भारत सरकार ने वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी संजीव जैन को उत्तर कोरिया (Democratic People’s Republic of Korea – DPRK) में भारत का नया राजदूत (Ambassador) नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि संजीव जैन जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे। वह वर्तमान में केप वर्डे (Republic of Cabo Verde) में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत हैं और 2008 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं।
संजीव जैन, वर्तमान राजदूत अलियावती लोंगकुमेर (Aliawati Longkumer) का स्थान लेंगे, जिन्हें जून 2025 में उत्तर कोरिया में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में भारत की यह नियुक्ति केवल नियमित प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कौन हैं संजीव जैन?
संजीव जैन भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Service-IFS) के 2008 बैच के अधिकारी हैं। विदेश मंत्रालय में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्हें केप वर्डे में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था। अब उन्हें उत्तर कोरिया जैसे संवेदनशील और रणनीतिक महत्व वाले देश में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भारत आमतौर पर अनुभवी IFS अधिकारियों को ही ऐसे देशों में नियुक्त करता है, जहां सुरक्षा, रणनीतिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
उत्तर कोरिया में भारत का दूतावास कब से है?
भारत और उत्तर कोरिया के बीच संपर्क कोई नया नहीं है। दोनों देशों के बीच मार्च 1962 में वाणिज्य दूतावास (Consular Relations) स्थापित हुए थे।
इसके बाद 1968 में भारत ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग (Pyongyang) में अपना महावाणिज्य दूतावास (Consulate General) स्थापित किया।
बाद में 10 दिसंबर 1973 को दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध (Diplomatic Relations) स्थापित हुए और दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानी में दूतावास स्तर पर प्रतिनिधित्व शुरू किया।
आज भी भारत का प्योंगयांग में दूतावास मौजूद है और दोनों देशों के बीच सीमित लेकिन नियमित राजनयिक संपर्क बना हुआ है।
भारत और उत्तर कोरिया के संबंध कैसे हैं?
भारत और उत्तर कोरिया के संबंधों को विदेश मंत्रालय “मित्रता, सहयोग और आपसी समझ” पर आधारित बताता है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार बहुत सीमित है, लेकिन राजनयिक संवाद लगातार जारी रहता है

दोनों देशों के विदेश मंत्रालय समय-समय पर Foreign Office Consultations (FOC) के माध्यम से द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इन बैठकों में राजनीतिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श होता है।
भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वह कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता का समर्थक है तथा सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से चाहता है।
परमाणु और मिसाइल परीक्षणों पर भारत का रुख क्या रहा है?
भारत लगातार उत्तर कोरिया से परमाणु हथियार और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों से परहेज करने की अपील करता रहा है।
विदेश मंत्रालय कई बार कह चुका है कि ऐसे परीक्षण क्षेत्रीय तनाव बढ़ाते हैं और शांति प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। भारत का मानना है कि कोरियाई प्रायद्वीप की समस्या का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण वार्ता से ही संभव है।
भारत ने 2018 में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलनों (Inter-Korean Summits) का स्वागत किया था। इसके अलावा तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के बीच सिंगापुर और हनोई में हुई बैठकों को भी सकारात्मक कदम बताया था।
भारत का मानना रहा है कि ऐसे प्रयास क्षेत्र में स्थायी शांति और तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।
कोरियाई युद्ध में भारत की क्या भूमिका थी?
भारत और उत्तर कोरिया के संबंधों की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है। 1950 से 1953 के बीच हुए कोरियाई युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने युद्धबंदियों (Prisoners of War-POWs) की वापसी के लिए Neutral Nations Repatriation Commission (NNRC) बनाई थी।
इस 9 सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता भारत ने की थी। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल के. एस. थिमैया (K.S. Thimayya) ने इस आयोग का नेतृत्व किया था।
युद्धबंदियों की अदला-बदली और मानवीय प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कराने में भारत की भूमिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हुई थी।
भारत उत्तर कोरिया के साथ किन क्षेत्रों में सहयोग करता है?
