Bankipur Assembly By-Election: प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा, जानिए बांकीपुर उपचुनाव क्यों बना बिहार की प्रतिष्ठा की लड़ाई? 

Bankipur Assembly By-Election

Bankipur Assembly By-Election: बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इसे बिहार की भाजपा सरकार की लोकप्रियता पर “जनमत संग्रह (Referendum)” बताया है, जबकि भाजपा ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा है कि 2025 विधानसभा चुनाव में जनता पहले ही उन्हें नकार चुकी है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी को “राजनीतिक धमाका” बताया है। ऐसे में यह उपचुनाव राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बन गया है।

बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में भाजपा, राजद, जन सुराज पार्टी और तेज प्रताप यादव की नई पार्टी समेत कई दल मैदान में हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और प्रशांत किशोर के बीच माना जा रहा है।

बांकीपुर सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?

यह सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई। नितिन नवीन ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में इस सीट से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और इसके बाद वे राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हो गए। विधानसभा सदस्यता छोड़ने के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराना जरूरी हो गया।

भाजपा ने किसे बनाया उम्मीदवार?

भाजपा ने इस बार अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वे पार्टी के युवा नेता हैं और कायस्थ समुदाय से आते हैं। भाजपा का मानना है कि बांकीपुर में कायस्थ और वैश्य मतदाताओं का प्रभाव काफी अधिक है, इसलिए यह सामाजिक समीकरण उसके पक्ष में जा सकता है।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। उन्होंने 2025 के चुनाव में नितिन नवीन के खिलाफ लगभग 47 हजार वोट हासिल किए थे।

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की नई पार्टी जनशक्ति जनता दल ने सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है।

दूसरी ओर जन सुराज पार्टी की ओर से स्वयं प्रशांत किशोर चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे यह मुकाबला और अधिक हाई-प्रोफाइल बन गया है।

Bankipur Assembly By-Election: प्रशांत किशोर ने इसे ‘रेफरेंडम’ कहा

प्रशांत किशोर का कहना है कि बांकीपुर का उपचुनाव केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं है, बल्कि यह बिहार में भाजपा सरकार की लोकप्रियता की परीक्षा है। उनके अनुसार बांकीपुर के मतदाता शिक्षित, जागरूक और आर्थिक रूप से संपन्न हैं, इसलिए वे विकास और सुशासन के आधार पर फैसला करेंगे।

उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि नितिन नवीन को जनता ने विधायक चुना था, लेकिन संसद जाने का मौका मिलते ही उन्होंने विधानसभा सीट छोड़ दी। उनके अनुसार अब जनता तय करेगी कि वह ऐसे राजनीतिक व्यवहार को स्वीकार करती है या नहीं।

भाजपा ने क्या जवाब दिया?

भाजपा ने प्रशांत किशोर के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी का प्रदर्शन जनता देख चुकी है।

उन्होंने कहा कि जन सुराज पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी का कुल वोट शेयर लगभग 3 प्रतिशत रहा। गिरिराज सिंह का दावा है कि कई सीटों पर पार्टी अपने उम्मीदवारों की जमानत भी नहीं बचा सकी।

भाजपा का कहना है कि नितिन नवीन को जनता लगातार पांच बार विधायक बना चुकी है और इस बार भी मतदाता भाजपा पर भरोसा बनाए रखेंगे।

शत्रुघ्न सिन्हा ने किया समर्थन

पश्चिम बंगाल के आसनसोल से तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रशांत किशोर के समर्थन में पोस्ट किया।

उन्होंने प्रशांत किशोर को दूरदर्शी, बुद्धिमान और जनता के बीच लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा कि उनका चुनाव मैदान में उतरना बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने उनकी उम्मीदवारी को “राजनीतिक धमाका” बताया।

हालांकि यह समर्थन व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस बिहार चुनाव में प्रमुख खिलाड़ी नहीं है।

 

बांकीपुर सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा लगातार चार बार विधायक रहे। उनके निधन के बाद उनके बेटे नितिन नवीन राजनीति में आए और 2006 के उपचुनाव से लेकर लगातार पांच विधानसभा चुनाव जीतते रहे।

इससे पहले इस सीट का नाम पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था। परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर बांकीपुर कर दिया गया।

इस सीट पर किसका कितना प्रभाव माना जाता है?

बांकीपुर पटना शहर का प्रमुख शहरी विधानसभा क्षेत्र है। यहां करीब 4 लाख मतदाता हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यहां कायस्थ समुदाय का वोट लगभग 15 से 20 प्रतिशत माना जाता है। इसके अलावा वैश्य (व्यापारी वर्ग) भी बड़ी संख्या में मौजूद है। शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और शहरी मतदाता इस सीट के चुनावी समीकरण को प्रभावित करते हैं।

इसी कारण सभी दल सामाजिक समीकरण के साथ-साथ शहरी विकास, रोजगार, आधारभूत ढांचे और प्रशासनिक मुद्दों पर भी चुनाव लड़ रहे हैं।

क्या यह उपचुनाव बिहार की राजनीति पर असर डाल सकता है?

विधानसभा की संख्या के लिहाज से यह केवल एक सीट का चुनाव है, लेकिन राजनीतिक संदेश के लिहाज से इसका महत्व कहीं अधिक माना जा रहा है।

यदि भाजपा अपनी परंपरागत सीट बचाने में सफल रहती है तो वह इसे अपनी संगठनात्मक ताकत और नितिन नवीन की लोकप्रियता के समर्थन के रूप में पेश करेगी।

वहीं यदि प्रशांत किशोर मजबूत प्रदर्शन करते हैं या जीत दर्ज करते हैं तो जन सुराज पार्टी को बिहार की राजनीति में नई पहचान मिल सकती है। इससे 2030 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की विपक्षी राजनीति में भी नए समीकरण बन सकते हैं।

 

जन सुराज पार्टी के लिए यह चुनाव क्यों अहम है?

जन सुराज पार्टी ने 2025 विधानसभा चुनाव में लगभग पूरे राज्य में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कोई सीट नहीं जीत सकी। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव पार्टी के लिए अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

प्रशांत किशोर स्वयं पहली बार इतने बड़े राजनीतिक मुकाबले में सीधे उम्मीदवार बने हैं। इसलिए इस चुनाव का परिणाम उनके राजनीतिक भविष्य और जन सुराज पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

FAQs:

भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने और विधानसभा सीट छोड़ने के कारण यह सीट खाली हुई है।

उनका कहना है कि यह बिहार में भाजपा सरकार की लोकप्रियता की परीक्षा है और इसे जनमत संग्रह की तरह देखा जाना चाहिए।

यह बिहार की राजधानी पटना जिले का प्रमुख शहरी विधानसभा क्षेत्र है।

भाजपा, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जन सुराज पार्टी (JSP) और जनशक्ति जनता दल सहित कई दल चुनाव लड़ रहे हैं।

पार्टी इस चुनाव को अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने और बिहार में मजबूत विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने के अवसर के रूप में देख रही है।

यह भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जहां नितिन नवीन और उनके परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है।

मतदान 30 जुलाई 2026 को होगा और मतगणना 3 अगस्त 2026 को होगी।

यह परिणाम भाजपा की राजनीतिक स्थिति और जन सुराज पार्टी की भविष्य की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है।

चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने जन सुराज पार्टी की स्थापना की और अब सक्रिय राजनीति में उतरकर स्वयं चुनाव लड़ रहे हैं।