Iran-US Ceasefire Ends: सीजफायर खत्म, ईरान पर फिर हमले… आखिर ट्रंप ने क्यों बदला रुख? 

Iran-US Ceasefire Ends

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त हो चुका है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “वे बेहद खतरनाक लोग हैं और अगर उनके पास परमाणु हथियार होगा तो वे उसका इस्तेमाल करेंगे।”

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आसपास ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर दी गई अस्थायी प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) भी वापस ले ली।

अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है, जिनके लिए उसने ईरान समर्थित ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है।

Image Credit: AP

ट्रंप बोले- सीजफायर खत्म, लेकिन बातचीत जारी रह सकती है

NATO महासचिव मार्क रुटे के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या युद्धविराम अभी भी लागू है, तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी नजर में यह अब खत्म हो चुका है।

हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तरह बातचीत के दरवाजे बंद नहीं कर रहा है। उनके अनुसार अमेरिकी वार्ताकार अभी भी कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें ईरानी नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।

यानी एक ओर सैन्य कार्रवाई जारी है तो दूसरी ओर संवाद की संभावना भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

ईरान पर 80 से ज्यादा ठिकानों पर अमेरिकी हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार हालिया सैन्य अभियान में ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम, ड्रोन लॉन्च साइट्स और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई नौसैनिक सुविधाएं शामिल थीं।

यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद की गई, जिनमें मिसाइल और ड्रोन से नुकसान पहुंचा था। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित समूह थे।

हमलों के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर लागू अस्थायी छूट भी समाप्त कर दी। इससे ईरान के ऊर्जा निर्यात पर फिर से व्यापक अमेरिकी प्रतिबंध लागू हो गए हैं।

ईरानी तेल पर फिर से सख्त प्रतिबंध

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने पहले युद्धविराम समझौते के तहत ईरान को 60 दिनों की सीमित छूट दी थी, ताकि वह तेल निर्यात कर सके। उस समय अमेरिकी प्रशासन ने इसे दोनों देशों के बीच सकारात्मक वार्ता का संकेत बताया था।

लेकिन अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। अमेरिका 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से लगातार विभिन्न प्रकार के आर्थिक प्रतिबंध ईरान पर लगाता रहा है। वर्तमान प्रतिबंधों के तहत लगभग सभी अमेरिकी व्यापार, सरकारी संपत्तियों, विदेशी सहायता, हथियारों की बिक्री और कई वित्तीय लेन-देन पर रोक लगी हुई है। केवल भोजन, दवाइयों और कुछ मानवीय जरूरतों से जुड़े उत्पादों को सीमित छूट प्राप्त है।

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पर लागू प्रतिबंध दुनिया में किसी भी देश के खिलाफ अमेरिका द्वारा लगाए गए सबसे व्यापक प्रतिबंधों में गिने जाते हैं।

 

NATO मंच से सहयोगियों पर भी नाराज दिखे ट्रंप

ईरान के अलावा ट्रंप ने NATO सहयोगी देशों पर भी खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका गठबंधन की सुरक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च करता है जबकि कई सहयोगी देश बराबर जिम्मेदारी नहीं निभा रहे।

Image Credit: NYT

उन्होंने विशेष रूप से स्पेन की आलोचना की क्योंकि स्पेन ने रक्षा खर्च को GDP के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य पर सहमति नहीं दी है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि यदि स्पेन सहयोग नहीं करता तो अमेरिका उसके साथ व्यापारिक संबंधों पर भी विचार कर सकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई यूरोपीय देशों ने ईरान अभियान के दौरान अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का पूरा उपयोग करने की अनुमति नहीं दी।

 

ब्रिटेन और ग्रीनलैंड को लेकर भी दोहराया पुराना रुख

ट्रंप ने ब्रिटेन पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि शुरुआत में ब्रिटिश सरकार ने अमेरिकी विमानों को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने में देरी की, जिससे सैन्य अभियान प्रभावित हुआ।

इसके अलावा उन्होंने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अमेरिका के दावे को दोहराया। ट्रंप ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हालांकि डेनमार्क की प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और डेनमार्क अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

 

मार्क रुटे ने माहौल शांत करने की कोशिश की

NATO महासचिव मार्क रुटे ने ट्रंप की नाराजगी को कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि अधिकांश NATO सदस्य अब रक्षा खर्च बढ़ाने पर सहमत हैं और आने वाले वर्षों में अमेरिका के बराबर रक्षा निवेश का लक्ष्य हासिल करेंगे।

Image Credit: AP

उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी सैन्य अभियानों में सहयोग न देने की घटनाएं बहुत सीमित थीं और अधिकांश सहयोगी अमेरिका के साथ खड़े हैं।

रुटे ने ट्रंप की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने NATO सहयोगियों पर रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए वह दबाव बनाया, जो कई अमेरिकी राष्ट्रपति वर्षों तक नहीं बना पाए थे।

 

तेल बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ा दबाव

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है।

ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध दोबारा लागू होने और सैन्य हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर और गहरा हो सकता है।

 

क्या आगे फिर बातचीत की संभावना है?

हालांकि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा कर दी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी वार्ताकार बातचीत जारी रखने के पक्ष में हैं। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान अमेरिकी हमलों और नए प्रतिबंधों का क्या जवाब देता है तथा दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाते हैं या फिर एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटते हैं।

 

FAQ

  1. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम क्यों समाप्त हुआ?
    अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद उसने जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम समाप्त घोषित कर दिया।
  2. अमेरिका ने ईरान पर किन ठिकानों को निशाना बनाया?
    अमेरिका ने एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, तटीय रडार, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन लॉन्च साइट्स और IRGC के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
  3. अमेरिका ने ईरानी तेल पर फिर से प्रतिबंध क्यों लगाए?
    वॉशिंगटन ने जहाजों पर हुए हमलों के बाद 60 दिनों की अस्थायी तेल निर्यात छूट वापस लेते हुए फिर से आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिए।
  4. ट्रंप ने NATO सहयोगियों की आलोचना क्यों की?
    उन्होंने आरोप लगाया कि कई NATO देशों ने रक्षा खर्च पर्याप्त नहीं बढ़ाया और ईरान अभियान में अमेरिका को पूरा सहयोग नहीं दिया।
  5. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व क्या है?
    यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों पर पड़ता है।
  6. क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह खत्म हो गई है?
    नहीं। ट्रंप ने कहा कि उनकी नजर में युद्धविराम खत्म हो चुका है, लेकिन अमेरिकी वार्ताकार अभी भी बातचीत जारी रखना चाहते हैं।
  7. इस घटनाक्रम का वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
    तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।