसानों को समय पर खाद मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है और देश की खाद्य सुरक्षा को भी राहत मिली है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से ऊर्जा और कई महत्वपूर्ण वस्तुएँ इसी रास्ते दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुँचती हैं।भारत भी यूरिया (Urea), डीएपी (DAP) और सल्फर जैसे उर्वरकों व कच्चे माल की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से आयात करता है। हाल के तनाव के कारण कई जहाज़ इस मार्ग के दूसरी ओर फँस गए थे, जिससे भारत की Fertiliser Supply प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।

India Fertiliser Supplies को कैसे मिली मजबूती?

केंद्र सरकार के अनुसार अब तक 15 जहाज़ सुरक्षित होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • 8 जहाज़ लगभग 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया लेकर भारत आ रहे हैं।
  • 4 जहाज़ 2.57 लाख मीट्रिक टन DAP लेकर रवाना हुए हैं।
  • 3 जहाज़ 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

इसके अलावा पाँच अन्य जहाज़ भी जल्द रवाना होने की तैयारी में हैं। इनमें अमोनिया, अतिरिक्त यूरिया और सल्फर की खेप शामिल है।

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सरकार ने संकट से कैसे निपटा?

सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान कई स्तरों पर तैयारी की गई।

  • विदेशों में भारतीय मिशनों ने उर्वरक उत्पादकों और सप्लायरों से लगातार संपर्क बनाए रखा।
  • घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया।
  • राज्यों के साथ मिलकर वितरण व्यवस्था मजबूत की गई।
  • गैस आपूर्ति सामान्य होने के बाद सभी यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहे हैं।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखा।

घरेलू उत्पादन ने भी दी बड़ी राहत

आयात के साथ-साथ भारत का घरेलू उत्पादन भी लगातार लक्ष्य से बेहतर रहा। अप्रैल से जून FY27 के दौरान:

  • यूरिया उत्पादन 71.5 लाख टन रहा, जो तय लक्ष्य से लगभग 3.6 लाख टन अधिक है।
  • DAP उत्पादन भी लक्ष्य से ऊपर रहा।
  • NPKS और SSP उर्वरकों का उत्पादन भी मजबूत बना रहा।

इसका मतलब है कि भारत केवल आयात पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि घरेलू उत्पादन ने भी संकट के समय सुरक्षा कवच का काम किया।

किसानों पर क्या होगा असर?

सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा।सरकार के अनुसार देश में इस समय लगभग 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह खरीफ सीजन की अनुमानित आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में इस समय तक स्टॉक लगभग 33 प्रतिशत के आसपास रहता है।इससे किसानों को समय पर खाद मिलने की संभावना बढ़ेगी, राज्यों में आपूर्ति बेहतर रहेगी और उर्वरकों की कमी का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

 

क्या भारत की खाद्य सुरक्षा अब ज्यादा मजबूत है?

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उर्वरक उपलब्ध रहने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित नहीं होगी। साथ ही बेहतर घरेलू उत्पादन और सुरक्षित आयात भारत की कृषि व्यवस्था को वैश्विक संकटों के बीच भी स्थिर बनाए रखने में मदद करेंगे।यानी India Fertiliser Supplies मजबूत रहने से न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा।

 

निष्कर्ष

हालिया भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से 15 उर्वरक जहाज़ों का सुरक्षित निकलना भारत के लिए राहत भरी खबर है। बढ़ते घरेलू उत्पादन, सक्रिय कूटनीति और मजबूत आयात रणनीति के कारण India Fertiliser Supplies फिलहाल सुरक्षित दिखाई दे रही हैं। इसका सीधा लाभ किसानों, खरीफ फसलों और देश की खाद्य सुरक्षा को मिलने की उम्मीद है।

FAQs:

सरकार ने कूटनीतिक प्रयासों, बढ़े हुए घरेलू उत्पादन, गैस आपूर्ति की बहाली और समय पर आयात के जरिए उर्वरक आपूर्ति को सुरक्षित रखा।

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहाँ से भारत सहित कई देशों के लिए ऊर्जा और उर्वरकों की बड़ी खेप गुजरती है।

इससे खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता बेहतर होगी, क्षेत्रीय कमी की आशंका घटेगी और किसानों को समय पर उर्वरक मिल सकेंगे।

भारत पश्चिम एशिया सहित कई देशों से यूरिया, DAP, अमोनिया और अन्य उर्वरक तथा कच्चा माल आयात करता है।

समय पर उर्वरक मिलने से बुवाई प्रभावित नहीं होगी, फसल उत्पादन बेहतर रहेगा और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।