अयोध्या के राम मंदिर में कथित Donation Theft मामले ने अब देश की सर्वोच्च अदालत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए नई SIT (Special Investigation Team) गठित करने का सुझाव दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पर विचार करने और डीजीपी से चर्चा करने को कहा है। इस मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दो वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया है।
क्या है राम मंदिर Donation Theft मामला?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान, सोना और चांदी समेत अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन और चोरी का मामला जून 2026 की शुरुआत में सामने आया था। आरोप है कि मंदिर में चढ़ाए गए दान का पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से नहीं रखा गया और कुछ कीमती वस्तुएं गायब हो गईं।इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
Donation Theft मामले में नई SIT की मांग क्यों उठी?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पूछा कि क्या इस मामले की जांच SIT कर रही है? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस जांच कर रही है, जबकि मौजूदा SIT केवल निगरानी की भूमिका में है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक नई और प्रभावी SIT गठित की जाए, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हों। अदालत ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को इस संबंध में निर्देश लेने को कहा है।नई SIT बनने की स्थिति में जांच का दायरा और अधिक व्यापक हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह एक “साधारण आपराधिक अपराध” का मामला है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को मामले का राजनीतिकरण करने से बचने की सलाह दी।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि:
- जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है।
- मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
- अदालत रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे की सुनवाई करेगी।
- कई याचिकाओं के एक ही मुद्दे पर दाखिल होने पर अदालत ने आपत्ति जताई है।
मंदिर के दान का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने सुझाव दिया कि मंदिर में आने वाले दान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को पारदर्शिता का भरोसा मिल सके।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर दान को सार्वजनिक करना व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि कोई भी व्यक्ति झूठा दावा कर सकता है कि उसने हीरे या अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान की थीं। लेकिन अदालत ने इस बात पर सहमति जताई कि मंदिर में आने वाले दान की उचित इन्वेंट्री (Inventory) तैयार की जानी चाहिए और उसका लेखा-जोखा रखा जाना चाहिए।
New SIT on Donation Theft से क्या बदलेगा?
यदि नई SIT गठित होती है तो जांच अधिक स्वतंत्र और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सकती है। इससे:
- दान में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होगी।
- मंदिर प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।
- श्रद्धालुओं का भरोसा मजबूत होगा।
- भविष्य में मंदिरों के दान प्रबंधन के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों बेहद महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
Donation Theft मामले में सुप्रीम कोर्ट का नई SIT गठित करने का सुझाव इस बात का संकेत है कि अदालत निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना चाहती है। आठ गिरफ्तारियों और चल रही जांच के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश सरकार नई SIT के गठन को लेकर क्या फैसला लेती है। राम मंदिर जैसी आस्था से जुड़े संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
FAQs:
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों वाली SIT गठित की जानी चाहिए।
यह मामला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य वस्तुओं में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।
उत्तर प्रदेश पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट मांगी है और अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
दान के रिकॉर्ड, कथित चोरी, वित्तीय अनियमितताओं और मंदिर प्रशासन की जवाबदेही समेत पूरे मामले की जांच नई SIT के दायरे में आ सकती है।