भारत और उत्तर कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग सीमित है, लेकिन दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क लगातार बना रहता है।
भारत समय-समय पर उत्तर कोरिया को मानवीय सहायता भी उपलब्ध कराता रहा है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का पालन करते हुए भारत अपने सभी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करता है।
भारत का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया के साथ संवाद बनाए रखना और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।

एम्बेसडर (राजदूत) कौन होता है?
एम्बेसडर (Ambassador) किसी देश का सबसे वरिष्ठ राजनयिक (Diplomat) होता है, जिसे उसकी सरकार दूसरे देश में अपना आधिकारिक प्रतिनिधि बनाकर भेजती है। वह उस देश में अपने राष्ट्र का सर्वोच्च सरकारी प्रतिनिधि माना जाता है और दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, व्यापार, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने का काम करता है।
यदि भारत किसी अधिकारी को अमेरिका, जापान, फ्रांस या उत्तर कोरिया में अपना राजदूत नियुक्त करता है, तो वह वहां भारत सरकार का सबसे वरिष्ठ आधिकारिक प्रतिनिधि होता है।
राजदूत क्या-क्या काम करता है?
राजदूत की जिम्मेदारी केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं होती। वह अपने देश के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने का काम करता है।
राजदूत संबंधित देश की राजनीतिक परिस्थितियों, सुरक्षा हालात, आर्थिक गतिविधियों और विदेश नीति पर लगातार नजर रखता है तथा उसकी रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को भेजता है। यदि किसी देश में भारतीय नागरिक किसी संकट में फंस जाते हैं, तो उनकी सहायता करने की जिम्मेदारी भी दूतावास और राजदूत की होती है।
इसके अलावा राजदूत व्यापार और निवेश बढ़ाने, दोनों देशों के बीच समझौते कराने, सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने देश का पक्ष रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में राजदूत कैसे बनते हैं?
भारत में अधिकांश राजदूत भारतीय विदेश सेवा (Indian Foreign Service-IFS) के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं।
इसके लिए सबसे पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है। अच्छी रैंक प्राप्त करने पर उम्मीदवार को भारतीय विदेश सेवा (IFS) मिल सकती है। इसके बाद अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है और विदेश मंत्रालय में विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं।
कई वर्षों तक अलग-अलग देशों में काम करने और पर्याप्त अनुभव हासिल करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को किसी देश में राजदूत नियुक्त किया जाता है। यानी कोई व्यक्ति सीधे राजदूत नहीं बनता, बल्कि लंबी प्रशासनिक और राजनयिक सेवा के बाद इस पद तक पहुंचता है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकार किसी अनुभवी राजनेता, पूर्व मंत्री या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राजदूत नियुक्त कर सकती है, हालांकि भारत में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।
राजदूत की नियुक्ति कौन करता है?
भारत में राजदूत की नियुक्ति विदेश मंत्रालय की सिफारिश पर केंद्र सरकार करती है। नियुक्ति को प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के नाम से औपचारिक आदेश जारी किया जाता है।
इसके बाद जिस देश में राजदूत भेजा जाना है, उसकी सरकार से Agrément (एग्रीमां) यानी औपचारिक स्वीकृति ली जाती है। यदि वह देश किसी नाम पर सहमत नहीं होता, तो उस अधिकारी को वहां नियुक्त नहीं किया जा सकता।
राजदूत और हाई कमिश्नर में क्या अंतर है?
अक्सर लोग राजदूत (Ambassador) और उच्चायुक्त (High Commissioner) को अलग पद समझते हैं, जबकि दोनों की जिम्मेदारियां लगभग समान होती हैं।
अंतर केवल इतना है कि यदि भारत किसी कॉमनवेल्थ (Commonwealth) देश जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा या न्यूजीलैंड में अपना प्रतिनिधि भेजता है, तो उसे उच्चायुक्त (High Commissioner) कहा जाता है।
वहीं उत्तर कोरिया, अमेरिका, जापान, फ्रांस, रूस या इंडोनेशिया जैसे गैर-कॉमनवेल्थ देशों में भारत का प्रतिनिधि राजदूत (Ambassador) कहलाता है।

उत्तर कोरिया भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और उत्तर कोरिया के बीच व्यापार सीमित है, लेकिन कूटनीतिक दृष्टि से यह संबंध महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर कोरिया परमाणु हथियार संपन्न देशों में शामिल है और उसका मिसाइल कार्यक्रम लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बना रहता है। कोरियाई प्रायद्वीप में होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य या राजनीतिक घटना का असर पूरे पूर्वी एशिया और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
भारत इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक है। इसलिए उत्तर कोरिया के साथ संवाद बनाए रखना भारत की संतुलित विदेश नीति का हिस्सा माना जाता है। भारत संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रतिबंधों का पालन करते हुए भी राजनयिक संपर्क बनाए रखता है ताकि बातचीत के रास्ते खुले रहें।
भारत की विदेश नीति में इस नियुक्ति का क्या महत्व है?
संजीव जैन की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बना हुआ है।
भारत की नीति हमेशा से यह रही है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। ऐसे में एक अनुभवी IFS अधिकारी को प्योंगयांग भेजना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारत उत्तर कोरिया के साथ संवाद जारी रखना चाहता है, साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक घटनाक्रम पर अपनी सक्रिय कूटनीतिक मौजूदगी भी बनाए रखना चाहता है।
यह नियुक्ति भारत की “रणनीतिक संतुलन (Strategic Balance)”, “संवाद आधारित कूटनीति (Dialogue-based Diplomacy)” और “इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता” की नीति के अनुरूप भी मानी जा रही है।
FAQ
1. संजीव जैन कौन हैं?
संजीव जैन 2008 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। उन्हें भारत का अगला राजदूत बनाकर उत्तर कोरिया भेजा गया है। इससे पहले वे केप वर्डे में भारत के राजदूत थे।
2. उन्हें उत्तर कोरिया में भारत का राजदूत क्यों नियुक्त किया गया?
विदेश मंत्रालय ने नियमित राजनयिक नियुक्ति के तहत उन्हें उत्तर कोरिया में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। वे जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे।
3. भारत और उत्तर कोरिया के संबंध कैसे हैं?
दोनों देशों के बीच 1973 से राजनयिक संबंध हैं। भारत शांति, संवाद और कूटनीतिक सहयोग की नीति का समर्थन करता है तथा समय-समय पर दोनों देशों के बीच आधिकारिक वार्ताएं भी होती रहती हैं।
4. भारत के राजदूत की क्या भूमिका होती है?
राजदूत दूसरे देश में भारत सरकार का सर्वोच्च आधिकारिक प्रतिनिधि होता है। वह राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक, रक्षा, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का काम करता है।
5. यह नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल गतिविधियों को देखते हुए यह नियुक्ति रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे भारत की कूटनीतिक मौजूदगी और संवाद की नीति को मजबूती मिलेगी।
6. भारत और उत्तर कोरिया के बीच कौन-कौन से सहयोग क्षेत्र हैं?
दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद, मानवीय सहयोग, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संपर्क और विदेश मंत्रालय स्तर की नियमित वार्ताएं प्रमुख सहयोग क्षेत्र हैं।
7. भारतीय विदेश सेवा (IFS) क्या है?
IFS भारत की वह अखिल भारतीय सेवा है जिसके अधिकारी विदेश मंत्रालय और दुनिया भर में भारतीय दूतावासों में कार्य करते हैं तथा बाद में राजदूत जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंचते हैं।
8. राजदूत की नियुक्ति कौन करता है?
विदेश मंत्रालय की सिफारिश पर केंद्र सरकार नियुक्ति को मंजूरी देती है। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम से औपचारिक नियुक्ति होती है और संबंधित देश की सहमति भी ली जाती है।
9. क्या भारत का उत्तर कोरिया में दूतावास है?
हाँ। भारत का उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में दूतावास है। दोनों देशों के बीच 1973 से दूतावास स्तर पर राजनयिक संबंध स्थापित हैं।

